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टाटा मैनेजमेंट को ट्रिब्यूनल से झटका, तीन साल बाद टाटा संस के चेयरमैन पद पर साइरस मिस्त्री की दोबारा बहाली के आदेश

हालांकि, न्यायाधिकरण ने कहा कि बहाली आदेश चार सप्ताह बाद अमल में आएगा। टाटा संस को अपील करने के लिये यह समय दिया गया है।

सायरस मिस्त्री। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः निर्मल हरिंदरन)

साइरस मिस्त्री को बुधवार को बड़ी जीत मिली है। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने उन्हें टाटा संस का कार्यकारी चेयरमैन बहाल करने का आदेश दे दिया। अपीलीय न्यायाधिकरण ने एन चंद्रा की कार्यकारी चेयरमैन पद पर नियुक्ति को भी अवैध ठहराया। हालांकि, न्यायाधिकरण ने कहा कि बहाली आदेश चार सप्ताह बाद अमल में आएगा। टाटा संस को अपील करने के लिये यह समय दिया गया है। मिस्त्री की ओर से इस बाबत बयान में कहा गया- आज का निर्णय मेरी निजी जीत नहीं है। यह अच्छे शासन और माइनॉरिटी शेयरहोल्डर राइट्स से जुड़े सिद्धांतों की विजय है।

दरअसल, इसी साल जनवरी में Cyrus Investments (Shapoorji Pallonji (SP) Group की निवेश फर्म) ने ट्रिब्यूनल को चुनौती दी थी कि सायरस मिस्त्री को Company’s Articles of Association (AoA) के खिलाफ जाकर टाटा संस के चेयरमैन पद से हटा दिया गया है। Cyrus Investments ने भी टाटा संस के AoA में मॉडिफिकेशन की अपील की थी। खासकर आर्टिकल 75 में। SP Group ने इसके अलावा पहले NCLAT से गुजारिश की थी कि वह Tata Group’s Articles of Association के आर्टिकल 121 में संशोधन का आदेश दे।

धनाढ़्य शापूरजी पलोनजी परिवार से ताल्लुक रखने वाले मिस्त्री को अक्टूबर 2016 में टाटा संस के चेयरमैन पद से हटा दिया गया था। वह टाटा संस के छठे चेयरमैन रहे। मिस्त्री ने रतन टाटा के पद से हटने के बाद 2012 में कमान संभाली थी। बाद में समूह के अंदर विवाद उठने पर उन्हें टाटा संस के निदेशक मंडल से भी निकाल दिया गया। टाटा संस में मिस्त्री के परिवार की हिस्सेदारी 18.4 प्रतिशत है। मिस्त्री ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में उन्हें पद से हटाये जाने को चुनौती दी। मिस्त्री के परिवार की कंपनी साइरस इन्वेस्टमेंटस एंड र्स्टिलंग इनवेस्टमेंट्स ने टाटा संस और रतन टाटा समेत 20 अन्य के खिलाफ उत्पीड़न और कुप्रबंधन का मामला दर्ज कराया।

वैसे, मामले को एनसीएलटी ने मार्च 2017 में खारिज कर दिया था और कहा था कि वह इस तरह का मामला दायर कराने के पात्र नहीं है। बता दें कि कंपनी कानून, 2013 की धारा 244 कंपनी के किसी शेयरधारक को कंपनी के खिलाफ उत्पीड़न और कुप्रबंधन का मामला दर्ज कराने की अनुमति देता है। लेकिन इसके लिये जरूरी है कि कंपनी के निर्गमित शेयरों का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा उसके पास होना चाहिए।

एनसीएलटी के उक्त निर्णय के खिलाफ अपीलीय न्यायाधिकरण में जाने पर साइरस मिस्त्री के पक्ष को आंशिक जीत मिली थी। एनसीएलएटी ने 10 प्रतिशत शेयरधारिता की शर्त को हटा दिया लेकिन मामले को फिर विचार के लिए एनसीएलटी में भेज दिया था। पिछले साल जुलाई में एनसीएलटी ने मिस्त्री को पद पर बहाल किए जाने की याचिका खारिज कर दी और कुप्रबंधन तथा अल्पांश हिस्सेदारों के उत्पीड़न के आरोपों को भी खारिज कर दिया था। उसके बाद मिस्त्री ने मुंबई एनसीएलटी के निर्णय के खिलाफ अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील की। अपीलीय न्यायाधिकरण ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद इस साल जुलाई में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

एनसीएलएटी के फैसले के खिलाफ उचित कानूनी कदम उठाएंगे- टाटा संस: टाटा संस ने कहा है कि वह राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय प्राधिकरण (एनसीएलएटी) के आदेश के खिलाफ उचित कानून कदम उठाएगी। एनसीएलएटी ने बुधवार को साइरस मिस्त्री को फिर से टाटा संस का चेयरमैन बनाने का आदेश दिया। टाटा संस ने इस फैसले के बाद बुधवार को कहा, यह स्पष्ट नहीं है कि कैसे एनसीएलएटी ने उसके और उसकी सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरधारकों की वैध तरीके से बुलाई गई शेयरधारक बैठक में लिए गए फैसले को पलट दिया। टाटा संस ने कहा कि यह आदेश मिस्त्री द्वारा मांगी गई अंतरिम राहत से भी आगे चला गया है।

मिस्त्री की बहाली की खबर से टाटा समूह की कई कंपनियों के शेयर टूटेः टाटा समूह की विभिन्न कंपनियों के शेयरों में बुधवार को 4 प्रतिशत तक की गिरावट आयी। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) द्वारा टाटा संस के चेयरमैन पद साइरस मिस्त्री को बहाल किये जाने के बाद शेयरों में गिरावट दर्ज की गयी। बंबई शेयर बाजार में टाटा ग्लोबल बेवरेजेज का शेयर 4.14 प्रतिशत, टाटा कॉफी 3.88 प्रतिशत और टाटा मोटर्स के शेयर 3.05 प्रतिशत नीचे आयें। सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में टाटा मोटर्स को सर्वाधिक नुकसान हुआ। इसके अलावा इंडियन होल्टस कंपनी 2.48 प्रतिशत, टाटा केमिकल्स 1.65 प्रतिशत, टाटा इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन 1.22 प्रतिशत और टाटा पावर कंपनी 0.98 प्रतिशत नीचे आयें।

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