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एयर इंडिया के टाटा ग्रुप के हाथों बिकने की ख़बर पर भड़के बीजेपी सांसद, कहा- केस करूंगा, पहले भी जा चुके हैं कोर्ट

टाटा ग्रुप एयर इंडिया और अपने स्वामित्व वाली कंपनी एयर एशिया का आपस में विलय करने पर विचार कर रहा है। एयर एशिया में टाटा समूह की 51 पर्सेंट की हिस्सेदारी है। गौरतलब है कि एयर इंडिया की शुरुआत टाटा समूह ने ही 1932 में की थी।

ratan tata air indiaएयर इंडिया को टाटा ग्रुप की ओर से खरीदने की खबर पर भड़के सुब्रमण्य स्वामी

टाटा ग्रुप की ओर से एयर इंडिया को खरीदने की इच्छा जताए जाने और इस महीने के अंत तक बोली लगाने की खबर पर बीजेपी सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। स्वामी ने कहा कि यदि यह डील आगे बढ़ती है तो वह इस मामले में सरकार के बड़े लोगों के खिलाफ क्रिमिनल केस करेंगे। सुब्रमण्यन स्वामी ने ट्वीट कर टाटा ग्रुप और मलयेशियाई कंपनी के जॉइंट वेंचर वाली एयरलाइंस एयर एशिया के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी की जांच, दुबई में कथित तौर पर एक आंतकी को पेमेंट और एयर एशिया एवं विस्तार के जॉइंट वेंचर शुरू करने के लिए गलत तरीके से क्लियरेंस लेने का मुद्दा उठाया है। यही नहीं नीरा राडिया टेप का भी जिक्र करते हुए स्वामी ने इस डील के आगे बढ़ने पर केस करने की चेतावनी दी है।

बता दें कि सुब्रमण्यन स्वामी ने इस मामले में केस भी दायर किया था और एयर एशिया के इंटरनेशनल फ्लाइंग लाइसेंस को कैंसिल करने की मांग की थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक टाटा ग्रुप कर्ज में डूबी सरकारी एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया को खरीदने पर विचार कर रही है। फिलहाल कंपनी इस डील की कारोबारी संभावनाओं पर विचार कर रही है।

टाटा के प्रवक्ता ने भी पहली बार इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि हम प्रस्ताव का आकलन कर रहे हैं और सही समय पर बोली लगाने पर विचार करेंगे। हम किसी आर्थिक साझेदार को शामिल करने पर भी विचार नहीं कर रहे हैं। साफ है कि टाटा समूह अकेले ही एयर इंडिया के अधिग्रहण की ओर बढ़ना चाहता है।

इस बात की भी चर्चा है कि टाटा ग्रुप एयर इंडिया और अपने स्वामित्व वाली कंपनी एयर एशिया का आपस में विलय करने पर विचार कर रहा है। एयर एशिया में टाटा समूह की 51 पर्सेंट की हिस्सेदारी है। गौरतलब है कि एयर इंडिया की शुरुआत टाटा समूह ने ही 1932 में की थी। तब कंपनी का नाम टाटा एयरलाइंस रखा गया था। इसके बाद 1946 में दूसरे विश्व युद्ध के बाद टाटा एयरलाइंस का राष्ट्रीयकरण हो गया था और 1962 में इसे एयर इंडिया नाम मिला। अब घाटे में चल रही यह कंपनी एक बार फिर से अपने संस्थापक समूह के हाथों में जा सकती है।

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