ताज़ा खबर
 

डीजल SUV, भारी वाहनों के पंजीकरण पर रोक संभव

प्रदूषण के बढ़ते स्तर से चिंतित सर्वोच्च न्यायालय ने संकेत दिया कि वह अगले तीन चार महीने के लिए 2000 सीसी से अधिक क्षमता वाले इंजनों की डीजल एसयूवी, कारों और वाणिज्यिक वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगा सकता है।

Author नई दिल्ली | December 15, 2015 11:47 PM

प्रदूषण के बढ़ते स्तर से चिंतित सर्वोच्च न्यायालय ने संकेत दिया कि वह अगले तीन चार महीने के लिए 2000 सीसी से अधिक क्षमता वाले इंजनों की डीजल एसयूवी, कारों और वाणिज्यिक वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगा सकता है। न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि इसके अलावा राजधानी में प्रवेश करने वाले ट्रकों पर लगने वाला हरित शुल्क दोगुना किया जा सकता है।

शीर्ष अदालत ने राजधानी में प्रदूषण के बढ़ते स्तर पर काबू पाने के इरादे से 12 अक्तूबर को एक नवंबर से दिल्ली में प्रवेश करने वाले हल्के वाहनों पर सात सौ रुपए और तीन एक्सेल वाहनों पर 1300 रुपए पर्यावरण हर्जाना शुल्क लगाने का आदेश दिया था। यह शुल्क इन वाहनों से वसूल किए जाने वाले टोल टैक्स के अतिरिक्त है।

प्रधान न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाले पीठ ने कहा कि वह राष्ट्रीय राजधानी से बाहर के गंतव्य के लिए दिल्ली के रास्ते होकर जाने वाले वाणिज्यिक वाहनों पर पर्यावरण हर्जाना शुल्क सौ फीसद बढ़ा सकता है। अब दिल्ली में प्रवेश करने वाले हल्के वाण्ज्यििक वाहनों को 1400 रुपए और तीन एक्सेल वाहनों को 2600 रुपए पर्यावरण हर्जाना शुल्क देना पड़ सकता है। न्यायालय समय के अभाव में मंगलवार को अंतरिम निर्देश नहीं दे सका और अब वह इस संबंध में बुधवार को अंतरिम निर्देश दे सकता है।
इस मामले में तीन घंटे तक चली सुनवाई के दौरान पीठ ने केंद्र और दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकीलों से कहा कि वे वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए अल्पकालीन और दीर्घकालीन विस्तृत योजना पेश करें। पीठ ने कहा, आप लोग दिल्ली की हवा को स्वच्छ बनाने का श्रेय क्यों नहीं लेते? आप बता सकते हैं कि कौन से कदम उठाने चाहिए और आप न्यायालय से ऐसा करने के लिए क्यों कह रहे हैं? न्यायालय ने कहा कि तीन साल महीने के लिए अंतरिम उपाय के रूप में वह 2000 सीसी से अधिक क्षमता वाले इंजनों की एसयूवी और ऐसी कारों के पंजीकरण पर रोक लगाने के साथ ही 2005 से पहले के पंजीकृत वाणिज्यिक वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा सकता है।

न्यायालय ने कहा कि दिल्ली की सड़कों पर सिर्फ सीएनजी से चलने वाली टैक्सियों को ही अनुमति दी जा सकती है। इसके अलावा, यूरो-चार मानक लागू करने के साथ ही नगर निगम के कचरे को जलाने पर सख्ती से प्रतिबंध लागू करना होगा। न्यायालय ने पर्यावरणविद् अधिवक्ता महेश चंद्र मेहता द्वारा 1984 में दायर जनहत याचिका सहित कई मामलों की सुनवाई कर रहा था।

दिल्ली सरकार के राजधानी की सड़कों पर निजी वाहनों को ‘सम-विषम’ के आधार पर बारी बारी से चलने की अनुमति देने मसले पर पीठ ने कहा, हम इस बारे में कुछ नहीं कह सकते। हम पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं कि सिर्फ यही एक उपाय है। यह तमाम उपायों में से एक है। इस पर आपको (दिल्ली सरकार) अमल करना है। प्रधान न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि वह अपने सहयोगी न्यायाधीशों के साथ कार पूल करने में संकोच नहीं करेंगे।

न्यायालय ने यह भी कहा कि वह शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री को निर्देश देंगे कि यहां पर साइकिल स्टैंड की व्यवस्था की जाए। वरिष्ठ अधिवक्ता के टीएस तुलसी ने इसकी इच्छा व्यक्त की थी। न्यायमित्र की भूमिका निभा रहे वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि यूरो चार ईंधन उपलब्ध नहीं है और यूरो चार के मानकों के अनुरूप कारों को फिलहाल राष्ट्रीय राजमार्गों पर चलने की अनुमति दी जा सकती है।

न्यायालय के सवाल पर साल्वे ने कहा कि केंद्र सरकार कहती है कि 2020 से पहले इसे लागू नहीं किया जा सकेगा क्योंकि इसके अनुरूप ईंधन के उत्पादन के लिए रिफाइनरी को बेहतर बनाना होगा। सुनवाई के दौरान साल्वे ने कहा कि इसकी जिम्मेदारी डीजल वाहनों पर है क्योंकि दिल्ली में करीब 30 फीसद डीजल वाहन चलते हैं। न्यायमित्र के इस कथन का विरोध करते हुये वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने कहा कि वाहनों की कुल संख्या में डीजल गाड़ियों का हिस्सा बहुत थोड़ा है और उन्हें निशाना नहीं बनाना चाहिए। दवे ने कहा कि डीजल वाहनों पर किसी भी प्रकार के नियंत्रण पर प्रतिकूल असर पड़ेगा क्योंकि इसमें हजारों कार्मिक और बड़ा निवेश शामिल है।

उन्होंने कहा कि डीजल वाहनों पर अंकुश लगाना ‘व्यावहारिक समाधान’ नहीं है। हालांकि पीठ ने इस कथन से असहमति व्यक्त की और कहा कि यह बहुत बड़ी संख्या है और वे शहर को प्रदूषित कर रहे हैं।
साल्वे ने कहा कि एक डीजल कार पेट्रोल की आठ कारों के बराबर है। इस पर पीठ ने टिप्पणी करते हुये कहा, ‘वे कारोबारी हैं। वे पैसा बनाना चाहते हैं। लोगों की जिंदगी दांव पर है।’ हाल ही में राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने निर्देश दिया था कि दिल्ली में तत्काल प्रभाव से डीजल से चलने वाले वाहनों का पंजीकरण नहीं होगा। अधिकरण ने केंद्र और राज्य सरकार के विभागों से कहा था कि वे डीजल गाड़ियां नहीं खरीदें। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने भी प्रदूषण को लेकर छिड़ी बहस में दखल दिया और राजधानी में आवश्यक वस्तुओं को लेकर आने वाले वाहनों के अलावा डीजल से चलने वाली ट्रकों के दिल्ली में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के सुझाव पर गौर करने के लिये तैयार हो गया था।

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories