गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार मामूली बढ़त के साथ खुले, सेंसेक्स 61.86 अंक या 0.08% बढ़कर 74,826.09 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 14.80 अंक या 0.06% बढ़कर 23,446.30 पर पहुंच गया।
सेंसेक्स शेयरों में एक्सिस बैंक ने सबसे अधिक बढ़त दर्ज की, जिसमें 0.68% की वृद्धि हुई, इसके बाद बजाज फिनसर्व में 0.62% और लार्सन एंड टुब्रो में 0.57% की वृद्धि हुई। टेक महिंद्रा और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों में भी क्रमशः 0.51% और 0.49% की वृद्धि हुई।
दूसरी ओर, महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में 0.64% की गिरावट आई, जिससे यह सूचीबद्ध शेयरों में सबसे अधिक गिरावट दर्ज करने वाला शेयर बन गया। बीईएल के शेयरों में 0.38%, टाटा स्टील के शेयरों में 0.32% और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों में 0.24% की गिरावट दर्ज की गई।
एशियाई बाजार
एशियाई बाजारों में शुरुआती कारोबार में ज्यादातर गिरावट देखी गई, जिसमें जापान का निक्केई 225 0.62%, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.24% और ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 1.36% गिर गया।
कच्चा तेल
मध्य पूर्व में तनाव के चलते आज शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों पर दबाव बना रहा। ब्रेंट क्रूड वायदा 0.62% बढ़कर 101.84 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) 1.01% बढ़कर 96.06 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
यूएस फ्यूचर्स
गुरुवार के कारोबारी सत्र से पहले अमेरिकी शेयर बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिला। डॉव से जुड़े वायदा बाजार में 54 अंकों या 0.1% की बढ़त दर्ज की गई, जबकि एसएंडपी 500 वायदा बाजार में 0.04% की मामूली वृद्धि हुई। वहीं, नैस्डैक-100 वायदा बाजार में थोड़ी गिरावट आई।
अमेरिकी 10-वर्षीय यील्ड में हुई वृद्धि
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा लंबी अवधि के सरकारी ऋणों की बड़े पैमाने पर बायबैक योजना की घोषणा के बावजूद, बुधवार को 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.857% हो गई। विभाग इस योजना को तीन गुना बढ़ाकर 6 अरब डॉलर करने की योजना बना रहा है।
एफआईआई, डीआईआई डेटा
एनएसई के आंकड़ों के अनुसार , 9 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने 583 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक खरीदार बने रहे और उन्होंने बाजार में 1,509 करोड़ रुपये का निवेश किया।
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किसी कंपनी को जब नया प्लांट लगाना हो, कारोबार बढ़ाना हो, तो उसे बड़ी रकम की जरूरत पड़ती है। ऐसे में आमतौर पर लोगों को लगता है कि कंपनियां बैंक से लोन लेती होंगी। लेकिन हकीकत यह है कि कई बड़ी कंपनियां बैंक से कर्ज लेने के बजाय बॉन्ड जारी करके निवेशकों से पैसा जुटाती हैं।
आखिर ऐसा क्यों होता है? बॉन्ड मार्केट क्या है, यह कैसे काम करता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं…
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