टाटा ग्रुप ने एअर इंडिया के लिए लगाई बोली, जल्‍द हो सकती है ‘महाराजा’ की घर वापसी

एअर इंडिया के विनिवेश के लिए वित्तीय बोलियां मिलीं है। बोली लगाने वालों में टाटा संस का भी नाम शामिल हैं। वहीं दूसरी ओर स्‍पाइसजेट की ओर से भी बोली लगाई गई है। इसका प्रोसेस जनवरी से शुरू होना था, लेकिन कोरोना म‍हामारी के कारण देरी हुई है।

Tata Group, Air India
टाटा ग्रुप ने एअर इंडिया के लिए फाइनल राउंड की अपनी बिड दाखिल कर दी है। (Photo By Indian Express Archive)

सरकार ने बुधवार को कहा कि उसे राष्ट्रीय विमानन कंपनी एअर इंडिया के अधिग्रहण के लिए कई वित्तीय बोलियां मिली हैं। इस बीच, टाटा संस के प्रवक्ता की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार कंपनी ने एयरलाइन के लिए बोली सौंपी है। जानकारी के अनुसार टाटा ग्रुप के पास एअर इंडिया की जिम्‍मेदारी आ सकती है। इसके लिए ग्रुप की ओर से अपनी कोर टीम को लगाया गया है। सूत्रों के हवाले खबर आई है कि सरकार भी टाटा ग्रुप को ही एअर इंडिया की जिम्‍मेदारी सौंप सकती है। वैसे इस बिड में स्‍पाइसजेट की ओर से भी बोली लगाई है। आपको बता दें क‍ि पहले किसी समय में इस कंपनी का नाम टाटा एयरलाइंस था।

एअर इंडिया की 100 फीसदी बिकेगी हिस्‍सेदारी
निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग यानी दीपम के सचिव तुहिन कांत पांडे ने ट्विटर पर लिखा कि लेनदेन सलाहकार को एअर इंडिया के विनिवेश के लिए वित्तीय बोलियां मिली हैं। प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है। केंद्र सरकार सरकारी स्वामित्व वाली एयरलाइन में अपनी 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचना चाहती है जिसमें एआई एक्सप्रेस लिमिटेड में एअर इंडिया की 100 फीसदी हिस्सेदारी और एअर इंडिया एसएटीएस एयरपोर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड में 50 फीसदी हिस्सेदारी शामिल हैं।

कोविड के कारण देर से शुरू हुआ प्रोसेस
जनवरी, 2020 से शुरू हुई विनिवेश की प्रक्रिया में कोविड-19 महामारी के कारण देरी हुई है। सरकार ने अप्रैल, 2021 में संभावित बोलीदाताओं को वित्तीय बोली सौंपने के लिए कहा था। बुधवार (15 सितंबर) बोली सौंपने का आखिरी दिन था। टाटा समूह उन यूनिट्स में शामिल था, जिन्होंने एयरलाइन को खरीदने के लिए दिसंबर, 2020 में प्रारंभिक रुचि पत्र (ईओआई) दिया था।

नियमों में ढील के बाद दिखाया इंट्रस्‍ट
2017 के बाद से, पिछले प्रयासों में कोई महत्वपूर्ण रुचि हासिल करने में विफल रहने और संभावित निवेशकों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के बाद, सरकार ने पिछले साल अक्टूबर में एअर इंडिया के लोन को नए निवेशक को ट्रांसफर करने से संबंधित ईओआई के नियम में ढील दी थी। इससे बोलीदाताओं को उस विशाल लोन का आकार तय करने की छूट मिली जिसकी वे जिम्मेदारी लेना चाहते हैं।

कंपनी का उठाना होगा कर्ज का इतना भार
जनवरी, 2020 में दीपम द्वारा जारी एअर इंडिया के ईओआई के अनुसार, 31 मार्च, 2019 तक एयरलाइन के कुल 60,074 करोड़ रुपए के लोन में, खरीदार को 23,286.5 करोड़ रुपए के लोन की जिम्मेदारी लेनी होगी। बाकी लोन एअर इंडिया एसेट्स होल्डिंग लिमिटेड (एआईएएचएल) को ट्रांसफर होगा, जो एक विशेष इकाई (एसपीवी) है। एअर इंडिया, 2007 में घरेलू विमान सेवा इंडियन एयरलाइंस के साथ अपने विलय के बाद से घाटे में चल रही है।

इन सब की मिलेगी जिम्‍मेदारी
एयरलाइन के लिए सफल बोली लगाने वाली कंपनी को घरेलू हवाई अड्डों पर 4,400 घरेलू और 1,800 अंतरराष्ट्रीय लैंडिंग एवं पार्किंग स्लॉट के साथ-साथ विदेशी हवाई अड्डों पर 900 स्लॉट का नियंत्रण हासिल होगा। इसके अलावा, कंपनी को एयरलाइन की कम लागत वाली सेवा एअर इंडिया एक्सप्रेस का 100 प्रतिशत और एआईएसएटीएस का 50 प्रतिशत स्वामित्व मिलेगा। एआईएसएटीएस प्रमुख भारतीय हवाई अड्डों पर कार्गो और ग्राउंड हैंडलिंग सेवाएं प्रदान करती है।

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