पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेजी के बीच आज भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार में सपाट शुरुआत हुई। दोनों प्रमुख सूचकांक बीएससी सेंसेक्स (Bse Sensex) और एनएससी निफ्टी (Nse Nifty) हरे निशान पर खुले। सेंसेक्स 104.70 अंक या 0.14% बढ़कर 75,503.42 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 51.25 अंक या 0.22% बढ़कर 23,740.85 पर कारोबार कर रहा था।

सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों का हाल

सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, कोटक महिंद्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक, पावरग्रिड, भारती एयरटेल, टाइटन, बजाज फाइनेंस और मारुति सुजुकी इंडिया के शेयर में तेजी रही। दूसरी ओर रिलायंस इंडस्ट्रीज, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, इटर्नल, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, अल्ट्राटेक सीमेंट, महिंद्रा एंड महिंद्रा, ट्रेंट और एशियन पेंट्स के शेयर गिरावट में रहे।

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव एक प्रतिशत की तेजी के साथ 107.01 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।

पेट्रोल की कीमतों में उछाल

सरकार ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल प्रभाव से 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी, जिससे ईंधन की कीमतों में संशोधन को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया। खुदरा ईंधन की कीमतों में यह लगभग चार वर्षों में पहली वृद्धि है।

एशियाई बाजार

एशियाई बाजारों ने शुक्रवार के सत्र की सकारात्मक शुरुआत की, जिसमें अधिकांश प्रमुख सूचकांक हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। जापान का निक्केई 225 सूचकांक 0.89% बढ़ा, जबकि टॉपिक्स सूचकांक में 1.18% की बढ़त दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 0.6% से अधिक बढ़कर 8,000 के अंक को पार कर गया, जबकि स्मॉल-कैप कोस्डैक सूचकांक 0.4% फिसल गया। ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 सूचकांक भी शुरुआती कारोबार में 0.42% बढ़ा।

अमेरिकी बाजार

अमेरिकी बाजार पिछले सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए। डाउ जोन्स इंडेक्स 370 अंक या 0.75% बढ़कर 50,063.46 पर बंद हुआ। एसएंडपी 500 इंडेक्स भी 0.77% बढ़कर 7,501.24 पर स्थिर हुआ, जबकि नैस्डैक कंपोजिट इंडेक्स 0.88% बढ़कर 26,635.22 पर बंद हुआ।

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पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से दुनिया भर में तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ रहा है। शुरुआत में जितनी परेशानी की आशंका थी, अब स्थिति उससे ज्यादा गंभीर होती दिख रही है। इसका सबसे बड़ा असर भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है, जो अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल विदेशों से खरीदते हैं। यहां पढ़ें पूरी खबर…