एअर इंडिया ने अपने नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और प्रबंध निदेशक (MD) के रूप में Ethiopian Airlines के पूर्व प्रमुख टेवोल्डे गेब्रेमारियम की नियुक्ति की है।

एअर इंडिया के मुताबिक, यह नियुक्ति दुनिया भर में उम्मीदवारों की तलाश के बाद की गई है। इसके लिए बोर्ड की एक विशेष समिति बनाई गई थी, जिसने कंपनी के अंदर और बाहर दोनों तरह के उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया।

एयरलाइन का कहना है कि टेवोल्डे गेब्रेमारियम को विमानन क्षेत्र के सबसे अनुभवी और सफल अधिकारियों में गिना जाता है। उन्होंने इथियोपियन एयरलाइंस ग्रुप के सीईओ के रूप में 10 साल से ज्यादा समय तक काम किया।

इस दौरान उन्होंने एयरलाइन के बड़े विस्तार का नेतृत्व किया, जिससे यह अफ्रीका का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाला एयरलाइन समूह बन गया। उनके कार्यकाल में कंपनी का राजस्व चार गुना से ज्यादा बढ़ा और विमानों का बेड़ा भी लगभग तीन गुना हो गया।

टाटा संस और एयर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा: “बोर्ड की ओर से मुझे एअर इंडिया में टेवोल्डे का स्वागत करते हुए खुशी हो रही है। कैंपबेल के गाइडेंस में स्टेबिलाइज़ेशन, इंटीग्रेशन और फ्लीट कमिटमेंट्स का शुरुआती फेज पूरा करने के बाद एअर इंडिया अब एक जरूरी एग्जीक्यूशन और एक्सपेंशन के दौर में जा रहा है। दुनिया के सबसे कुशल और फायदेमंद एयरलाइन ग्रुप्स में से एक बनाने में टेवोल्डे का ट्रैक रिकॉर्ड उन्हें एअर इंडिया को लीड करने के लिए खास तौर पर सही बनाता है। उनकी ऑपरेशनल एक्सपर्टीज, सेफ्टी के प्रति कमिटमेंट और हब डेवलपमेंट का विज़न एअर इंडिया को एक प्रीमियर ग्लोबल कैरियर और देश के गौरव का सोर्स बनाने में बहुत काम आएगा।”

आने वाले CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर, टेवोल्डे गेब्रेमरियम ने कहा: “एअर इंडिया के सफर के ऐसे ऐतिहासिक पल में उसे लीड करने का काम मिलना बहुत सम्मान की बात है। एअर इंडिया की एक शानदार विरासत है और एक वर्ल्ड-क्लास ग्लोबल एयरलाइन बनाने का मौका जो भारत की जबरदस्त आर्थिक क्षमता को दिखाता है, बहुत ही रोमांचक है। मैं चेयरमैन चंद्रशेखरन, बोर्ड, हमारे कर्मचारियों और सभी सरकारी और इंडस्ट्री पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करने का इंतजार कर रहा हूं ताकि बेहतरीन ऑपरेशनल भरोसा, गर्मजोशी से भरी भारतीय मेहमाननवाजी और लंबे समय तक लगातार ग्रोथ मिल सके।”

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किसी कंपनी को जब नया प्लांट लगाना हो, कारोबार बढ़ाना हो, तो उसे बड़ी रकम की जरूरत पड़ती है। ऐसे में आमतौर पर लोगों को लगता है कि कंपनियां बैंक से लोन लेती होंगी। लेकिन हकीकत यह है कि कई बड़ी कंपनियां बैंक से कर्ज लेने के बजाय बॉन्ड जारी करके निवेशकों से पैसा जुटाती हैं।

आखिर ऐसा क्यों होता है? बॉन्ड मार्केट क्या है, यह कैसे काम करता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं…