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बेरोजगारी दर ने तोड़ा मोदी राज के ढाई साल का रिकॉर्ड, नौकरी मांगने वालों में कमी के बाद यह हाल

आम चुनाव से पहले बेरोजगारी दर में ऐसी वृद्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए चिंता का सबब बन सकती है। नोटबंदी और जीएसटी के चलते 2018 में 110 लाख लोगों की नौकरियां चली गईं, यह आंकड़ा CMIE ने जनवरी 2019 में जारी किया था।

unemployment rate, unemployment rate india, unemployment rate 2019 india, jobless rate india, jobs rate india, employment rate india, job growth rate india, unemployment data indiaएक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की बेरोजगारी दर 2017-18 में 45 वर्ष के उच्‍चतम स्‍तर पर पहुंच गई थी। (Photo : PTI)

भारत की बेरोजगारी दर फरवरी 2019 में बढ़कर 7.2 प्रतिशत तक पहुंच गई। भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था निगरानी केंद्र (CMIE) के डेटा के अनुसार, यह सितंबर 2016 के बाद की उच्‍चतम दर है, फरवरी 2018 में बेरोजगारी दर 5.9 प्रतिशत रही थी। रॉयटर्स से बातचीत में मुंबई के एक थिंक-टैंक के प्रमुख महेश व्‍यास ने कहा कि रोजगार चाहने वालों की संख्‍या में गिरावट के बावजूद बेरोजगारी दर बढ़ी है। उन्‍होंने इसके लिए श्रम बल भागीदारी दर में अनुमानित गिरावट का हवाला दिया। व्‍यास ने कहा कि फरवरी 2019 में देश के 4 करोड़ लोगों के पास रोजगार होने का अनुमान है, जबकि साल भार पहले यही आंकड़ा 4.06 करोड़ था।

CMIE के आंकड़े देशभर के लाखों घरों के सर्वे पर आधारित हैं। इस संस्‍था के आंकड़ों को सरकार द्वारा जारी बेरोजगारी के आंकड़े से ज्‍यादा भरोसेमंद माना जाता है। मई में संभावित आम चुनाव से पहले बेरोजगारी दर में ऐसी वृद्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए चिंता का सबब बन सकती है।

फसलों की कम कीमत और रोजगार कमी का मुद्दा चुनावों में जोर-शोर से उठता है। मोदी सरकार ने पिछली बार जब आधिकारिक डेटा जारी किया था तो उसे आउट-ऑफ-डेट बताया गया था। हाल ही में सरकार ने रोजगार से जुड़ा एक डेटा रोक लिया था, अधिकारियों ने कहा कि उन्‍हें जांचना है कि वह डेटा सही है या नहीं।

दिसंबर में जारी होने से रोके गए आंकड़ों को एक समाचार पत्र ने कुछ सप्‍ताह पहले प्रकाशित किया था। तब यह बात सामने आई थी कि भारत की बेरोजगारी दर 2017-18 में कम से कम 45 साल के उच्‍चतम स्‍तर पर पहुंच गई थी।

जनवरी में जारी CMIE की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि नवंबर 2016 में नोटबंदी और 2017 में माल एवं सेवा कर (GST) लागू होने के बाद से 2018 में 1.1 करोड़ लोगों ने नौकरियां गंवाई। सरकार ने फरवरी में संसद को बताया था कि उसके पास यह डेटा नहीं है कि नोटबंदी से लघु क्षेत्र में रोजगार पर कितना असर पड़ा।

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