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तेल के लिए केंद्र सरकार-Vedanta के बीच की कानूनी जंग पर आया फैसला, ONGC भी है हिस्सेदार

हाईकोर्ट ने उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें केंद्र सरकार को वेदांता, ओएनजीसी के साथ अपने कॉन्ट्रैक्ट को 2030 तक बढ़ाने का निर्देश दिया गया था।

Vedanta, ongc, Barmer block30 प्रतिशत की हिस्सेदार ONGC है, बाकी हिस्सेदारी वेदांता लिमिटेड के पास है। (Photo-Indian Express )

दिल्ली हाईकोर्ट ने माइनिंग और ऑयल क्षेत्र की कंपनी वेदांता को बड़ा झटका दिया है। तेल से जुड़े एक अहम मामले में कोर्ट ने ​केंद्र सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया है।

क्या है मामला: दरअसल, हाईकोर्ट ने उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें केंद्र सरकार को वेदांता, ओएनजीसी के साथ अपने कॉन्ट्रैक्ट को 2030 तक बढ़ाने का निर्देश दिया गया था। ये मामला राजस्थान स्थित बाड़मेर ब्लॉक से तेल के प्रोडक्शन से जुड़ा था। आपको बता दें कि एकल न्यायाधीश ने इस मामले में वेदांता के पक्ष में आदेश दिया था। बाड़मेर ब्लॉक में सरकारी कंपनी ओएनजीसी भी 30 प्रतिशत की हिस्सेदार है। बाकी हिस्सेदारी वेदांता लिमिटेड के पास है।

बता दें कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) की देश के तेल एवं गैस उत्पादन में हिस्सेदारी 70 प्रतिशत पर पहुंच गई है। एक दशक पहले यह हिस्सेदारी 53 प्रतिशत थी।

वेदांता को क्या थी समस्या: वेदांता ने रिपोर्ट में कहा था कि उसका यह अधिकार बनता है कि राजस्थान स्थित बाड़मेर ब्लॉक के लाइसेंस का उसके नाम विस्तार स्वत: किया जाए। सरकार इस परियोजना का लाइसेंस वेदांता को पहले की शर्तों पर ही दस साल और देने के लिए अक्टूबर 2018 में राजी हो गयी थी लेकिन साथ में उसने इस ब्लॉक के तेल और गैस में अपना हिस्सा 10 प्रतिशत बढ़ाए जाने की शर्त लगायी। वेदांता ने सरकार की इस अतिरिक्त मांग को अदालत में चुनौती दी थी।

क्या कहा दिल्ली हाईकोर्ट ने: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार राजस्थान में बाड़मेर ऑयल ब्लॉक से तेल निकालने के लिए वेदांता के साथ उत्पादन साझेदारी समझौते (पीएससी) को 10 साल बढ़ाने के लिए मुनाफे में 10 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सा मांग सकती है। मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने कहा कि समझौते को आगे बढ़ाने के सरकार के अधिकार पर तब तक कोई शर्त नहीं लगाई जा सकती है, जब तक कि वे सार्वजनिक हित में हैं।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य के हित को ध्यान में रखते हुए वेदांता को एकतरफा शर्तों पर पीएससी के विस्तार की मांग करने का अधिकार नहीं है। अदालत ने कहा कि संवैधानिक जनादेश के तहत राज्य प्राकृतिक संसाधनों का एक ट्रस्टी है।

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