सरकार भले ही टैक्सपेयर्स को नए टैक्स सिस्टम में शिफ्ट होने के लिए बढ़ावा दे रही है, लेकिन पुराने टैक्स सिस्टम में अभी भी कई छूट और कटौतियां मिलती हैं, जो किसी व्यक्ति की टैक्स लायबिलिटी को काफी कम कर सकती हैं। आयकर अधिनियम, 1961 के तहत कुछ शर्तें पूरी होने पर कई तरह की आय पूरी तरह से टैक्स-फ्री रहती है।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि इनमें से अधिकतर छूट और कटौतियां तभी मिलती हैं जब कोई टैक्सपेयर पुराने टैक्स सिस्टम को चुनता है। नए टैक्स सिस्टम में टैक्स रेट कम हैं लेकिन छूट और कटौतियां का फायदा काफी हद तक खत्म हो जाता है।

सरकारी डेटा बताता है कि लगभग 88% टैक्सपेयर्स पहले ही नए टैक्स सिस्टम में शिफ्ट हो चुके हैं, इसका बड़ा कारण यह है कि सरकार ने टैक्स स्लैब को बड़ा करके और टैक्स रेट कम करके धीरे-धीरे सिस्टम को और ज्यादा आकर्षक बना दिया है।

बदले हुए स्ट्रक्चर के तहत, टॉप 30% टैक्स स्लैब अब 24 लाख रुपये से ऊपर से शुरू होता है, जिससे यह सिस्टम कई सैलरी पाने वाले लोगों के लिए आकर्षक बन गया है जो कई डिडक्शन क्लेम नहीं करते हैं।

पुराना टैक्स सिस्टम (Old Tax Regime)

– 2.5 लाख रुपये तक – कोई नहीं
– 2.5 लाख रुपये से 5 लाख रुपये – 5%
– 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये – 20%
– 10 लाख रुपये से ज्यादा – 30%

यहां 5 तरह की कमाई टैक्स फ्री (कुछ शर्तों के साथ) हो सकती है

खेती से होने वाली आय

कृषि संबंधी गतिविधियों से अर्जित आय आयकर अधिनियम की धारा 10(1) के अंतर्गत आयकर से पूर्णतः मुक्त है। इसमें कृषि की खेती से प्राप्त आय, कृषि उपज की बिक्री से प्राप्त आय और कृषि भूमि से प्राप्त किराया शामिल है।

हालांकि, अगर किसी करदाता की अन्य स्रोतों से भी आय है, तो कुछ परिस्थितियों में कृषि आय को टैक्स दर तय करने के लिए जोड़ा जा सकता है, खासकर जब यह आय तय सीमा से अधिक हो। इससे टैक्स स्लैब निर्धारित करने में इसका उपयोग किया जाता है, भले ही कृषि आय पर सीधे टैक्स न लगाया जाए।

तय लिमिट के अंदर गिफ्ट

कुछ शर्तों के तहत गिफ्ट भी टैक्स-फ्री हो सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति को एक वित्तीय वर्ष में अपने से अलग किसी से 50,000 रुपये तक के पैसे के गिफ्ट मिलते हैं, तो वह रकम टैक्स से मुक्त होती है। हालांकि, अगर कीमत 50,000 रुपये से ज्यादा है, तो पूरी राशि टैक्सेबल हो सकती है। शादी के मौके पर मिले गिफ्ट पूरी तरह टैक्स-फ्री होते हैं।

लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी से मिलने वाली रकम

लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी से मिलने वाला पैसा आमतौर पर सेक्शन 10(10D) के तहत टैक्स-फ्री होता है। लेकिन, यह छूट प्रीमियम-टू-सम एश्योर्ड रेश्यो से जुड़ी शर्तों पर निर्भर करती है।

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) पर मिला ब्याज

पीपीएफ भारत में सबसे ज्यादा टैक्स बचाने वाले सेविंग्स इंस्ट्रूमेंट्स में से एक है। PPF डिपॉजिट पर मिला ब्याज सेक्शन 10(11) के तहत पूरी तरह से टैक्स-फ्री है। सिर्फ ब्याज ही नहीं, बल्कि पूरी मैच्योरिटी रकम भी टैक्स से मुक्त है, जिससे PPF एक EEE (एग्जेम्प्ट-एग्जेम्प्ट-एग्जेम्प्ट) कैटेगरी का इन्वेस्टमेंट बन जाता है।

रिटायरमेंट पर मिली ग्रेच्युटी

रिटायरमेंट या इस्तीफे पर मिली ग्रेच्युटी कुछ शर्तों के आधार पर पूरी तरह या थोड़ी टैक्स-फ्री होती है।

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