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जन-धन योजना के तहत खाते खोलने का लक्ष्य बढ़ा कर 10 करोड़ किया

शुरुआती प्रगति से उत्साहित केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत आगामी 26 जनवरी तक खाते खोलने का लक्ष्य 7.5 करोड़ से बढ़ा कर 10 करोड़ कर दिया है। एक सरकारी बयान में कहा गया है कि यह देश के हर परिवार में कम से कम एक खाता खोलने जैसा होगा। ताजा आंकड़ों के […]

केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत आगामी 26 जनवरी तक खाते खोलने का लक्ष्य 7.5 करोड़ से बढ़ा कर 10 करोड़ कर दिया है।

शुरुआती प्रगति से उत्साहित केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत आगामी 26 जनवरी तक खाते खोलने का लक्ष्य 7.5 करोड़ से बढ़ा कर 10 करोड़ कर दिया है। एक सरकारी बयान में कहा गया है कि यह देश के हर परिवार में कम से कम एक खाता खोलने जैसा होगा। ताजा आंकड़ों के अनुसार इस प्रमुख वित्तीय समावेश योजना के तहत करीब आठ करोड़ खाते खोले जा चुके हैं।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को हुई समीक्षा बैठक अधिकारियों को कहा कि आधार कार्ड नंबर को बैंक खातों से जोड़ा जाए क्योंकि इससे प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना के तहत समाज के सुनिश्चित वर्ग के लोगों के बैंक खातों में सीधे सब्सिडी पहुंचाने में आसानी होगी। बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत 18 नवंबर तक 7.64 करोड़ बैंक खाते खोले जा चुके हैं जिनमें से सरकारी बैंकों ने 6.15 करोड़ खाते खोले हैं जबकि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने 1.28 करोड़ खाते और निजी बैंकों ने 20 लाख खाते खोले हैं।

जेटली ने प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत निजी क्षेत्र के बैंकों से और ज्यादा सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। जमा के तौर पर इस योजना के तहत 18 नवंबर तक 6015 करोड़ रुपए का संग्रह हुआ था। हालांकि 30 सितंबर के बाद इसकी वृद्धि में कमी आई। 18 नवंबर तक खोले गए 7.64 करोड़ खातों में से 5.74 करोड़ खातों में अधिशेष राशि शून्य है।

वित्त मंत्री जेटली ने बैंकों से कहा कि वित्तीय साक्षरता कार्यक्रमों के जरिए शून्य बकाया खातों में जमा का स्तर बढ़ने की कोशिश की जाए। उन्होंने इन खातों से लेन-देन बढ़ाने के लिए विभिन्न केंद्रीय और राज्य योजनाओं में लाभ के अंतरण को इन खातों के माध्यम से किए जाने की जरूरत बताई।

बैंकों को कहा गया कि वे खाताधारकों को रूपे कार्ड जारी करने और उन्हें सक्रिय करने का कार्य सुनिश्चित करें। वित्त मंत्री ने इस जन-धन खाता योजना को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ समन्वित करने की संभावना भी जताई। इसमें स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) और मनरेगा योजना को भी जोड़ा जा सकता है। मध्य प्रदेश जन-धन योजना के तहत 90 फीसद लक्ष्य हासिल कर चुका है और जल्दी ही 100 फीसद लक्ष्य पूरा कर सकता है।

 

 

 

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