असंगठित मजदूरों के लिए बेरोजगारी बीमा लागू करने के पक्ष में संसदीय समिति, समझें- कैसे मिलेगा फायदा

समिति के एक सदस्य ने कहा कि यदि इस तरह की इंश्योरेंस स्कीम मौजूद होती तो कोरोना काल में जिस तरह से श्रमिकों को समस्या का सामना करना पड़ा है और मार्केट में हलचल पैदा हुई है, यह स्थिति न होती।

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प्रतीकात्मक तस्वीर।

सोशल सिक्योरिटी कोड को लेकर विचार कर रही संसदीय समिति असंगठित मजदूरों के लिए बेरोजगारी बीमा लागू करने के पक्ष में है। समिति की ओर से जल्दी ही इस संबंध में सरकार को सुझाव दिए जा सकते हैं। समिति के मुताबिक असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए बेरोजगारी बीमा की सुविधा होनी चाहिए। समिति का कहना है कि सरकार को एक फंड तैयार करना चाहिए, जिसमें बीमाधारक भी हर महीने कुछ योगदान करेंगे और सरकार की ओर से भी इसकी फंडिंग की जाएगी। इस फंड के जरिए ऐसे लोगों को मदद मिलेगी, जिन्हें स्किल हासिल करने के बावजूद एक तय समय के बाद भी नौकरी नहीं मिल सकी है। इसके अलावा ऐसे लोगों को भी इससे राहत दी जाएगी, जिन्हें किसी कारण से अपनी नौकरी गंवानी पड़ी है।

समिति के एक सीनियर सदस्य ने कहा कि बेरोजगारी बीमा जैसा कोई प्रावधान न होना एक बड़ी कमी है। इसे सोशल सिक्योरिटी कोड में शामिल किया जाना चाहिए। दूसरे श्रम आयोग ने भी असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को लेकर इस तरह का प्रस्ताव रखा था। इसमें निर्माण कार्य में लगे मजदूरों और स्वरोजगार प्राप्त वर्कर्स को भी शामिल करने की बात थी। समिति के एक सदस्य ने कहा कि यदि इस तरह की इंश्योरेंस स्कीम मौजूद होती तो कोरोना काल में जिस तरह से श्रमिकों को समस्या का सामना करना पड़ा है और मार्केट में हलचल पैदा हुई है, यह स्थिति न होती।

यही नहीं श्रमिकों पर बनी संसदीय समिति की ओर से सरकार को एंप्लॉयीज प्रोविडेंट फंड और ईएसआईसी की सुविधा के तहत 30 लाख प्रवासी मजदूरों को भी कवर करने का सुझाव दिया जा सकता है। बता दें कि श्रम मंत्रालय ने 11 दिसंबर, 2019 को सोशल सिक्योरिटी कोड पेश किया था, जिसे 24 दिसंबर को संसद की स्टैंड कमिटी के समक्ष भेजा गया था। अब गुरुवार को संसदीय समिति की मीटिंग है, जिसमें इस कोड के ड्राफ्ट को मंजूरी देने पर बात की जाएगी। इस सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत श्रम मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया था कि सरकार को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार सभी मजदूरों तक करना चाहिए। लेकिन उसने लोकसभा में जो बिल पेश किया था, उसमें नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड के गठन का प्रस्ताव था।

यह बोर्ड केंद्र सरकार को अलग-अलग असंगठित क्षेत्रों के मजदूरों को लेकर योजनाएं लागू करने की सिफारिश करेगा। गौरतलब है कि मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में ही 44 सेंट्रल लेबर ऐक्ट्स का विलय कर उन्हें 4 कोड्स में तब्दील करने का ऐलान किया था। हालांकि संसद की ओर से सिर्फ एक कोड को ही मंजूरी मिल पाई थी, जिसमें मजदूरों के वेतन को लेकर बात की गई थी। हालांकि अब भी यह लागू नहीं हो सका है क्योंकि इसके नियमों को लेकर कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है।

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