पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पेट्रोल-डीजल कीमतों में बढ़ोतरी की खबरों को पूरी तरह खारिज किया है। मंत्रालय ने कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है और ये खबरें भ्रामक हैं। सरकार के मुताबिक, भारत में पिछले चार वर्षों से पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े हैं और उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय कीमतों से बचाया गया है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बढ़ोतरी की खबरों का किया खंडन

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ट्वीट कर लिखा, “पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की खबरें आ रही हैं। यह स्पष्ट किया जाता है कि सरकार के समक्ष ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। ऐसी खबरें नागरिकों में भय और दहशत फैलाने के उद्देश्य से फैलाई जा रही हैं और ये दुर्भावनापूर्ण एवं भ्रामक हैं। वास्तव में, भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां पिछले चार वर्षों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं हुई है। भारत सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने भारतीय नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों में होने वाली तीव्र वृद्धि से बचाने के लिए निरंतर कदम उठाए हैं।”

क्या है मामला?

CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने कहा कि क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद भारत में अब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव नहीं हुआ है। इससे रिफाइनरों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है, जिसका अनुमानित अतिरिक्त प्रभाव करीब 270 अरब रुपये प्रति माह है। हालांकि सरकार ने उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है और निर्यात पर ‘विंडफॉल टैक्स’ को फिर से लागू किया है। लेकिन ये उपाय केवल आंशिक राहत ही दे पाते हैं।

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत में चल रहे विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है, कच्चे तेल की उच्च कीमतों के कारण रिफाइनरों पर दबाव पड़ने से संभावित रूप से ₹25-28 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, इस रिपोर्ट के बाद अब सरकार का स्पष्टीकरण आया है।

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