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Food Security Act लागू न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मोदी सरकार को फटकार

न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अगुआई वाले एक पीठ ने कहा, ‘संसद क्या कर रही है? क्या गुजरात भारत का हिस्सा नहीं है?

Author नई दिल्ली | February 2, 2016 01:44 am
(pic- financialexpress)

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून को लागू न करने को लेकर कुछ राज्यों को सोमवार को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि संसद की ओर से पारित कानून को आखिर गुजरात जैसा राज्य क्यों कार्यान्वित नहीं कर रहा है। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अगुआई वाले एक पीठ ने कहा, ‘संसद क्या कर रही है? क्या गुजरात भारत का हिस्सा नहीं है? कानून कहता है कि वह पूरे भारत के लिए है और गुजरात है कि इसका कार्यान्वयन नहीं कर रहा है। कल कोई कह सकता है कि वह आपराधिक दंड संहिता, भारतीय दंड संहिता और प्रमाण कानून को लागू नहीं करेगा।’

पीठ ने केंद्र से कहा कि वह सूखा प्रभावित राज्यों में मनरेगा, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और मध्याह्न भोजन जैसी कल्याणकारी योजनाओं की स्थिति के बारे में जानकारी एकत्र करे। पीठ ने केंद्र सरकार से 10 फरवरी तक हलफनामा दायर करने को कहा और मामले की अगली सुनवाई दो दिन बाद नियत कर दी।

सुप्रीम कोर्ट ने 18 जनवरी को केंद्र से मनरेगा, खाद्य सुरक्षा कानून और मध्याह्न भोजन योजनाओं के कार्यान्वयन के बारे में जानकारी देने को कहा था। न्यायालय ने जानना चाहा था कि क्या प्रभावितों को न्यूनतम आवश्यक रोजगार बाकी पेज 8 पर
और आहार उपलब्ध कराया जा रहा है या नहीं।
पीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है। इसमें आरोप लगाया गया है कि उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, ओड़ीशा, झारखंड, बिहार, हरियाणा और चंडीगढ़ सूखा प्रभावित हैं। लेकिन प्राधिकारी समुचित राहत उपलब्ध नहीं करा रहे हैं।
यह जनहित याचिका गैर सरकारी संगठन ‘स्वराज अभियान’ ने दाखिल की है। इसका संचालन योगेंद्र यादव जैसे लोग कर रहे हैं। याचिका में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून लागू करने की मांग की गई है। इसमें हर व्यक्ति को प्रतिमाह पांच किलो खाद्यान्न मुहैया कराने की गारंटी दी गई है। एनजीओ ने प्राधिकारियों को यह आदेश देने की मांग भी की है कि प्रभावित परिवारों को दालें और खाद्य तेल भी दिया जाए।

याचिका में कहा गया है कि स्कूल जाने वाले बच्चों को दोपहर के भोजन योजना के तहत दूध और अंडा भी दिया जाए। याचिका में फसल के नुकसान की स्थिति में समय पर और समुचित मुआवजा देने की मांग की गई है। यह भी कहा गया है कि सूखा प्रभावित किसानों को अगली फसल के लिए सबसिडी और पशुओं के लिए सबसिडी युक्त चारा दिया जाना चाहिए।

अधिवक्ता प्रशांत भूषण के माध्यम से दायर इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि अपने दायित्वों के निर्वाह में केंद्र और राज्यों की घोर उपेक्षा के कारण लोगों को खासा नुकसान हो रहा है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 और 14 के तहत अधिकारों की गारंटी के उलट है। याचिका में कहा गया है कि सूखे की वजह से ग्रामीण गरीबों के लिए उपलब्ध कृषि संबंधी रोजगार में गहरी कमी आई है।

 

 

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