US Tariff Deal Impact of On Iindia’s Trade: अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ डील के बाद दोनों देशों के आपसी व्यापार में नई संभावनाएं दिख रही हैं। अगस्त 2025 में अमेरिकी टैरिफ 50% तक बढ़ने से भारतीय निर्यात पर दबाव आया था, लेकिन अब इसे घटाकर 18% कर दिया गया है। सवाल यह है कि इस डील से किन सेक्टर्स को सबसे ज्यादा फायदा होगा? सवाल यह भी है कि टैरिफ घटने के बाद चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, थाईलैंड, वियतनाम, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के मुकाबले भारत कहां खड़ा है। रुबिक्स डेटा साइंसेज की लेटेस्ट रिपोर्ट में आंकड़ों के जरिये इन मुद्दों का विश्लेषण किया गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक कुछ सेक्टर्स में भारत की स्थिति मजबूत है, जबकि कुछ क्षेत्र ऐसे हैं, जिनमें अभी जापान, वियतनाम और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से कड़ा मुकाबला होने वाला है।
भारत-अमेरिका व्यापार का मौजूदा हाल
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 (FY2025) में दोनों देशों का कुल आपसी व्यापार 132.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। इसमें भारत ने अमेरिका को 86.5 अरब डॉलर का निर्यात (Export) किया, जबकि आयात (Import) 45.7 अरब डॉलर रहा। यानी इंपोर्ट की तुलना में एक्सपोर्ट करीब 1.9 गुना अधिक रहा, जिससे आपसी व्यापार में भारत को अच्छा-खासा सरप्लस हासिल हो रहा था। वित्त वर्ष 2019-20 (FY2020) से FY2025 के बीच भारत का ट्रेड सरप्लस 17.3 अरब डॉलर से 2.3 गुना बढ़कर 40.8 अरब डॉलर हो गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इस दौरान इंपोर्ट में सालाना बढ़ोतरी की औसत दर (CAGR) 5% रही, जबकि एक्सपोर्ट सालाना 10% की रफ्तार से बढ़ा।
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टैरिफ बढ़ने के बाद क्या बदला
अगस्त 2025 में अमेरिका की ट्रंप सरकार द्वारा 50% टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत के एक्सपोर्ट पर उसका असर फौरन दिखने लगा। अगस्त में भारत ने अमेरिका को 6.8 अरब डॉलर के गुड्स का निर्यात किया था, जो अगले ही महीने यानी सितंबर में 20.6% गिरकर 5.4 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। लेकिन इसके बाद भारतीय कंपनियों ने कीमतों और सप्लाई चेन में बदलाव कर हालात को संभालना शुरू कर दिया। जिसके चलते अक्टूबर और नवंबर में एक्सपोर्ट में फिर से अच्छी ग्रोथ दर्ज की गई और दिसंबर 2025 तक निर्यात 6.9 अरब डॉलर के लगभग पुराने स्तर पर लौट आया। वित्त वर्ष 2025-26 (FY2026) के पहले 9 महीनों में भारत का कुल एक्सपोर्ट 65.9 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 9.7% अधिक है।
किन सेक्टर्स पर पड़ा सबसे ज्यादा असर
अप्रैल से नवंबर 2025 के दौरान, अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात में 52% का योगदान करने वाले भारत के टॉप 12 एक्सपोर्ट सेक्टर्स को ऊंचे टैरिफ के कारण काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। आंकड़ों से पता चलता है कि इन 12 सेक्टर्स में से 9 में पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में एक्सपोर्ट वैल्यू में गिरावट या ठहराव आया। टैरिफ बढ़ने से सबसे ज्यादा मार लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स पर पड़ी। ज्वेलरी, बेड लिनेन, टेक्सटाइल फर्निशिंग, सीफूड और ऑटो पार्ट्स जैसे प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट सबसे अधिक घटा। मिसाल के तौर पर बिना तराशे डायमंड्स (uncut diamonds) में 58.83% की भारी गिरावट देखी गई, जबकि ज्वेलरी में 24.43% की गिरावट आई। वहीं रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, ऑटो कंपोनेंट्स, क्रस्टेशियन (crustaceans), बेड लिनन, और टेक्सटाइल फर्निशिंग जैसे अन्य महत्वपूर्ण एक्सपोर्ट्स में भी 5.67% से 12.02% तक की गिरावट दर्ज की गई। लेकिन अब टैरिफ घटकर 18% हो जाने से इन सेक्टर्स को भारी राहत मिलने की उम्मीद है। कम ड्यूटी से उनकी कीमतें फिर से होड़ में टिक पाएंगी, जिससे अमेरिका में उनकी मांग बढ़ने की उम्मीद की जा रही है।
