Sudip Dutta: earning 400 rupees a month made a company of 1600 Cr, drowned in debt, arrested in fraud - 400 रुपये महीने कमाने वाले इस शख्स ने बना दी 1600 Cr की कंपनी, फिर कर्ज में डूबा, फ्रॉड में भी हुआ गिरफ्तार - Jansatta
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400 रुपये महीने कमाने वाले इस शख्स ने बना दी 1600 Cr की कंपनी, फिर कर्ज में डूबा, फ्रॉड में भी हुआ गिरफ्तार

इस शख्स की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं लगती है, जिसने 400 रुपये महीने की तनख्वाह पर मजदूरी की और फिर जहां काम करता था उसी कंपनी को खरीदकर डेढ़ हजार करोड़ से ज्यादा का साम्राज्य खड़ा कर दिया। नीयति को शायद कुछ और ही मंजूर था। शख्स फ्रॉड केस में गिरफ्तार हुए, कंपनी कर्ज में डूब गई और सभी मैन्युफेक्चरिंग यूनिट बंद हो गईं।

सुदीप दत्ता की फाइल फोटो। (Image Source- Facebook/Unitedworld School of Business)

इस शख्स की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं लगती है, जिसने 400 रुपये महीने की तनख्वाह पर मजदूरी की और फिर जहां काम करता था उसी कंपनी को खरीदकर डेढ़ हजार करोड़ से ज्यादा का साम्राज्य खड़ा कर दिया। नीयति को शायद कुछ और ही मंजूर था। शख्स फ्रॉड केस में गिरफ्तार हुए, कंपनी कर्ज में डूब गई और सभी मैन्युफेक्चरिंग यूनिट बंद हो गईं। Ess Dee Aluminum Pvt Ltd नाम की तकरीबन 1600 करोड़ की कंपनी खड़ी करने वाले पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर के सुदीप दत्ता की कहानी काफी उतार-चढ़ाव भरी है। सुदीप दत्ता ने महज 12वीं तक की पढ़ाई की। इसी शिक्षा के बलबूते उन्होंने अपने क्लाइंट्स में Nestle, GlaxoSmithKline, और Sun Pharmaceuticals Ltd जैसी एफएमसीजी (फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) कंपनियों को शामिल कर लिया। 17 वर्ष की उम्र में सुदीप ने उस वक्त मुंबई का रुख कर लिया था जब पिता और बड़े भाई के दुनिया से रुख्सत होने के बाद परिवार के सात सदस्यों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। इंजीनियर बनने का सपना देखने वाले सुदीप ने 1889 में एक पैकेजिंग कंपनी में काम करना शुरू किया, जहां उन्हें महज 400 रुपये महीने के हिसाब से पगार मिलती थी।

सुदीप एक दिन में 40 किलोमीटर पैदल चलते थे और 20 लोगों से भरे रहने वाले कमरे में रहते थे। मीडिया रिपोर्टे्स के मुताबिक सुदीप जिस कंपनी में काम कर रहे थे, वह घाटे में जा रही थी और बंद होने वाली थी। उन्होंने अपनी कुछ जमा राशि और कुछ उधार लेकर 16 हजार रुपयों में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के मालिक से साथ एक शेयरिंग प्रॉफिट एग्रिमेंट पर हस्ताक्षर कर खरीद लिया। उन्होंने फार्मा और पैकेजिंग कंपनियों की जरूरतों को समझा और हाथ आजमाया। उन्होंने अपने छोटी पूंजी वाली कंपनीक को बड़ी पूंजी वाली में बदलने का फैसला कर लिया। India foils, Jindal Ltd. जैसी कंपनियों के आगे सुदीप की कंपनी छोटी थी लेकिन 2008 में सुदीप ने 130 करोड़ रुपये में वेदांता ग्रुप की इंडिया फोइल्स को खरीद लिया। उस वक्त कई प्रोफेशनल्स ने सुदीप के इस सौदे को घाटे का सौदा करार दिया था। सुदीप आखिरकार इंडस्ट्री में अपनी Ess Dee कंपनी को दिग्गजों की फेहरिस्त में लाने में सफल हुए।

सितंबर 2017 में सुदीप दत्ता को प्रोविडेंट फंड डिफॉल्ट मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। सुदीप पर 42 लाख रुपये प्रोविंडेंट फंड बकाये का आरोप लगा था, जिसे लेकर कंपनी ने दावा किया था कि वह Kamarhati unit के कर्मचारियों को इसका भुगतान कर चुकी है। कामरहाटी यूनिट इंडिया फॉइल्स के अधिग्रहण के समय उसी का हिस्सा थी। इकोनॉमिक टाइम्स के एक पुरानी रिपोर्ट के मुताबिक पिछले वर्ष जून में दत्ता ने राज्य के वित्त मंत्री को एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने कहा था तृणमूल कांग्रेस के एक विधायक मदन मित्रा के द्वारा गुमराह किए गए कर्मचारियों का संस्था के प्रति उग्र और गैर-सहकारी नजरिया कामराहाटी इकाई के लिए हमेशा पलीते का काम करता रहा। दत्ता की समस्या तब शुरू हुई जब उन्होंने जर्मनी सरकार के साथ वित्त वर्ष 2014 में 450 करोड़ रुपये का निवेश करने के लिए सहयोग किया। कर्जदाताओं ने कम अवधि के लिए पूंजी दी लेकिन कंपनी कर्ज के जाल में फंसती चली गई और फिर सभी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट बंद हो गईं।

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