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नीरव मोदी का कारनामा, चार कंपनियों से बिकवाया था एक ही हीरा

कार्ने ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि नीरव मोदी और उसके सहयोगियों ने बिक्री में तेजी का दिखावा किया। फर्जी रिपोर्ट दिखाकर उन्होंने कई देशों में 4 अरब डॉलर का लोन ले लिया। ये लेनदेन 20 कथित फर्जी कंपनियों के जरिए किया गया। इन कंपनियों का मालिक नीरव मोदी था।

नीरव मोदी। (File Photo)

साल 2011 में, तीन कैरेट वजनी एक बड़ा येलो डायमंड पूरी दुनिया में घूमता रहा। इसी के साथ उसकी कीमतों में भी करोड़ों डॉलर का उतार—चढ़ाव आ रहा था। इस हीरे को पांच हफ्ते के भीतर करीब चार कंपनियों ने खरीदा और बेचा। लेकिन इनमें से ज्यादातर कंपनियां कागजी थीं। जबकि इन सभी कंपनियों का मालिक प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से भारतीय अरबपति हीरा कारोबारी नीरव मोदी था। ये खुलासा अमेरिका की दिवालिया जांच परीक्षक की रिपोर्ट में हुआ है।

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, राउंड ट्रिपिंग ट्रेडिंग का ये खेल ही भारत के इतिहास के सबसे बड़े पीएनबी बैंकिंग घोटाले का मूल था। बीते 25 अगस्त को इस मामले में अमेरिका की सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन और न्याय विभाग के वकील ने अपनी रिपोर्ट दाखिल की। रिपोर्ट में दावा किया गया​ कि नीरव मोदी ने साल 2011 से 2017 के बीच कुल 21.38 करोड़ डॉलर के फर्जी बिल तैयार किए। इन्हीं बिल के आधार पर वह लेटर ऑफ अंडरटेकिंग्स के जरिए पंजाब नेशनल बैंक से लोन लेता रहा।

अमेरिका में तीन फर्जी जूलरी कंपनियों के दीवालिया होने की जांच जॉन जे. कार्ने कर रहे हैं। ये तीनों कंपनियां भी अप्रत्यक्ष रूप से नीरव मोदी की हैं। कार्ने ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि नीरव मोदी और उसके सहयोगियों ने बिक्री में तेजी का दिखावा किया। इसी की फर्जी रिपोर्ट दिखाकर उसने करीब 4 अरब डॉलर का लोन ले लिया। ये सारा लेनदेन 20 कथित फर्जी कंपनियों के जरिए किया गया। इन सभी कंपनियों का मालिकान प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से नीरव मोदी ही था।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगस्त 2011 में चमकीला येलो डायमंड सबसे पहले अमेरिकी कंपनी फायरस्टार डायमंड को बेचा गया। बाद में इसे हांगकांग की फैंसी क्रिएशन नाम की कागजी कंपनी को भेजा गया। इसकी कीमत 11 लाख डॉलर बताई गई। इन दोनों फर्मों का मालिक कथित तौर पर परोक्ष रूप से खुद नीरव मोदी था। दो हफ्ते बाद इसी हीरे को सोलर एक्सपोर्ट कंपनी को भेजा गया। कीमत 11.83 लाख डॉलर दिखाई गई। सोलर एक्सपोर्ट भी नीरव मोदी फैमिली ट्रस्ट की पार्टनरशिप वाली कंपनी थी। इस कंपनी का मालिकान फायरस्टार डायमंड के पास था।

जॉन जे. कॉर्ने की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूयॉर्क की फायरस्टार ने फिर से हांगकांग की फैंसी क्रिएशन से इस हीरे का सौदा कर लिया। इस बार हीरे की कीमत 11.6 लाख डॉलर बताई गई। ठीक दो हफ्ते बाद न्यूयॉर्क की ए. जेफ डायमंड कंपनी ने व्लर्ड डायमंड डिस्ट्रीब्यूशन को हीरा बेच दिया। इस बार इस हीरे की कीमत बढ़कर 12 लाख डॉलर हो चुकी थी। व्लर्ड डायमंड डिस्ट्रब्यूशन यूएई की कंपनी थी। लेकिन इस कंपनी का मालिकान भी नीरव मोदी के ही पास था। यही सिलसिला बार-बार आगे बढ़ाया जा रहा था।

बाजार के कायदों से उलट नीरव मोदी अमेरिका में हीरा भेजने के लिए फेडएक्स कोरियर कंपनी की मदद ली। मोदी ने अपनी कंपनियों का जिस कोरियर फर्म से कॉन्ट्रैक्ट था, उस पर भरोसा नहीं किया। मोदी ने जिन हीरों का कारोबार किया था, उनमें 17 लाख डॉलर की कीमत वाला 17 कैरेट का एक हीरा भी शामिल था। इस हीरे के लिए फेडएक्स ने सिर्फ 1.5 लाख डॉलर का इंश्योरेंस किया था। कॉर्ने की रिपोर्ट पर अगर यकीन किया जाए तो नीरव मोदी की संपत्तियों पर पीएनबी का दावा मजबूत नजर आता है। अमेरिका में जब फायरस्टार डायमंड की संपत्तियों की बिक्री शुरू होगी तो पीएनबी भी रिपोर्ट के आधार पर हिस्सा मांग सकती है।

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