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लॉकडाउन में देश का हर चौथा आदमी बेरोजगार, गांवों में काम की है ज्‍यादा किल्लत, जानें- क्यों बढ़ता जा रहा संकट

Unemployment rate in india: देश में लगभग हर चौथा शख्स बेरोजगारी की मार झेल रहा है। पिछले सप्ताह बेरोजगारी का राष्ट्रीय औसत 24.01 फीसदी था, जो इस बार बढ़कर 24.34 के लेवल पर पहुंच गया है।

unemployment rateग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही है बेरोजगारी की दर

देश में लॉकडाउन कोरोना के संकट से निपटने के लिए लागू किया गया था, लेकिन इसके चलते रोजगार का संकट गहरा गया है। देश में लगातार बेरोजगारी बढ़ रही है। बीते एक सप्ताह में गांवों में बेरोजगारी दर में 2 फीसदी का इजाफा हो गया है। प्राइवेट रिसर्च ग्रुप सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (CMIE) के मुताबिक ग्रामीण भारत में बेरोजगारी की दर 25.09 फीसदी हो गई है, जो पिछले सप्ताह 22.79 पर्सेंट ही थी। हालांकि इस दौरान शहरी क्षेत्र में बेरोजगारी की दर में गिरावट देखने को मिली है और अब यह 22.72 फीसदी ही रह गई है, जो पहले 26.95 पर्सेंट थी।

हालांकि इसके बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजदारी की दर में लगातार इजाफा हो रहा है। फिलहाल देश में लगभग हर चौथा शख्स बेरोजगारी की मार झेल रहा है। पिछले सप्ताह बेरोजगारी का राष्ट्रीय औसत 24.01 फीसदी था, जो इस बार बढ़कर 24.34 के लेवल पर पहुंच गया है। गांवों में बेरोजगारी की समस्या बढ़ने की एक बड़ी वजह शहरों से गांवों की ओर मजदूरों का पलायन है। इसके चलते पहले से ही बेरोजगारी के संकट से जूझ रहे ग्रामीण क्षेत्रों में आंकड़ा नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। हालांकि इस दौरान शहरी क्षेत्र में 18 मई से काफी हद तक दुकानों और फैक्ट्रियों के खुलने के चलते बेरोजगारी में कुछ कमी देखने को मिली है।

आर्थिक जानकारों के मुताबिक अभी ग्रामीण अर्थव्यवस्था ने गति नहीं पकड़ी है और उपभोग के स्तर में इजाफा होने में अभी समय लगेगा। इसके अलावा शहरी क्षेत्रों से गांवों में बड़े पैमाने पर पलायन होने के चलते दबाव भी बढ़ा है। इसलिए गांवों में बेरोजगारी की समस्या बढ़ गई है। फिर भी शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी के लेवल में गिरावट के चलते कुछ राहत मिलती दिख रही है। 24 मई को समाप्त सप्ताह में शहरी बेरोजगारी की दर 22.72% रही है, जो 17 मई को समाप्त सप्ताह के मुकाबले काफी कम है। तब बेरोजगारी की दर 26.95% थी। इस तरह से देखें तो शहरी क्षेत्र में बेरोजगारी की दर में करीब 4 फीसदी की कमी देखने को मिली है।

बीते एक महीने में शहरी क्षेत्र में बेरोजगारी की यह सबसे कम दर है। इसकी वजह सीमित मैनपावर के साथ फैक्ट्रियों में काम शुरू होना, दुकानों का चलना और मार्केट में भी कुछ हद तक गतिविधियां शुरू होना है। इसके अलावा शहरी क्षेत्र में बेरोजगारी का आंकड़ा कम होने की वजह रिवर्स पलायन भी है। गांवों से रोजगार की तलाश में आए लोगों को संकट में वापस लौट जाने के चलते भी शहरों में आंकड़ा घटा है और गांवों में इजाफा देखने को मिला है।

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