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खाना बनाने के लिए LPG इस्तेमाल नहीं कर रहे 43% लाभार्थी, उज्ज्वला योजना की सफलता पर सवाल

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के 43% लाभार्थी खाना पकाने के लिए एलपीजी का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। सर्वे में पता चला है कि जैसे ही लोगों की आर्थिक स्थिति में नीचे की ओर चलते हैं, वैसे ही एलपीजी का उपयोग न करने वाले लाभार्थियों की संख्या भी बढ़ती जाती है।

Edited By यतेंद्र पूनिया नई दिल्ली | Updated: August 25, 2020 10:47 AM
उज्ज्वला योजना के 43 पर्सेंट लाभार्थी इस्तेमाल नहीं कर रहे गैस सिलेंडर

अकसर अपात्रों को योजना का लाभ मिलने या फिर क्रियान्वयन में समस्या के चलते भारत में कल्याणकारी योजनाओं का मकसद पूरा नहीं हो पाता है। गरीब महिलाओं को एलपीजी सिलेंडर की सुविधा देने के लिए शुरू की गई उज्ज्वला योजना के साथ ऐसा नहीं है, लेकिन इसके बाद भी मकसद पूरा होता नहीं दिख रहा है। दरअसल इसका लाभ अपात्रों को तो नहीं मिला है, लेकिन इस स्कीम के तहत सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को कुकिंग के लिए गैस पर शिफ्ट करने का लक्ष्य तय किया था, जो पूरा होता नहीं दिख रहा। हिंदुस्तान टाइम्स की ओर से किए गए राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के 2018 के सर्वे के विश्लेषण के मुताबिक इस स्कीम में लीकेज न्यूनतम रहा है और अपात्रों को लाभ नहीं मिल सका है।

इस योजना का वास्तविक उद्देश्य परिवारों को LPG से खाना पकाने की ओर शिफ्ट करना था, जो चूल्हे के मुकाबले बहुत कम प्रदूषण करती है। इस स्कीम ने जरूरतमंद लोगों तक पहुंचने में कामयाबी पाई, लेकिन बड़ी संख्या में गरीब लोग दोबारा एलपीजी सिलेंडर नहीं भरवा सके। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का यह अनुभव कल्याणकारी योजनाओं की नई चुनौतियों के बारे में बताता है। इस योजना के तहत सरकार ने 8 करोड़ से ज्यादा गरीब महिलाओं को गैस कनेक्शन दिए थे। इन मुफ्त कनेक्शन के जरिए सरकार एलपीजी पर कुकिंग को शिफ्ट करना चाहती थी, लेकिन अब भी 43 पर्सेंट महिलाएं ऐसी हैं, जो एक बार सिलेंडर के इस्तेमाल के बाद वापस चूल्हे पर लौट आई हैं।

पेट्रोलियम मिनिस्ट्री के डाटा के अनुसार 1 अप्रैल 2020 तक भारत में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 8.2 करो़ड़ से ज्यादा कनेक्शन दिए गए‌। डाटा से पता चलता है कि पिछले 4 वर्षों में दिए गए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना कनेक्शन ने ग्रामीण भारत के कुल एलपीजी कनेक्शन में 71% की बढ़ोतरी की। हालांकि इस सफलता ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के मूल उद्देश्य को पूरा करने में मदद नहीं की। एनएसओ के सर्वे से पता चलता है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के 43% लाभार्थी खाना पकाने के लिए एलपीजी का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। सर्वे में पता चला है कि जैसे ही लोगों की आर्थिक स्थिति में नीचे की ओर चलते हैं, वैसे ही एलपीजी का उपयोग न करने वाले लाभार्थियों की संख्या भी बढ़ती जाती है।

गरीबों के महीने के खर्च के आधे के बराबर है सिलेंडर: एक तथ्य यह भी है प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 70% लाभार्थियों में भारत के नीचे के 40% लोग है। जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह स्कीम गरीब लोगों तक पहुंचने में कामयाब रही। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना पर CAG की 2019 की ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल 2016 से दिसंबर 2018 तक भारत के 4 बड़े महानगरों में 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत बाजार में 500 रूपए से लेकर 837 रूपए रही। 2018 का NSO सर्वे कहता है कि भारत के 20% गरीब लोगों का महीने का औसतन प्रति व्यक्ति खर्च 1065 रुपए है। इसका मतलब है 500 रुपए का सिलेंडर उसके घर के आधे खर्च के बराबर है।

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