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UrbanLadder के जरिए फर्नीचर बिजनेस में कूदे मुकेश अंबानी, जानें- कब और किसने बनाई थी यह कंपनी

रिटेल बिजनेस में लगातार दखल बढ़ाने की कोशिशों में जुटे देश के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी ने अब फर्नीचर के कारोबार में भी एंट्री कर ली है। उन्होंने ऑनलाइन होम डेकोर कंपनी UrbanLadder में 182.12 करोड़ रुपये का निवेश किया है।

urbanladderurbanladder के फाउंडर आशीष गोयल और रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी

रिटेल बिजनेस में लगातार दखल बढ़ाने की कोशिशों में जुटे देश के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी ने अब फर्नीचर के कारोबार में भी एंट्री कर ली है। उन्होंने ऑनलाइन होम डेकोर कंपनी UrbanLadder में 182.12 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इस साल रिलायंस की ओर से यह चौथा अधिग्रहण है। इससे पहले कंपनी ने फ्यूचर ग्रुप, नेटमेड्स और कन्नन डिपार्टमेंटल स्टोर का अधिग्रहण किया था। कंपनी ने 182 करोड़ रुपये के इन्वेस्टमेंट के जरिए UrbanLadder में 96 फीसदी की हिस्सेदारी खरीद ली है। इसके अलावा कंपनी ने 2023 तक 75 करोड़ रुपये अतिरिक्त निवेश करने का भी ऐलान किया है। आइए जानते हैं, कब और किसने की थी UrbanLadder की स्थापना…

इस कंपनी की स्थापना राजीव श्रीवास्तव और आशीष गोयल ने 2012 में की थी। होम फर्नीचर की ऑनलाइन सेल के लिए स्थापित इस कंपनी के चीफ टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट ऑफिसर के तौर पर राजीव श्रीवास्तव काम संभाल रहे थे। हालांकि 2019 में उन्होंने इस स्टार्टअप से इस्तीफा दे दिया था। बीते कई सालों में भले ही UrbanLadder घाटे में चल रही है, लेकिन उसने एक नया कॉन्सेप्ट जरूर स्थापित किया है। हालांकि जिस दौर में कंपनी स्थापित हुई थी, तब फर्नीचर जैसी चीजें डिजिटल तौर पर खरीदने का क्रेज नहीं था, लेकिन अब स्थितियां बदली हैं।

UrbanLadder की स्थापना से पहले आशीष गोयल मैककिंसी ऐंड कंपनी में काम करते थे। इसके अलावा वह अमर चित्र कथा के भी सीईओ रह चुके थे। राजीव श्रीवास्तव की बात करें तो वह Cognizant और Yahoo जैसी दिग्गज कंपनियों का हिस्सा रह चुके थे। फर्नीचर के अलावा UrbanLadder होम डेकोरेशन के अन्य सामान भी बेचती रही है। कंपनी ने 2017 में ऑनलाइन बिजनेस के साथ ही ऑफलाइन कारोबार पर भी फोकस किया था। दरअसल UrbanLadder ने बेंगलुरु में 8 जुलाई 2017 को अपना पहला ऑफलाइन स्टोर खोला था। अब तक कंपनी के 4 ऑफलाइन स्टोर खुल चुके हैं।

वित्त वर्ष 2018-19 में UrbanLadder को 49 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। 2012 में स्थापना के बाद यह पहला मौका था, जब कंपनी को लाभा हुआ था। इससे पहले 2017-18 में कंपनी को 118.66 करोड़ रुपये और 2016-17 में 457.97 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। अब रिलायंस की ओर से अधिग्रहण किए जाने के बाद UrbanLadder फंडिंग से जुड़ी चिंता नहीं झेलनी पड़ेगी। इसके अलावा मौजूदा सीईओ आशीष गोयल आगे भी इस भूमिका में बने रहेंगे और कंपनी रिलायंस के एक अलग ब्रांड के तौर पर काम करेगी।

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