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अब तक नहीं आया है आपका इनकम टैक्‍स रिफंड? तो जान लीजिए, इन कारणों से होती है देरी

आयकर विभाग के पास हमेशा यह विकल्प होता है कि वह किसी भी रिटर्न की दोबारा स्क्रूटनी करा सकता है। स्क्रूटनी में अगर रिफंड गलत पाया जाता है तो विभाग ब्याज और भारी-भरकम दंड के साथ करदाता से रिफंड वापस ले सकता है।

आयकर विभाग, रिफंड, आईटी रिटर्न, स्टेट बैंक, अरुण जेटली, वित्त मंत्री, ऑनलाइन रिटर्न, इनकम टैक्सअगर कोई व्यक्ति समय पर यानी जुलाई तक रिटर्न भर देता है तो उसे जल्द से जल्द रिफंड मिल जाता है

अगर पिछले साल का इनकम टैक्स रिफंड आपको अभी तक नहीं मिल सका है तो जान लीजिए उसकी वजह। हो सकता है कि आपको अभी और इंतजार करना पड़े क्योंकि टैक्स रिफंड मामले में इनकम टैक्स डिपार्टमेन्ट उलझनों में पड़ा हुआ है। दरअसल, इस साल इनकम टैक्स डिपार्टमेन्ट ने 30 मार्च को अचानक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से गलत रिफंड की वापसी के नाम पर 10 हजार करोड़ रुपये उसी दिन देने को कहा। जब बैंक ने ऐसा करने में अपनी लाचारी जताई तो आईटी डिपार्टमेन्ट के अधिकारी बिफर पड़े। बाद में जब मामला मीडिया में आया तो वित्त मंत्री अरुण जेटली को हस्तक्षेप करना पड़ा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इनकम टैक्स डिपार्टमेन्ट के अधिकारियों को गलत तरीके से धन उगाही करने के लिए चेतावनी दी और कहा कि अगर फिर ऐसा हुआ तो उन्हें परिणाम भुगतना पड़ सकता है। हालांकि, बैंक ने अगले महीने इनकम टैक्स डिपार्टमेन्ट को उतनी रकम वापस कर दी।

टैक्स जानकारों के मुताबिक, स्टेट बैंक से 100 बिलियन रुपये मांगना कहीं से भी आश्चर्यजनक कार्रवाई नहीं थी क्योंकि डिपार्टमेन्ट आम करदाताओं से भी ऐसा करता रहा है। वित्त वर्ष के आखिरी समय में कर दाताओं से जानबूझकर ज्यादा कर ले लेता है और फिर अगले ही महीने यानी नए वित्त वर्ष में उसे खुद वापस कर देता है। जानकारों के मुताबिक यह प्रक्रिया सालों भर जारी रहती है और बाद में अधिक कर वसूली की स्थिति में उसे कर दाताओं को वापस कर दिया जाता है। नियमानुसार, कोई भी रिफंड तभी जारी होता है जब रिटर्न दाखिल हो जाता है और उसकी स्क्रूटनी हो जाती है कि हां करदाता ने सही-सही रिटर्न दाखिल किया है। इसलिए उसका इतना रिफंड बनता है। इसके साथ ही एक धारणा यह भी है कि करदाताओं के रिफंड का दावा सही है।

आयकर विभाग के पास हमेशा यह विकल्प होता है कि वह किसी भी रिटर्न की दोबारा स्क्रूटनी करा सकता है। स्क्रूटनी में अगर रिफंड गलत पाया जाता है तो विभाग ब्याज और भारी-भरकम दंड के साथ करदाता से रिफंड वापस ले सकता है। कई बार अधिकारी रिटर्न को मैन्युअली चेक करते हैं और रिफंड चेक से जारी करते हैं। एक अनुमान के मुताबिक जबसे अधिकांश रिटर्न ऑनलाइन फाइल होने लगे हैं तब से रिफंड प्रक्रिया में थोड़ा सुधार आया है। लोगों को रिफंड जल्दी और आसान तरीके से मिल रहा है। माना जाता है कि अगर कोई व्यक्ति समय पर यानी जुलाई तक रिटर्न भर देता है तो उसे जल्द से जल्द रिफंड मिल जाता है लेकिन यह बात सिर्फ छोटी राशि के रिफंड पर लागू होती है। बड़ी राशि वाला रिफंड अभी भी इनकम टैक्स अधिकारियों के रहमोकरम पर टिका हुआ है। हालांकि, तकनीकि बड़े और छोटे रिफंड में भेदभाव नहीं करती है। बाबजूद इसके डिपार्टमेन्ट ने सभी रिफंड लौटाने की अधिकतम समय सीमा 31 मार्च, 2018 तय की है। यानी बड़ी राशि के रिफंड की चाह रखनेवालों को थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।

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