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सुब्रत राय की अर्जी नामंजूर

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सहारा प्रमुख सुब्रत राय की तत्काल सुनवाई की अर्जी शुक्रवार को नामंजूर कर दी। जिसमें राय ने अपनी बुआ के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जमानत पर रिहा किए जाने का अनुरोध किया था। राय के वकीलों ने मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू के आवास पर यह अर्जी पेश […]

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सहारा प्रमुख सुब्रत राय की तत्काल सुनवाई की अर्जी शुक्रवार को नामंजूर कर दी। जिसमें राय ने अपनी बुआ के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जमानत पर रिहा किए जाने का अनुरोध किया था।

राय के वकीलों ने मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू के आवास पर यह अर्जी पेश की। न्यायमूर्ति दत्तू ने कहा कि इसमें तत्काल सुनवाई का कोई मामला नहीं बनता है और इस पर नियमित अदालत में ही सुनवाई की जाएगी। राय ने अदालत से 15 दिन के लिए राहत मांगी थी। सहारा प्रमुख राय की बुआ का गुरुवार को लखनऊ में 90 वर्ष की आयु में देहावसान हो गया।

राय को गत बुधवार को तिहाड़ जेल में वापस उनकी कोठरी में भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें विदेश में सहारा समूह के लग्जरी होटलों के सौदों पर बातचीत के लिए जेल परिसर में ही एक वातानुकूलित जगह पर निश्चित अवधि तक रहने की छूट दी थी। अवधि पूरी होने के बाद उन्हें वापस जेल में उनकी कोठरी में भेज दिया गया। अदालत ने आठ सितंबर को राय को तिहाड़ जेल के सम्मेलन कक्ष में ठहरने की अवधि 15 दिनों के लिए बढ़ाई थी ताकि वे विदेशी संपत्तियों को बेचकर 10,000 करोड़ रुपए जुटा सकें। यह राशि सेबी के पास जमा कराई जानी है ताकि उन्हें जमानत मिल सके।

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले एक अगस्त को राय और सहारा समूह के दो निदेशकों को तिहाड़ जेल परिसर में पांच अगस्त से 10 दिन तक सुबह छह बजे से रात आठ बजे तक एसी सम्मेलन कक्ष का इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी। वहां इनकी बैठकों पर सीसीटीवी कैमरे की नजर रखी गई। उन्हें वहां वाई-फाई और वीडियो कांफ्रेंसिंग सुविधा का इस्तेमाल करने की छूट थी। उन्हें दो लैपटाप, दो डेस्क टाप, एसटीडी और आईएसडी सुविधाओं वाले लैंडलाइन फोन व एक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने की भी छूट थी। उनकी मदद के लिए लिखापढ़ी करने वाले दो लोग और तकनीकी कौशल वाले एक आदमी को रखने की भी अनुमति थी। 65 वर्षीय राय इस साल चार मार्च से तिहाड़ जेल में बंद हैं।

 

 

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