देश का वस्तु निर्यात फरवरी में 0.81% घटकर 36.61 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया है। आयात फरवरी में 24.11 प्रतिशत बढ़कर 63.71 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया जबकि फरवरी, 2025 में यह 51.33 अरब डॉलर था। समीक्षाधीन महीने में व्यापार घाटा 27.1 अरब डॉलर रहा। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने व्यापार आंकड़ों पर मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि चुनौतियों के बावजूद देश का निर्यात अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-फरवरी अवधि में देश का निर्यात 1.84 प्रतिशत बढ़कर 402.93 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।
इसी अवधि में आयात भी 8.53 प्रतिशत बढ़कर 713.53 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। अग्रवाल ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न लॉजिस्टिक चुनौतियों की वजह से मार्च में निर्यात में गिरावट देखने को मिल सकता है।
यह संकट 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद उत्पन्न हुआ है जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य सहित प्रमुख व्यापार मार्गों में व्यापक व्यवधान आया है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की प्रगति के बारे में बात करते हुए वाणिज्य सचिव ने कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर नए शुल्क ढांचे को अंतिम रूप देने के बाद ही किए जाएंगे।
अग्रवाल ने कहा, ” हम इस समय अमेरिका के साथ समझौते के विवरण पर बातचीत कर रहे हैं।” अमेरिका और भारत दोनों व्यापार समझौते के एक ढांचे पर पिछले महीने सहमत हुए थे।
समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, वाणिज्य सचिव ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर कहा, “अमेरिका के साथ समझौता मार्च में होना था। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के कारण अब आईईईपीए के तहत टैरिफ लागू नहीं हैं। अनुच्छेद 122 के तहत अब ग्लोबल स्तर पर 10% टैरिफ लागू हैं। भारत जो भी समझौता करेगा, वह मौजूदा टैरिफ ढांचे के तहत ही होगा। अमेरिका ग्लोबल स्तर पर एक नया टैरिफ ढांचा तैयार करने की कोशिश कर रहा है। जब अमेरिका ऐसा ढांचा तैयार कर लेगा, तब समझौता करना बेहतर होगा। वास्तविक समझौता तभी होगा जब अमेरिका वैश्विक स्तर पर टैरिफ का नया ढांचा तैयार कर लेगा।”
समाचार भाषा के इनपुट के साथ
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