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‘मोदी राज’ में पहली बार इतना महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, सरकारों ने दो साल में ही कमाए 15 लाख करोड़

इससे पहले 29 मई, 2018 को मुंबई में डीजल की कीमतें सर्वोच्च स्तर पर पहुंची थी लेकिन आज की बढ़ोत्तरी ने उस रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान। (एक्सप्रेस फोटो)

तेल कंपनियों ने आज (मंगलवार, 28 अगस्त) तीसरे दिन भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढो़त्तरी की है। इस बढ़ोत्तरी की वजह से डीजल के दाम देश के चार प्रमुख शहरों में नई ऊंचाई पर पहुंच गए। दिल्ली में डीजल का दाम मंगलवार (28 अगस्त) को 69.61 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है जो सर्वोच्च है जबकि पेट्रोल की कीमत 78.05 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई। देश की आर्थिक नगरी मुंबई में डीजल की कीमत 73.90 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल की कीमत 85.47 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई। इससे पहले 29 मई, 2018 को मुंबई में डीजल की कीमतें सर्वोच्च स्तर पर पहुंची थी लेकिन आज की बढ़ोत्तरी ने उस रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है।

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी में डीजल की कीमत 69.61 रुपये प्रति लीटर हो गई है जबकि सोमवार को यह 69.46 रुपये प्रति लीटर और रविवार को 69.32 रुपये प्रति लीटर था। कोलकाता में डीजल के दाम 72.46 रुपये प्रति लीटर जबकि चेन्नई में 73.54 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। कोलकाता में पेट्रोल की कीमत 80.98 रुपये और चेन्नई में 81.09 रुपये प्रति लीटर हो गई है। दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल अपने सर्वोच्च स्तर पर 29 मई को था, जब यह इन शहरों में क्रमश: 78.43 रुपये, 81.06 रुपये, 86.24 रुपये और 81.43 रुपये प्रति लीटर पर बिका था।

तेल की लगातार बढ़ती कीमतों से सरकार का खजाना भर रहा है। एबीपी के मुताबिक 2015-16 से 2017-18 के बीच सरकार के खजाने में तेल की बिक्री से करीब 14.88 लाख करोड़ रुपये पहुंचे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि साल 2015-16 में तेल की बिक्री से केंद्र सरकार के खजाने में 2.53 लाख करोड़ रुपये जाते थे और राज्य सरकारों के खजाने में 1.60 लाख करोड़ रुपये जाते थे जो बढ़कर 2017-18 में केंद्र के खजाने में 3.43 लाख करोड़ और राज्य सरकार के खातों में 2.09 लाख करोड़ रुपये हो गए। साल 2016-17 में केंद्र सरकार को 3.34 लाख करोड़ और राज्य सरकारों को 1.89 लाख करोड़ रुपये की कमाई पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री से हुई है। यानी दो सालों में सरकारों के खजाने में करीब 15 लाख करोड़ रुपये पहुंचे हैं, जबकि आम आदमी तेल की बढ़ती कीमतों से परेशान है।

बता दें कि केंद्र की सत्ता में आने से पहले बीजेपी और खुद नरेंद्र मोदी भी तेल की बढ़ती कीमतों पर यूपीए सरकार और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को घेरते थे लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें कम रहने के बावजूद देश में लगातार तेल की कीमतों में इजाफा होता रहा है।

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