ऊंचे टैरिफ के बावजूद बेहतर प्रदर्शन करने वाले सेक्टर
इसके उलट इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे सेक्टर्स ने टैरिफ घटने से पहले भी अच्छा प्रदर्शन किया। स्मार्टफोन में 191.52%, सेमीकंडक्टर में 23.4%, और इलेक्ट्रिकल ट्रांसफार्मर में 20.26% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस प्रदर्शन की बदौलत 2025 की दूसरी तिमाही में भारत चीन को पीछे छोड़कर अमेरिका का सबसे बड़ा स्मार्टफोन सप्लायर बना। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत किए गए भारी निवेश ने भी इस ग्रोथ को सपोर्ट किया। आने वाले समय में यही सेक्टर भारत के लिए सबसे बड़ा फायदा देने वाले माने जा रहे हैं।
पाकिस्तान, बांग्लादेश से काफी आगे
रिपोर्ट के मुताबिक अगर पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों से तुलना करें तो भारत साफ तौर पर आगे है। इन देशों का अमेरिका को एक्सपोर्ट काफी कम है और उनके पास प्रोडक्ट रेंज भी सीमित है। भारत के पास स्केल और डायवर्सिटी दोनों का फायदा है।
वहीं वियतनाम और थाईलैंड जैसे देशों के साथ मुकाबला ज्यादा करीबी है। इन देशों को भारत लेबर-इंटेंसिव गुड्स और फार्मा में अच्छी टक्कर दे सकता है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में वियतनाम और मलेशिया अभी आगे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक जापान और दक्षिण कोरिया से तुलना करने पर तस्वीर अलग दिखती है। ये देश हाई-वैल्यू टेक्नोलॉजी और मशीनरी में मजबूत हैं। इनके मुकाबले भारत का एडवांटेज मुख्य तौर पर लागत से ज्यादा प्रभावित होने वाले सेक्टर्स तक सीमित है, जिसमें टेक्सटाइल, दवाएं और कुछ इंजीनियरिंग गुड्स प्रमुख हैं।
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कंपटीशन में कहां खड़े हैं हम
रिपोर्ट के मुताबिक जापान का अमेरिका को एक्सपोर्ट 152 अरब डॉलर और टैरिफ रेट 15% है। वहीं वियतनाम का एक्सपोर्ट 142 अरब डॉलर और टैरिफ 20%, जबकि दक्षिण कोरिया का एक्सपोर्ट 135 अरब डॉलर और टैरिफ 15% है। इनके मुकाबले भारत का अमेरिका को एक्सपोर्ट 91 अरब अमेरिकी डॉलर है। साथ ही अब हमारे पास 18% प्रेफरेंशियल टैरिफ का फायदा भी होगा। चीन का अमेरिका को एक्सपोर्ट 463 अरब डॉलर है, जो भारत के मुकाबले 5 गुना से भी ज्यादा है, लेकिन चीन पर अमेरिका का औसत टैरिफ अभी 37% है, जो भारत के मुकाबले काफी अधिक है। यानी यह बात हमारे हक में है।
दूसरी तरफ थाईलैंड 66 अरब डॉलर के एक्सपोर्ट और 19% टैरिफ के साथ भारत से नीचे है। इसके बाद मलेशिया का नंबर है, जिसका एक्सपोर्ट 54 अरब डॉलर और टैरिफ 19% है। वहीं कंबोडिया का एक्सपोर्ट 13 अरब डॉलर और टैरिफ 19% है। इन देशों के मुकाबले भारत को बेहतर टैरिफ के साथ ही साथ स्केल का फायदा भी मिलता है।
भारत के लिए पकड़ बढ़ाने का मौका
रिपोर्ट के मुताबिक टैरिफ में कटौती से भारत के लिए अमेरिकी बाजार में फिर से पकड़ मजबूत करने का मौका खुला है। इससे देश के लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स को राहत मिलेगी और इलेक्ट्रॉनिक्स व सेमीकंडक्टर जैसे उभरते सेक्टर्स में ग्रोथ की रफ्तार बनी रहने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, यह डील भारत को पाकिस्तान और बांग्लादेश से आगे रखती है, जबकि वियतनाम और थाईलैंड लगभग बराबरी में खड़े हैं। जबकि जापान और दक्षिण कोरिया की बराबरी में आने के लिए अभी लंबा सफर तय करना होगा।
