Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को शुरुआती कारोबार में गिरावट देखने को मिली। आज दोनों प्रमुख सूचकांक बीएससी सेंसेक्स (Bse Sensex) और एनएससी निफ्टी (Nse Nifty) लाल निशान पर खुले। सेंसेक्स 809 अंक या 1.08% गिरकर 74,428.65 पर आ गया, जबकि निफ्टी 229 अंक या 0.97% फिसलकर 23,500 के स्तर से नीचे 23,414 पर कारोबार कर रहा था।
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक बाजारों के कमजोर रुझानों से सेंसेक्स और निफ्टी में सोमवार को शुरुआती कारोबार में यह गिरावट दर्ज की गई थी।
सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों का हाल
सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से टाटा स्टील, पावर ग्रिड, मारुति, ट्रेंट, टाइटन और एचडीएफसी बैंक के शेयर सबसे अधिक नुकसान में रहे। वहीं इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, भारती एयरटेल और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के शेयर में तेजी देखी गई।
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 1.79 प्रतिशत की बढ़त के साथ 111.2 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।
एशियाई बाजार
सोमवार को एशियाई बाजारों में गिरावट देखी गई। जापान का निक्केई सूचकांक 0.2% फिसल गया, हालांकि टॉपिक्स सूचकांक में 0.1% की मामूली बढ़त दर्ज की गई। दक्षिण कोरियाई बाजारों में अधिक गिरावट देखी गई, जहां कोस्पी और कोस्डैक दोनों 2% से अधिक गिर गए, जबकि ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 सूचकांक 0.76% गिर गया।
अमेरिकी बाजार
शुक्रवार को अमेरिकी बाज़ारों में भारी गिरावट दर्ज की गई। एसएंडपी 500 में 1.24% की गिरावट आई और यह 7,408.50 पर बंद हुआ, जबकि नैस्डैक कंपोजिट में 1.54% की गिरावट आई और यह 26,225.14 पर बंद हुआ। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में भी 537.29 अंकों की गिरावट आई, यानी 1.07% की गिरावट के साथ यह 49,526.17 पर बंद हुआ।
अमेरिकी डॉलर
अमेरिकी डॉलर सूचकांक (DXY) , जो छह विदेशी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर के मूल्य को मापता है, सोमवार सुबह 99.37 पर कारोबार कर रहा था। यह सूचकांक प्रमुख मुद्राओं की तुलना में अमेरिकी डॉलर की मजबूती या कमजोरी का मूल्यांकन करता है। इस सूचकांक में ब्रिटिश पाउंड, यूरो, स्वीडिश क्रोना, जापानी येन, स्विस फ्रैंक आदि जैसी मुद्राएं शामिल हैं।
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन शुद्ध लिवाल रहे थे और उन्होंने 1,329.17 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
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भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 4 साल बाद बढ़ोतरी देखने को मिली है। सरकारी तेल कंपनियों की ओर से ईंधन पर 3 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इसकी बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और हॉरमुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) से जुड़े हालात माने जा रहे हैं, जिसका असर वैश्विक कच्चे तेल और गैस बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। यहां पढ़ें पूरी खबर…
