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रिलायंस जियो की इंटरकनेक्ट जरूरतों पर टेलीकॉम कंपनियां बात करने को तैयार

करार के बाद ऑपरेटरों को रिलायंस जियो के इंटरकनेक्शन पोर्ट के आग्रह को पूरा करने के लिए 90 दिन का समय होगा।

Author नई दिल्ली | Published on: September 9, 2016 9:21 PM
रिलायंस जियो 4जी। (फाइल फोटो)

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने दूरसंचार कंपनियों से पिछले कुछ समय से जारी इंटरकनेक्ट के मुद्दे पर बातचीत करने को कहा है। इसके जवाब में सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने कहा कि मौजूदा ऑपरेटर नए आपरेटर रिलायंस जियो के साथ उचित पॉइंट आफ कनेक्टिविटी पर विचार विमर्श करने को तैयार हैं। रिलायंस जियो के अलावा मौजूदा ऑपरेटरों भारती एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया ने नेटवर्क इंटरकनेक्शन के मुद्दे पर विचार के लिए ट्राई के साथ मुलाकात की।

सीओएआई ने कहा कि ऑपरेटर अब आमने-सामने बैठकर रिलायंस जियो को उचित बढ़ी हुई क्षमता पर बातचीत करने को तैयार हैं। करार के बाद ऑपरेटरों को रिलायंस जियो के इंटरकनेक्शन पोर्ट के आग्रह को पूरा करने के लिए 90 दिन का समय होगा। सीओएआई के महानिदेशक राजन एस मैथ्यूज ने शुक्रवार (9 सितंबर) को कहा कि रिलायंस जियो की अतिरिक्त जरूरत पर द्विपक्षीय वार्ता एकाध दिन में शुरू होगी। उन्होंने कहा, ‘निश्चित रूप से यह प्रगति है, यह निश्चित रूप शुरुआती गतिरोध को समाप्त करना है, उम्मीदें बन चुकी हैं और उम्मीद है कि इससे समाधान का आधार तैयार होगा।’

इससे पहले दिन में दूरसंचार ऑपरेटरों तथा क्षेत्र के नियामक के बीच बैठक से उद्योग संगठन को अलग रखा गया। माना जा रहा है कि रिलायंस जियो के कहने पर ऐसा किया गया। मैथ्यूज ने कहा कि बैठक में मौजूद ऑपरेटरों से जो मुझे समझ आया है कि वह यह कि ट्राई द्विपक्षीय वार्ता को आगे बढ़ना चाहता है। नियामक चाहता है कि दोनों पक्ष साथ बैठें और उचित इंटरकनेक्ट पॉइंट तथा क्षमता मांग पर बात करें। उचित जरूरत के हिसाब से हम इस पर सहमति बना सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि ट्राई ने सीओएआई की इस दलील पर विचार करने को कहा है कि रिलायंस जियो अन्य नेटवर्कों पर असंयमित वॉयस ट्रैफिक भेज रही है।

रिलायंस जियो ने मौजूदा ऑपरेटरों पर आरोप लगाया है कि वे उसे पर्याप्त इंटरकनेक्शन पोर्ट जारी नहीं कर रहे हैं, इससे उसके नेटवर्क पर बड़ी मात्रा में कॉल ड्रॉप हो रही है जिससे उपभोक्ताओं को दिक्कत आ रही है। वहीं मौजूदा ऑपरेटरों का कहना है कि वे अधिक इंटरकनेक्ट पोर्ट जारी नहीं कर सकते क्योंकि मुकेश अंबानी की कंपनी द्वारा मुफ्त वॉयस कॉल की पेशकश की वजह से उनके नेटवर्क पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ा है।

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