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Syndicate Bank: गरीब महिलाओं से 25-25 पैसे जोड़कर खड़ा कर दिया बैंक! जानें टीएम अनंत पाई की कामयाबी की कहानी

टीएम अनंत पई ने बुनकर समाज के भले के लिए स्कूल, कॉलेज और बाद में इंजीनियरिंग और मेडिसिन इंस्टीट्यूट की शुरुआत की। आज इन्हें प्रतिष्ठित 'मनीपाल एजुकेशनल कॉम्पलेक्स' के नाम से जाना जाता है।

Author नई दिल्ली | Updated: September 11, 2019 2:20 PM
सिंडिकेट बैंक की शुरुआत करने वाले डॉ. टीएम अनंत पई।

हाल ही में केन्द्र सरकार ने कई सरकारी बैंकों के विलय की घोषणा की है। सरकार का कहना है कि यह कदम सरकारी बैंकों को मजबूत बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। बता दें कि जिन बैंकों का विलय किया जाना है, उनमें सिंडिकेट बैंक का भी नाम शामिल है। सिंडिकेट बैंक का केनरा बैंक के साथ विलय किया जाएगा, जिसके बाद यह देश का चौथा सबसे बड़ा सरकारी बैंक बन जाएगा। गौरतलब है कि सिंडिकेट बैंक के शुरू होने की कहानी काफी दिलचस्प और प्रेरक है। सिंडिकेट बैंक की कहानी एक व्यक्ति द्वारा समाज की भलाई के लिए शुरू किए गए विचार और विश्वास की कहानी है।

कैसे हुई सिंडिकेट बैंक की शुरुआतः सिंडिकेट बैंक तोन्से माधव अनंत पई (टीएम अनंत पई) द्वारा शुरू किया गया था। मनी कंट्रोल की एक खबर के अनुसार, टीएम अनंत पई ने बेंगलुरू से मेडिसिन की पढ़ाई की थी और इसके बाद वह जापान जाकर मेडिसिन में उच्च शिक्षा पाना चाहते थे। लेकिन अपनी मां के आदेश पर वह गांव में ही रहकर गरीब मछुआरों का इलाज करने लगे। लेकिन उनके सामने एक समस्या यह आयी कि गांव में लोगों को आम बीमारियां होती थीं और उनके इलाज के लिए भी गांव वालों के पास पैसे नहीं होते थे।

इस पर टीएम अनंत पई ने गांव वालों को बचत के बारे में जागरुक करने का सोचा और गांव की महिलाओं को छोटी-छोटी बचत करने के लिए प्रेरित किया। बता दें कि जिस समय न्यूनतम 5 रुपए में बैंक में खाता खुलता था, तब अनंत पई ने सिर्फ 25 पैसे से गरीब मछुआरों के अपने पास खाते खोले। इसी तरह बढ़ते-बढ़ते एक समय ऐसा आया जब अनंत पई के पास हजार रुपए इकट्ठा हो गए थे, जो कि आज के समय में लाखों रुपए के बराबर हैं।

इसके बाद अनंत पई ने गांव के बच्चों की बीमारी को देखते हुए गांव की महिलाओं को उन्हें दूध देने की सलाह दी। लेकिन गरीब महिलाएं अपने बच्चों को दूध पिलाने में सक्षम नहीं थीं। इस पर अनंत पई ने कुछ महिलाओं को अपने पैसों से गाय खरीदकर दी, जिसका कुछ दूध महिलाएं अपनी घर में इस्तेमाल करती, वहीं बाकी दूध अनंत पई को दे देती थीं, इस तरह देखते ही देखते पूरे गांव की महिलाओं ने ऐसा किया और फिर इस दूध से टीएम अनंत पई ने एक कॉपरेटिव डेयरी की शुरुआत कर दी।

इसके बाद अनंत पई ने बैंक शुरू करने और व्यापार को बढ़ाने के लिए प्रमोटर की तलाश शुरू की। जिसके बाद धीरूभाई अंबानी के रुप में उन्हें वह प्रमोटर मिला। शुरुआत में सिंडिकेट बैंक का नाम ‘केनरा इंडस्ट्रियल एंड बैंकिंग सिंडिकेट लिमिटेड’ था, जिसका मुख्याल मनिपाल में था। अनंत पई ने साल 1925 में कर्नाटक के उडुपी में बैंक की पहली ब्रांच की शुरुआत की।

टीएम अनंत पई ने इसके बाद बुनकर कॉपरेटिव सोसाइटी की शुरुआत की, जिसे उनके बैंक द्वारा फाइनेंस किया जाता था। इसके बाद बुनकर समाज के भले के लिए टीएम अनंत पई ने स्कूल, कॉलेज और बाद में इंजीनियरिंग और मेडिसिन इंस्टीट्यूट की शुरुआत की। आज यह कॉम्पलेक्स ही प्रतिष्ठित ‘मनीपाल एजुकेशनल कॉम्पलेक्स’ के नाम से जाना जाता है।

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