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चीन को जवाब देने के लिए कारोबारियों ने भी खोला मोर्चा, 500 चीनी उत्पादों के बहिष्कार की अपील

कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने ऐसे 500 प्रोडक्ट्स की लिस्ट तैयार की है, जिनका चीन को जवाब देने के लिए बहिष्कार किया जाना है। संगठन ने देश के मूवी स्टार्स से भी अपील की है कि वे चीन के सामान का प्रचार न करें।

china productsसीमा पर तनाव के बाद भारत में चीन को लेकर लगातार बढ़ रही नफरत।

लद्दाख में चीन से लगती भारत की सीमा पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प का जवाब देने के लिए कारोबारियों ने मोर्चा खोला है। कारोबारी संगठन कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने ऐसे 500 प्रोडक्ट्स की लिस्ट तैयार की है, जिनका चीन को जवाब देने के लिए बहिष्कार किया जाना है। कारोबारी संगठन ने जिन 500 चीनी उत्पादों की सूची तैयार की है, उनमें एफएमसीजी प्रोडक्ट्स, कन्जयूमर ड्यूरेबल्स, खिलौने, टेक्सटाइल, फर्निशिंग फैब्रिक्स, फुटवियर, किचन आइटम्स आदि शामिल हैं। CAIT के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि चीनी सामानों के बहिष्कार को लेकर हमारा उद्देश्य आयात में कमी करना है। उन्होंने कहा कि कारोबारियों ने चीन से आयात में दिसंबर, 2021 तक 1 लाख करोड़ रुपये की कमी करने का लक्ष्य तय किया है।

यह नहीं पवन खंडेलवाल ने कहा कि इस मसले को हमने सरकार के समक्ष भी उठाया है। एक वेबसाइट से बात करते हुए खंडेलवाल ने कहा कि हमने सरकार से मांग की है कि दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल ट्रांसपोर्ट सिस्टम के प्रोजेक्ट को कैंसल किया जाए। यह प्रोजेक्ट चीन के साथ मिलकर तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट में चीनी कंपनी की बजाय भारत की कंपनी को ट़ेंडर दिया जाना चाहिए। इसके अलावा देश के कई बड़े स्टार्टअप्स में चीनी निवेश के मसले को भी कारोबारी संगठन ने सरकार के समक्ष उठाया है। हाल ही में पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने एचडीएफसी में बड़ा निवेश किया है। इस पर भी कारोबारी संगठन ने सवाल उठाया है।

देश के 7 करोड़ कारोबारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ने देश के मूवी स्टार्स से भी अपील की है कि वे चीन के सामान का प्रचार न करें। उन्होंने कहा कि मैं सीमा पर नहीं जा सकता हूं, लेकिन देश और सेना को सपोर्ट करने के लिए चीन के सामान का बहिष्कार जरूर कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमने जिन सामानों के बहिष्कार की बात की है, उनको तैयार करने में किसी स्पेशल तकनीक की जरूरत नहीं है। चीनी उत्पादों के इस्तेमाल को रोकते हुए हम इन्हें भारत में ही बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चर कर सकते हैं। इससे चीन पर निर्भरता खत्म हो जाएगी।

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