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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद Airtel, Vodafone Idea के अस्तित्व पर मंडराया संकट, तीन साल में तिगुना हो गया बकाया

टेलीकॉम सेक्टर पहले से ही टैरिफ वॉर और भारी कर्ज के चलते परेशानियों से घिरा है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इन टेलीकॉम कंपनियों के सामने बड़ी मुश्किल पैदा कर दी है।

vodafone ideaतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के गुरुवार को टेलीकॉम सेक्टर के AGR (Adjusted Gross Revenues) के मुद्दे पर दिए गए फैसले से दिग्गज कंपनियों Airtel और Vodafone Idea के अस्तित्व पर ही सवालिया निशान लग गया है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने दूरसंचार विभाग के पक्ष में फैसला देते हुए AGR में लाइसेंस और स्पेक्ट्रम फीस के अलावा यूजर चार्जेज, किराया, डिविडेंट्स और पूंजी की बिक्री के लाभांश को भी शामिल करने का आदेश दिया था। इससे पहले एजीआर में सिर्फ लाइसेंस और स्पेक्ट्रम की फीस ही शामिल होती थी। इस मुद्दे पर टेलीकॉम कंपनियां और दूरसंचार विभाग के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था।

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से टेलीकॉम कंपनियों को बड़ा झटका लगा है और उन्हें दूरसंचार विभाग को 92 हजार करोड़ रुपए के बकाए का भुगतान करना होगा। इस 92 हजार करोड़ में से 54% एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को ही देना है। बता दें कि भारती एयरटेल को 21,682 करोड़ रुपए और वोडाफोन आइडिया को 28,308 करोड़ रुपए का भुगतान करना है। चूंकि टेलीकॉम सेक्टर पहले से ही टैरिफ वॉर और भारी कर्ज के चलते परेशानियों से घिरा है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इन टेलीकॉम कंपनियों के सामने बड़ी मुश्किल पैदा कर दी है।

बता दें कि बकाए का 46 प्रतिशत रिलायंस कम्यूनिकेशंस, टाटा टेलीसर्विस, एयरसेल और अन्य कंपनियों को चुकाना था, लेकिन अब ये कंपनियां अस्तित्व में ही नहीं हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सबसे ज्यादा असर एयरटेल और वोडाफोन आइडिया पर ही पड़ेगा। एयरटेल पर जून 2019 की तिमाही में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज है। वहीं इसी तिमाही में वोडाफोन आइडिया ने 4,873 करोड़ रुपए कर्ज होने की बात कही है।

माना जा रहा है कि अब 92 हजार करोड़ रुपए के अतिरिक्त बोझ से टेलीकॉम कंपनियों की ब्रॉडबैंड सेवाएं, नेटवर्क के विस्तार और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं मुश्किल में पड़ सकती हैं। बता दें कि 3 साल पहले टेलीकॉम कंपनियों पर कुल बकाया 29,474 करोड़ रुपए था जो अब बढ़कर 92 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।

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