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Tata Consultancy Services: काम करने के लिए सबसे अच्छी कंपनियों में TCS, जानें- कैसे एक स्टार्टअप से तय किया सबसे ज्यादा वैल्यूएशन वाली कंपनी का सफर

TCS company growth rate: टीसीएस में काम करने वाले 72 फीसदी लोगों ने कंपनी को काम के लिए बेहतर जगह करार दिया है। 2018 में कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को पछाड़कर मार्केट कैपिटलाइजेशन के मामले में नंबर वन पर आ गई थी।

ratan tataटाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा

Journey of Tata Consultancy Services: ऐसी बहुत कम ही कंपनियां होंगी, जहां कर्मचारी अपने काम और मैनेजमेंट से खुश हों। इनमें से एक है, देश की नंबर वन आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस। Tata Consultancy Services को Fortune Best Big Companies to Work’ की सूची में 2020 में काम करने के लिहाज से बेहतर कंपनियों में शुमार किया गया है। सर्वे के मुताबिक कंपनी के 80 फीसदी लोगों ने वर्क और लाइफ में बैलेंस की बात कही है। इसके अलावा 72 फीसदी लोगों ने कंपनी को काम के लिए बेहतर जगह करार दिया है। 2018 में कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को पछाड़कर मार्केट कैपिटलाइजेशन के मामले में नंबर वन पर आ गई थी। हालांकि फिलहाल दूसरे नंबर पर है। आइए जानते हैं, टाटा ग्रुप की इस शानदार कंपनी की कैसे हुई शुरुआत और कैसा रहा सफर…

दरअसल टीसीएस की नींव एक तरह से 1968 में पड़ी थी। टाटा ग्रुप ने एक स्टार्टअप के तौर पर इसकी शुरुआत की और शानदार टेक्नोक्रेट एफसी कोहली को जनरल मैनेजर के तौर पर जिम्मेदारी दी थी, जो इससे पहले टाटा इलेक्ट्रिक में जनरल मैनेजर के तौर पर काम कर रहे थे।

इसके बाद 1970 का दौर आया, जब कंपनी को सरकार की ओर से सॉफ्टवेयर डिजाइन के काम मिले। इनमें शेयर रजिस्ट्री वर्क, प्रोविडेंट फंड अकाउंटिंग जैसे काम शामिल थे।

1971 में कंपनी को देश से बाहर पहला कोई काम मिला था। मिडिल ईस्टर्न पावर जनरेशन एंड डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी की ओर से टीसीएस को अपने स्टोर संभालने और कंप्यूटराइज्ड इन्वेंट्री कंट्रोल सिस्टम को संभालने का जिम्मा दिया गया।

इसके बाद तो फिर टीसीएस को लगातार ग्रोथ मिलने लगी और 1974 में कंपनी ब्रिटेन की दो बिल्डिंग सोसायटीज की तरफ फाइनेंशियल अकाउंटिंग का काम दिया गया। इस काम में दिग्गज चार्टर्ड एस. महालिंगम की अहम भूमिका थी। कंपनी की ओर से 6 लोगों को इस काम जिम्मा दिया गया था। जिनमें से 4 लोग ब्रिटेन गए थे और बाकी 2 लोग मुंबई से काम देख रहे थे। उन्होंने 38 साल तक कंपनी में काम किया और सीएफओ भी रहे।

1976 कंपनी के लिए मील के पत्थर जैसा था, जब उसने 1 मिलियन डॉलर का रेवेन्यू एक्सपोर्ट के जरिए हासिल किया। फिर 1979 में कंपनी ने न्यूयॉर्क में अपना ऑफिस खोला, जो देश के बाहर पहला दफ्तर था।

भारत में भी टीसीएस ने तकनीकी क्रांति को किस तरह से आगे बढ़ाया, इसका एक उदाहरण यह भी है कि 1992 में जब नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत हुई तो उसके ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म को तैयार करने का काम टीसीएस ने ही किया।

2001 में टीसीएस को भारतीय स्टेट बैंक की 13,000 शाखाओं और 7 अन्य सहयोगी बैंकों के कोर बैंकिंग सॉल्यूशन का काम मिला। यह भारत का सबसे बड़ा बैंकिंग सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट था। इसके बाद कंपनी ने 2002 में चीन में अपने काम का विस्तार किया।

2004 में टीसीएस ने जब बीएसई और एनएसई में अपना आईपीओ उतारा तो उसने शेयर बाजार में धूम मचा दी। 850 रुपये के साथ उस दौर में टीसीएस का सबसे ऊंचा शेयर था।

2012 में कंपनी ने 10 अरब डॉलर के रेवेन्यू को पार कर लिया। यह टीसीएस के अब तक के सफर में मील के पत्थर जैसा था।

2018 में ही कंपनी ने अपने 50 साल पूरे किए हैं। फिलहाल कंपनी 46 देशों की 149 लोकेशंस पर काम करती है।

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