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UP में बिजली वितरण कंपनियों के घाटे में इजाफा: कैग रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश में बिजली वितरण कंपनियों का संचित घाटा 31 मार्च 2014 तक 60.10 करोड़Þ रुपए पहुंच गया जबकि 2011-12 में यह घाटा 33.60 करोड़Þ रुपए ही था।

Author लखनऊ | March 14, 2016 01:16 am
(File Photo)

उत्तर प्रदेश में बिजली वितरण कंपनियों का संचित घाटा 31 मार्च 2014 तक 60.10 करोड़Þ रुपए पहुंच गया जबकि 2011-12 में यह घाटा 33.60 करोड़ रुपए ही था। यह जानकारी 31 मार्च 2015 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए प्रदेश के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के बारे में प्रस्तुत भारत के नियंत्रक -महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में दी गई है।

उत्तर प्रदेश विद्युत निगम लिमिटेड के कामकाज की आलोचना करते हुए कैग ने कहा कि बिजली वितरण कंपनियों का घाटा बढने का मुख्य कारण सबसिडी की धनराशि प्राप्त करने के लिए जो दावा किया गया, वह वित्तीय पुनर्गठन योजना (एफआरपी) की बाध्यकारी शर्तो के मुताबिक नहीं था और साथ ही अधिक रिण लिए जाने के कारण देय ब्याज का भार भी बढ़ता चला गया।

विधानसभा के बजट सत्र में प्रस्तुत कैग रिपोर्ट के मुताबिक विद्युत उत्पादन निगम ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से 9182 करोड़ रुपए की भारी भरकम धनराशि अल्पकालिक रिण के रूप में ले ली जिसके कारण वितरण कम्पनियों को 2013-14 और 2014-15 में क्रमश: 4591 और 843 करोड़ रुपए से अधिक का ब्याज चढ गया। परिणाम यह हुआ कि इन कम्पनियों का आर्थिक स्थिति और खराब हो गई।

कैग ने यह भी कहा है कि वितरण कंपनियों की आर्थिक स्थिति बिगड़ने का एक कारण यह भी रहा कि राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2012 में इनको मिलने वाली 10445 करोड़ रुपए की सबसिडी और 1131 करोड़ रुपए से अधिक के विद्युत देनदारी का भुगतान नहीं किया।
कैग रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि योजना की बाध्यकारी शर्तो का अनुपालन नहीं होने से ये कंपनियां केंद्र सरकार से पूंजी प्रतिपूर्ति सहायता के रूप में 3952 करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि से वंचित रह गईं। इतना ही नहीं औसत आपूर्ति लागत और औसत राजस्व वसूली के अन्तर में कमी न कर पाने की वजह से ये कम्पनियां योजना के तहत नकदी सहायता के रूप में मिलने वाली 1377 करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि से वंचित रह गई।

उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम लिमिटेड के कामकाज की समीक्षा करते हुए कैग ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 2009-10 से 2014-15 के दौरान इसने 740 सेतुओं में से 509 का निर्माण पूरा कर लिया जबकि मार्च 2015 के अन्त तक 231 सेतु निर्माणाधीन थे। रिपोर्ट में कैग ने कहा है कि आठ मंडलों में जिन 88 सेतुओं को नमूना जांच के लिए चुना गया उनमें से 53 में 438 करोड़ की धनराशि मूल धनराशि से अधिक व्यय करनी पडी और इसकी असली वजह इनके निर्माण में होने वाला विलम्ब था।

इतना ही नहीं समुचित नियोजन की कमी के कारण इसी अवधि में 360 करोड़ से 688 करोड़ रुपए की धनराशि बिना उपयोग के पड़ी रही। सेतु निगम ने मशीनों व अन्य कार्यो के लिए नियमानुसार लागत तय नहीं की जिसके कारण इसे 142 करोड़ रुपए का अधिक भुगतान करना पड़ा।
प्रदेश में राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के कार्यकलापों की लेखा परीक्षा में कैग ने कहा कि हरदुआगंज ताप बिजली घर का उत्पादन 2010 से 2015 के बीच निर्धारित लक्ष्य 8287 के मुकाबले 6159 मेगावाट रहा और इस तरह 2128 मेगावाट की क्षति यानि 951 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ।
कंपनी की सातवीं इकाई के नवीनीकरण में लगभग छह साल का वक्त लग गया, जिसकी वजह से 570 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

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