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हेल्थ इंश्योरेंस प्लान खरीदते समय देखने वाली 5 बातें

मान लीजिए बीमा राशि (sum insured) 9 लाख रुपए है और अस्पताल का खर्च केवल 1.8 लाख रुपए है। ऐसी स्थिति में मेडिक्लेम प्लांस में अस्पताल का खर्च 1.8 लाख रुपए बीमा कंपनी भुगतान कर देगी, लेकिन यदि आपने क्रिटिकल बीमारी प्लांस ली है तो बीमा कंपनी पूरा 9 लाख रुपए आपको चुकाएगी।

Author नई दिल्ली | Updated: December 1, 2020 1:21 PM
health insurance buying tips, health insurance purchasing tipsतस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल फोटो)

कोविड-19 महामारी के प्रकोप के बाद स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी की जरूरतें काफी बढ़ गई हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इसके इलाज में लाखों रुपए खर्च आ रहे हैं, जिसे दे पाना सबके वश की बात नहीं है। इसकी वजह से लोग स्वास्थ्य बीमा योजनाओं को खरीदने के लिए प्रेरित हुए हैं। जिन लोगों के पास पहले से कोई पॉलिसी है, उन्होंने उसकी कवरेज को और बढ़वा ली है। कोरोना वायरस के लिए स्वास्थ्य बीमा योजनाओं की शुरुआत के साथ ही खरीदारों के पास चुनने के लिए नए विकल्प भी हैं।

जब दुनिया को महामारी का सामना करना पड़ रहा है तो अवसरों को छोड़ना अच्छा कदम नहीं है। स्वयं और परिवार के सदस्यों के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा कवरेज होने से किसी को मौजूदा आपातकालीन बचत और निवेशों को बचाए रखने में मदद मिलती है। साथ ही उसकी आर्थिक सुरक्षा भी बनी रहती है।

यदि आप एक नया हेल्थ कवर खरीदना चाहते हैं या अपनी पॉलिसी का दायरा बढ़ाना चाहते हैं, तो कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें। इससे आपको अपनी जरूरत के मुताबिक सही पॉलिसी खरीदने में मदद मिलेगी।

1. आप किस तरह का प्लान खरीद रहे हैं, इसकी जानकारी जरूर लें: यदि आप पहली बार पॉलिसी ले रहे हैं, तो आपको यह जानना जरूरी है कि बाजार में कई प्रकार की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी उपलब्ध हैं। वे सभी अलग-अलग तरह से काम करती हैं। उनमें से कुछ क्षतिपूर्ति योजना (indemnity plans) वाली हैं, जबकि दूसरी लाभ-आधारित पॉलिसी (benefit-based plans) हैं। क्षतिपूर्ति योजना वाली पॉलिसी अस्पताल के बिलों के खर्च को चुकाती हैं, जबकि लाभ-आधारित पॉलिसी में बीमा कंपनी अस्पताल के वास्तविक खर्च के बजाए एकमुश्त धनराशि (Lump-Sum Amount) का भुगतान करती हैं। व्यक्तिगत स्वास्थ्य प्लांस या फैमिली फ्लोटर प्लांस क्षतिपूर्ति प्लांस हैं। इसे मेडिक्लेम के नाम से भी जाना जाता है। जबकि एक क्रिटिकल बीमारी प्लान लाभ-आधारित योजनाओं की श्रेणी में आता है।

उदाहरण के लिए मान लीजिए बीमा राशि (sum insured) 9 लाख रुपए है और अस्पताल का खर्च केवल 1.8 लाख रुपए है। ऐसी स्थिति में मेडिक्लेम प्लांस में अस्पताल का खर्च 1.8 लाख रुपए बीमा कंपनी भुगतान कर देगी, लेकिन यदि आपने क्रिटिकल बीमारी प्लांस ली है तो बीमा कंपनी पूरा 9 लाख रुपए आपको चुकाएगी। शर्त यह है कि आपको अस्पताल में भर्ती व्यक्ति को प्लान के तहत निर्धारित बीमारी (specified diseases) हो। याद रखें कि व्यक्तिगत स्वास्थ्य प्लांस और क्रिटिकल बीमारी प्लांस एक-दूसरे की पूरक (complementary) नहीं है।

