त्योहारी सीजन से पहले देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कई शहरों के खुदरा बाजार में चीनी 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जिससे घरों के बजट के साथ-साथ मिठाई और खाद्य उद्योग की लागत भी बढ़ने लगी है।
महंगाई पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने करीब 10 साल बाद बड़ा फैसला लेते हुए 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी है। इसके साथ ही बल्क उपभोक्ताओं पर स्टॉक लिमिट भी लागू की गई है, ताकि त्योहारी सीजन में कीमतों को काबू में रखा जा सके।
सरकार के दो बड़े फैसले
– 10 लाख टन कच्ची चीनी का शुल्क-मुक्त आयात।
– बल्क उपभोक्ताओं पर स्टॉक लिमिट।
10 लाख टन कच्ची चीनी का शुल्क-मुक्त आयात
रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने घरेलू बाजार में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन (1 मिलियन MT) कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त (ड्यूटी-फ्री) आयात की अनुमति दे दी है। वाणिज्य मंत्रालय ने गुरुवार को जारी अधिसूचना में यह जानकारी दी।
सरकार ने 21 अगस्त से 31 अक्टूबर 2026 तक इस आयात की मंजूरी दी है। यह अवधि त्योहारी सीजन से ठीक पहले की है, जब रक्षाबंधन, नवरात्र और दिवाली जैसे पर्वों के कारण मिठाइयों की मांग बढ़ने से देश में चीनी की खपत अपने चरम पर पहुंच जाती है।
पिछले दो महीनों में भारत में चीनी की खुदरा कीमतों में करीब 40% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कम उत्पादन और सीमित घरेलू आपूर्ति के चलते बाजार में कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। इसी वजह से भारत को लगभग एक दशक बाद पहली बार चीनी का आयात करना पड़ रहा है।
बल्क उपभोक्ताओं पर स्टॉक लिमिट
रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने रिकॉर्ड चीनी की कीमतों को काबू में करने के लिए आदेश दिया है कि कोई भी बल्क कंज्यूमर जो महीने में 10 मीट्रिक टन से ज़्यादा चीनी का इस्तेमाल करता है, वह 15 दिनों से ज़्यादा स्टॉक नहीं रखेगा, बुधवार को एक सरकारी आदेश में यह जानकारी दी गई। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि यह आदेश 1 सितंबर से लागू होगा और 30 नवंबर तक लागू रहेगा।
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देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का दायरा लगातार बढ़ रहा है और सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा व प्रदूषण कम करने के अहम उपाय के रूप में देख रही है। यही वजह है कि एथेनॉल उत्पादन और एथेनॉल ब्लेंडिंग दोनों पर तेजी से काम हो रहा है। सरकार के अनुसार, 31 अक्टूबर 2025 तक भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़कर 1,953 करोड़ लीटर प्रतिवर्ष हो चुकी है।
लेकिन आखिर एथेनॉल क्या होता है, इसे किन फसलों से बनाया जाता है। आइए समझते हैं…
