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जल्‍द ही म‍िल सकती है आधार नंबर सरेंडर करने की सुव‍िधा, सरकारी र‍िकॉर्ड से ड‍िलीट हो जाएगी आपकी जानकारी

12 मार्च, 2018 तक 37.50 करोड़ से ज्यादा पैन कार्ड जारी किए गए हैं। इनमें से लोगों को जारी किए गए पैन कार्ड की संख्या 36.54 करोड़ से ज्यादा थी, जिनमें से 16.84 करोड़ पैन कार्ड आधार से लिंक हो चुके हैं।

एक संवैधानिक बैंच ने आधार अधिनियम की धारा 57 को खत्म कर दिया था।

केंद्र सरकार आधार अधिनियम में एक संशोधन को फाइनल करने के आखिरी चरण में है। इसके तहत सभी आधार धारकों को अपना आधार सरेंडर करने का विकल्प मिल जाएगा। आधार सरेंडर करने की स्थिति में आधार धारक के बॉयोमीट्रिक्स और डेटा समेत आधार नंबर डिलीट कर दिया जाएगा। यह सितंबर में आधार को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन है, हालांकि कुछ मामलों में आधार की वैधता को बरकरार रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने आधार अधिनियम की धारा 57 को खत्म कर दिया था जो निजी संस्थाओं को सत्यापन के लिए आधार नंबर का उपयोग करने की अनुमति देता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि बैंक खाता खोलने और मोबाइल के लिए सिम कार्ड लेने के लिए इसे जरूरी नहीं किया जाए।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि, “प्रारंभिक प्रस्ताव यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) द्वारा तैयार किया गया। इसमें कहा गया है कि एक बार जब बच्चा 18 साल का हो जाएगा, तो उसे यह तय करने के लिए छह महीने का वक्त दिया जाएगा कि वह आधार नंबर सरेंडर करना चाहता है। यह प्रस्ताव कानून मंत्रालय को पुनरीक्षण के लिए भेजा गया था। अधिकारी ने कहा, “मंत्रालय ने आगे सिफारिश की कि सभी नागरिकों को आधार वापस लेने का विकल्प उपलब्ध कराया जाए, और इसे किसी विशेष समूह तक ही सीमित न रखा जाए।” हालांकि, इस इस प्रस्ताव को मंत्रिमंडल को भेजा जाएगा, इससे सिर्फ उन लोगों को फायदा मिलने की संभावना है जिनके पास पैन कार्ड नहीं है या जिसको इसकी जरूरत नहीं है, क्योंकि अदालत ने आधार के साथ पैन के लिंकिंग को बरकरार रखा था।

12 मार्च, 2018 तक 37.50 करोड़ से ज्यादा पैन कार्ड जारी किए गए हैं। इनमें से, लोगों को जारी किए गए पैन कार्ड की संख्या 36.54 करोड़ से ज्यादा थी, जिनमें से 16.84 करोड़ पैन कार्ड आधार से लिंक हो चुके हैं। अदालत के आदेश के मुताबिक, प्रस्ताव यह तय करने के लिए एक निर्वाचन अधिकारी नियुक्त करना चाहता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में किसी व्यक्ति के आधार से संबंधित डेटा का खुलासा किया जाए या नहीं। अदालत ने धारा 33 (2) को भी खत्म कर दिया था, जिसने संयुक्त सचिव या उससे ऊपर के अधिकारी के आदेश पर राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों के लिए आधार जानकारी का खुलासा करने की अनुमति दी थी। उसमें कहा था कि संयुक्त सचिव के ऊपर के अधिकारी को न्यायिक अधिकारी से परामर्श लेनी चाहिए और एक फैसला लेना चाहिए।

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