2. ये भी पता कर लें: क्या आपकी पॉलिसी में कोई उप सीमाएं (Sub Limits)हैं। मेडिक्लेम योजनाओं की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक उप सीमाएं (Sub Limits)हैं। यदि प्लान में उप-सीमाएं हैं, तो आपको अस्पताल के बिल का एक हिस्सा अपनी जेब से चुकाना पड़ सकता है। यह इसलिए है कि इन योजनाओं (Plans)में डॉक्टर शुल्क, नर्सिंग शुल्क, आईसीयू शुल्क आदि कमरे के किराए से जुड़े होते हैं। आमतौर पर कमरे का किराया योजना (Plan) की कुल बीमा राशि का एक प्रतिशत होता है और इसी तरह अस्पताल के कुछ अन्य खर्च भी होते हैं। अब यदि आप (policyholder) अधिक किराए वाला कमरा लेते हैं, तो अस्पताल के अन्य सभी खर्च बीमा कंपनी चुकाने से पहले आनुपातिक रूप से कम कर देती है। इसलिए या तो सीमा के अंदर किराए वाला कमरा लीजिए या फिर उस योजना (Plan)को चुनिए, जिसमें इस तरह की सीमा का कोई बंधन नहीं हो।

3. पहले से मौजूद बीमारियों की सही जानकारी दें: स्वास्थ्य बीमा सभी अप्रत्याशित बीमारी मजबूरियों को कवर करने के लिए है। इसलिए बीमाकर्ता कंपनी पॉलिसी खरीदने के पहले दिन से ही बीमारियों का कवरेज नहीं देते हैं। यानी पहले से जो बीमारी है, वह कवर नहीं होती हैं। जिन बीमारियों से आप पहले से ही पीड़ित हैं, उसे पहले से मौजूद बीमारियों के रूप में जाना जाता है और एक निश्चित प्रतीक्षा अवधि के बाद ही कवर किया जाता है। वर्तमान स्वास्थ्य बीमा नियमों के अनुसार बीमाकर्ताओं को 48 महीने की प्रतीक्षा अवधि के बाद पहले से मौजूद बीमारियों को कवर करने की जरूरत होती है। कुछ बीमाकर्ता कंपनी अपनी कुछ योजनाओं में कम प्रतीक्षा अवधि 24 या 36 महीने की अनुमति देते हैं।

बहरहाल यह कवरेज इस शर्त के अधीन है कि आपने अपनी पुरानी या पहले से चल रही बीमारियों की पूरी जानकारी दे दी है और स्वास्थ्य बीमा योजना (Health Insurance Plan) लेते समय मौजूदा बीमारियों के बारे में कोई भी जरूरी जानकारी नहीं छिपाई है। अगर आपने कोई जानकारी छिपा ली है या नहीं बताई है तो बीमा कंपनी आपके दावे को निरस्त कर सकती है। इसलिए आवेदन पत्र पर हस्ताक्षर करते समय चिकित्सा इतिहास की ईमानदारी पूर्वक पूरी जानकारी दें।

4. यह भी लगाएं पताः जान लें कि कोई सह भुगतान (Co-Payments) भी है। कई बार कुछ ऐसी स्वास्थ्य बीमा योजनाएं (Health Insurance Plans) होती हैं, जो विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए होती हैं, जिनमें सह-भुगतान(Co-Payments) की सुविधा होती है। इसका सीधा सा मतलब है कि अस्पताल के बिल का कुछ हिस्सा आपको स्वयं देना होगा। बाकी धनराशि बीमाकर्ता कंपनी देगी। आमतौर पर सह-भुगतान बिल धनराशि का लगभग 20 प्रतिशत होता है। आप इससे भी उच्च सीमा का विकल्प चुन सकते हैं। ज्यादातर मामलों में सह-भुगतान की उच्च सीमा का विकल्प प्रीमियम पर बचत करने में मदद करता है।

5. जरूरत के मुताबिक कवरेज की धनराशि तय करें: स्वास्थ्य बीमा कवर करने का कोई निश्चित नियम या कैलकुलेटर नहीं है। आप अपना निर्णय अपने निवास स्थान और उसके आसपास के अस्पतालों के आधार पर तय करिए। अच्छा यह होगा कि आप उच्च बीमा राशि तय करिए, क्योंकि मेडिकल खर्चे लगातार बढ़ रहे हैं और बीमारियां भी अप्रत्याशित रूप से आती हैं। कवरेज में आपके परिवार के सभी सदस्यों को शामिल करना महत्वपूर्ण है। यदि आप अपने नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई स्वास्थ्य बीमा योजना पर निर्भर हैं तो एक अलग से भी कवरेज जरूर करा लें।

इस तरह सभी जानकारियों को ध्यान में रखकर स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी लें और आवेदन पत्र पर हस्ताक्षर करने से पहले उसके सभी प्वाइंट्स को अच्छी तरह पढ़ लें।

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