अंबानी से अमीर बनने पर असहज हो गए थे ये अरबपति, अमेरिका समेत दुनियाभर में फैला है कारोबार

गुजरात में जन्मे और कोलकाता में पढ़ाई पूरी करने वाले संघवी के दौलत की बात करें तो फिलहाल 10.9 बिलियन डॉलर से ज्यादा है। फोर्ब्स के मुताबिक वह देश के टॉप 10 अमीरों में शामिल हैं।

sun pharma, dilip sanghaviमुकेश अंबानी-दिलीप संघवी (Photo-Indian Express )

लंबे समय से देश के सबसे दौलतमंद अरबपति का ताज मुकेश अंबानी के सिर पर है। हालांकि, साल 2015 में ऐसा भी मौका आया जब मुकेश अंबानी इस मामले में पिछड़ गए थे। मुकेश अंबानी के सिर से ताज छिनने वाल कोई और नहीं बल्कि फार्मास्युटिकल कंपनी सन फार्मा के फाउंडर दिलीप संघवी थे।

हालांकि, दिलीप संघवी इसके बाद थोड़ा असहज हो गए थे। दिलीप संघवी ने अपनी असहजता का जिक्र एक इंटरव्यू में किया था। इंटरव्यू में दिलीप संघवी ने बताया था कि साल 2015 से पहले फार्मा कारोबार के बाहर बहुत कम लोग ही मुझे जानते थे। भले ही उन्हें सन फार्मा के बारे में जानकारी रही होगी, लेकिन जब देश का सबसे अमीर अरबपति बना तो मेरे बोर में लोगों की दिलचस्पी पैदा हो गई। मैं उनकी निगाहों में आ गया था और इससे मैं बहुत असहज महसूस कर रहा था।

गुजरात में जन्मे और कोलकाता में पढ़ाई पूरी करने वाले संघवी के दौलत की बात करें तो फिलहाल 10.9 बिलियन डॉलर से ज्यादा है। फोर्ब्स के मुताबिक वह देश के टॉप 10 अमीरों में शामिल हैं। सन फार्मा को भारत की नंबर एक तो दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनी माना जाता है। संघवी ने सन फार्मा कंपनी 1982 में केवल दस हजार रुपये की लागत से शुरू की थी।

संघवी को बड़ी सफलता उस समय मिली, जब उन्होंने कुछ साल पहले रैनबेक्सी कंपनी को खरीदा। साल 2015 में सनफार्मा का शेयर भाव 1 हजार रुपये से भी ज्यादा था, जो अब घटकर 650 रुपये के स्तर पर आ चुका है। कहने का मतलब ये है कि 6 सालों में सन फार्मा के शेयर भाव और मार्केट कैप में 50 फीसदी की गिरावट आई है।

अमेरिका में दबदबाः अमेरिका के दवा मार्केट में सनफार्मा का दबदबा है। जेनरिक दवाइयों की वजह से कंपनी की लोकप्रियता रही। हालांकि, समस-समय पर अमेरिका की ओर से सख्ती का सामना भी करना पड़ा है। (ये पढ़ें-मुकेश अंबानी से ज्यादा है इन दो भाइयों की सैलरी, रिलायंस में मिली है बड़ी जिम्मेदारी)

इस वजह से दिलीप संघवी की दौलत भी कम हुई। बता दें कि अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने विदेशों से आयात होने वाली दवाओं की जांच पर सख्ती दिखाई थी। इसके साथ ही अमेरिका की ओर से सन फार्मा के कई प्लांट को लेकर भी सवाल खड़े किए गए थे। अमेरिका के अलावा दुनिया के अन्य देशों में भी सनफार्मा विस्तार कर चुकी है। (ये पढ़ें-कर्ज देती थी अनिल अंबानी की ये दो कंपनियां, फिर कारोबार समेटने की आ गई नौबत)

Next Stories
1 कोरोना काल में मदद को आगे आया जिंदल ग्रुप, जानिए कौन संभाल रहा कारोबारी साम्राज्य
2 मुकेश अंबानी से ज्यादा है इस अरबपति की सैलरी, टेलीकॉम में बढ़ा रहे टेंशन
3 RBI ने लागू किया नया नियम, उदय कोटक को छोड़ना पड़ सकता है ये पद
यह पढ़ा क्या?
X