नए उपक्रम में सबसे जरूरी नकदी प्रवाह

हर नए उपक्रम के लिए अपना पहला खर्च करने से पहले एक मूलभूत नकदी प्रवाह प्रबंधन व्यवस्था की जरूरत होती है।

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सांकेतिक फोटो।

एक सफल उपक्रम के लिए सबसे अहम चीज क्या है? अच्छा उत्पाद या सेवा? अच्छी मार्केटिंग? बेहतरीन तकनीकी श्रेष्ठता? यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति से यह सवाल पूछेंगे जो अपना उपक्रम शुरू करने की तैयारी कर रहा है, तो उसका जवाब अलग होगा और यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति से यह सवाल कर रहे हैं जो पहले से कोई उपक्रम चल रहा है तो उसका जवाब अलग होगा। जो व्यक्ति नया उपक्रम शुरू करने की योजना बना रहा है, उसका ध्यान अच्छा उत्पाद देने या मार्केटिंग दक्षता पर होगा, जबकि जो व्यक्ति पहले से उपक्रम चल रहा है, वह यह जानता है कि शुरुआती सालों में नकदी के प्रवाह के प्रबंधन से यह तय होता है कि उपक्रम चल पाएगा या नहीं चल पाएगा।

ज्यादातर नए उपक्रमों की सबसे प्रमुख समस्या नकदी कम होना और नकदी संग्रहण धीरे होना है। यह समस्या शुरुआती वर्षों में सबसे ज्यादा रहती है और यदि आपके उपक्रम का कुल लाभ (प्रति इकाई प्राप्त होने वाला राजस्व-प्रति इकाई परिवर्तनशील लागत) कम है तो आपके लिए उपक्रम को बचाने की चुनौती बहुत बड़ी हो जाती है। अक्सर कई अपक्रम अच्छे उत्पाद या सेवाओं तथा मार्केटिंग के बावजूद विफल हो जाते हैं, क्योकि जब तक उपक्रम नकदी आधार पर लाभ की स्थिति में नहीं आता, उनके लिए इसे बचाए रखना बहुत मुश्किल हो जाता है।

हर नए उपक्रम के लिए अपना पहला खर्च करने से पहले एक मूलभूत नकदी प्रवाह प्रबंधन व्यवस्था की जरूरत होती है। यह व्यवस्था किसी आधुनिक नकदी प्रवाह प्रबंधन सॉफ्टवेयर या आपके वित्तीय प्रबंधन को संभालने वाले किसी वित्तीय प्रबंधक से जुड़ी हुई नहीं है। इसका संबंध आपके और आपके व्यापार पर लागू होने वाले कुछ सामान्य नियमों का पालन करने से है। यहां हम आपको कुछ ऐसे नियम बता रहे हैं, जिनका पालन करना आपके लिए सहायक हो सकता है।

व्यापार और निजी खाता अलग-अलग रखिए। इससे ना सिर्फ आप व्यापार और खुद के लिए रखे गए पैसे के मामले में अनुशासित रह पाएंगे, बल्कि इससे एक संभावित ग्राहक को यह संकेत भी मिलता है कि आप इस व्यापार को पेशेवर ढंग से चला रहे हैं। इसके अलावा आप व्यापारिक खर्चों पर स्पष्ट नजर रख सकते हैं। इससे आपको वित्तीय वर्ष के अंत आपके कर चुकाते समय मदद मिलेगी।

अपनी बिक्री, नकदी संग्रहण और संभावित खर्चों के बारे में कम से कम एक साल का अनुमान लगा कर रखिए। पूर समय के लिए एक साप्ताहिक या 15 दिन का ‘कैश फ्लो स्टेटमेंट’ तैयार कीजिए। इससे आपको पता रहेगा कि आपकी नकदी की स्थिति किस समय सबसे ज्यादा तनावपूर्ण रह सकती है और आप इसके लिए समय रहते इंतजाम कर सकते हैं। यह प्रोजेक्शन करते समय संकटकालीन परिदृश्य को ध्यान में रखें ताकि कोई अचानक धक्का लगे तो आपके उपक्रम के लिए स्थितियां तनावपूर्ण ना बनें। जो व्यापार किसी खास समय या मौसम पर आधारित हैं, उनके लिए तो यह बहुत जरूरी है।

यह सुनिश्चित कीजिए कि आपके पास एक अच्छा वित्तीय स्रोत (बैंक ऋण या निवेशक) हो ताकि जब आपके पास नकदी की मांग सबसे ज्यादा हो, तो यह स्रोत काम आ सके। पहले कुछ सालों में ‘इक्विटी फाइनेसिंग’ पर ज्यादा निर्भर रहिए। इससे आप पर व्यक्तिगत दायित्व नहीं आएगा और आप निर्णय करते समय ज्यादा लचीली सोच के साथ फैसले कर सकेंगे।

अगले तीन माह की जरूरतों के लिए पर्याप्त ‘बैलेंस’ बचा कर रखिए और इस बात पर भी नजर रखिए कि आपका मौजूदा पैसा कितने दिन आपका व्यापार चला सकता है और आपको कितने दिन बाद नए पैसे की जरूरत पड़ेगी। जरूरत से दो-तीन महीने पहले ही नए पैसे की व्यवस्था करना शुरू कर दीजिए।

स्थाई खर्चों को जहां तक हो सके, कम कीजिए। स्थाई खर्चे को यथासंभव कम रखते हुए काम कीजिए। इस खर्च में वेतन का खर्च शामिल है। यदि आप अपने प्रमुख कर्मचारियों को वेतन के साथ स्टॉक का विकल्प देते हैं तो इससे आपका कीमती पैसा बचेगा।
अपने स्थाई खर्च कम करने और वित्तीय संसाधनों को सुरक्षित रखने के लिए इक्विटी को इस्तेमाल करने के बारे में ज्यादा चिंता मत कीजिए। याद रखिए कि एक सफल कंपनी का 20 फीसद एक विफल कंपनी के 100 फीसद से ज्यादा मूल्य रखता है।

निश्चित समयावधि में अपनी वित्तीय संसाधनों की समीक्षा करते रहिए। हर महीने के कुछ घंटे अपने राजस्व, नकदी संग्रहण और खर्चों के परीक्षण के लिए रखिए। संभावित मुद्दों और खर्च कम करने या व्यापार बढ़ाने के अवसर खोजते रहिए। इसमें उन ग्राहकों की समीक्षा शामिल है, जिनसे आपके पास पैसा आना है और उन खर्चों की समीक्षा भी शामिल है जो आपको करने हैं।

व्यापार को बढ़ाने पर ध्यान लगाइए। ऐसा व्यापार मॉडल जरूरी है, जो जरूरत पड़ने पर आपको तेजी से विस्तार करने की गुंजाइश दे। अपने ग्राहक अधिकरण प्रक्रिया और वितरण तंत्र को चुनते समय इसका ध्यान रखिए। आपको ऐसा तंत्र चाहिए जिसमें मानवीय हस्तक्षेप कम से कम हो। यदि आपके उत्पाद या सेवा की वितरण के समय आपकी मौजूदगी जरूरी है या मौजूदा ग्राहकों को बनाए रखने में आपका काफी समय जा रहा है तो यह मान कर चलिए कि आपके उपक्रम में विस्तार संबंधी ऐसी कोई समस्या है, जिसका जल्द समाधान जरूरी है।
– शोभित अग्रवाल
(शिक्षक, आइआइएम उदयपुर)

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