Share Market Crash: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच बुधवार, 2 सिंतबर को शुरुआती कारोबार में गिरावट देखने को मिली। दोनों प्रमुख सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स हरे निशान पर खुले।
निफ्टी 230 अंक की गिरावट के साथ 23,820 पर ट्रेड कर रहा है। वहीं, सेंसेक्स भी 700 अंक फिसलकर 76,200 के पास कारोबार कर रहा है।
कोल इंडिया के शेयरों में 3.46% की तेजी दर्ज हुई और यह आज निफ्टी 50 का सबसे बड़ा गेनर रहा। इसके बाद सन फार्मा, ओएनजीसी, एलएंडटी, अदानी पोर्ट्स और एक्सिस बैंक समेत कई अन्य शेयर बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे।
एशियाई बाजार में गिरावट
एशिया-प्रशांत बाजारों में गिरावट देखी जा रही है। जापान का निक्केई 225 1.60% और टॉपिक्स 1.44% गिर गया। कोस्पी खुलने पर 2.87% गिरा, जबकि स्मॉल-कैप कोस्डैक 2.51% नीचे आया। हांगकांग हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स 25,176 पर था, जबकि पिछले दिन यह 25,329.73 पर बंद हुआ था।
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अमेरिकी वायदा
डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज वायदा 20 अंक गिर गया। एसएंडपी 500 वायदा और नैस्डैक 100 वायदा में भी मामूली वृद्धि हुई।
अमेरिकी बाजार
मुद्रास्फीति की चिंताओं और तेल की ऊंची कीमतों के चलते अमेरिकी शेयर बाजार मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुआ, जिससे बॉन्ड यील्ड में भी उछाल आया। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 419.02 अंक या 0.79% गिरकर 52,766.88 पर बंद हुआ। एसएंडपी 500 में 0.71% की गिरावट आई और यह 7,631.47 पर बंद हुआ, जबकि नैस्डैक कंपोजिट 1.03% गिरकर 26,099.77 पर बंद हुआ।
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क्या है गिरावट की वजह?
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद वैश्विक बाजारों में गिरावट देखी जा रही है। शुरुआती कारोबार में एशियाई बाजार दबाव में हैं। वहीं, अमेरिका द्वारा ईरान पर एक बार फिर हमला करने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 2% की उछाल आई है। जिसके चलते बाजार में शुरुआती कारोबार में गिरावट देखने को मिली।
कच्चा तेल
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स में 1.81% की तेजी आई और यह 91.58 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। वहीं, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2.2% की बढ़त के साथ लगभग 96.59 डॉलर पर कारोबार कर रहा था, जो मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण स्तर 90 डॉलर से ऊपर था। कॉमेक्स पर, कच्चे तेल की कीमतें 1.51% बढ़कर 91.58 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रही थीं।
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किसी कंपनी को जब नया प्लांट लगाना हो, कारोबार बढ़ाना हो, तो उसे बड़ी रकम की जरूरत पड़ती है। ऐसे में आमतौर पर लोगों को लगता है कि कंपनियां बैंक से लोन लेती होंगी। लेकिन हकीकत यह है कि कई बड़ी कंपनियां बैंक से कर्ज लेने के बजाय बॉन्ड जारी करके निवेशकों से पैसा जुटाती हैं।
आखिर ऐसा क्यों होता है? बॉन्ड मार्केट क्या है, यह कैसे काम करता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं…
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