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लॉकडाउन से पहले का स्टॉक हुआ खत्म, कुछ दिनों में जरूरी चीजों की हो सकती है किल्लत अब माल की कमी, लेबर भी कर गई पलायन

इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि ट्रकों की लोडिंग से लेकर अनलोडिंग तक के काम के लिए लेबर की कमी हो गई है। ऐसी स्थिति में सप्लाई चेन प्रभावित हो गई है और रिटेलर्स तक माल की पहुंच मुश्किल हो रही है।

Author Edited By सूर्य प्रकाश नई दिल्ली | Updated: April 1, 2020 10:06 AM
लॉकडाउन के चलते कच्चे माल और लेबर की किल्लत से परेशान एफएमसीजी कंपनियां

प्रणव मुकुल, प्रभा राघवन, आशीष आर्यन, आंचल मैगजीन                                                                                                              लॉकडाउन से पहले स्टोर्स पर जुटाया गया सामान खत्म होने को है और नया स्टॉक ट्रकों की आवाजाही में कमी और लेबर न मिलने के चलते नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में जरूरी सामान की किल्लत भी देखने को मिल सकती है। लाखों की संख्या में मजदूरों के पलायन के चलते मैन्युफैक्चरिंग से लेकर सप्लाई तक के काम में लेबर की कमी हो गई है। इसके चलते दिग्गज एफएमसीजी कंपनियों डाबर इंडिया और हिंदुस्तान लीवर की चिंताएं बढ़ गई हैं। इसके अलावा रिटेल चेन्स के लिए भी यह चिंताएं बढ़ाने वाला है।

इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि ट्रकों की लोडिंग से लेकर अनलोडिंग तक के काम के लिए लेबर की कमी हो गई है। ऐसी स्थिति में सप्लाई चेन प्रभावित हो गई है और रिटेलर्स तक माल की पहुंच मुश्किल हो रही है। यही नहीं कच्चे माल और श्रमिकों की कमी के चलते उत्पादन तक में कमी आई है। किसी भी तरह से सामान तैयार होकर लोड भी किया जाए तो अगली समस्या ट्रकों की आवाजाही की है। दिल्ली, यूपी समेत तमाम राज्यों ने अपनी सीमाओं को एक तरह से सील कर दिया है। इसके चलते किसी माल का पहुंचना मुश्किल है, यही नहीं कच्चे माल की पहुंच भी इसके चलते प्रभावित हुई है।

हिंदुस्तान यूनिलीवर के एक सीनियर अधिकारी ने बताया, ‘आंशिक तौर पर लॉकडाउन होने के बाद से ही चीजें पूरी तरह से ठप हो चुकी थीं। बिस्किट और अन्य खाने की चीजें बनाने के लिए भी जरूरी कच्चे माल की कमी है। हैंडवॉश और सैनिटाइजर्स के लिए हमारे पास कुछ कच्चा माल था, लेकिन उत्पादन बढ़ाने के चलते अब वह भी खत्म हो चुका है।’ देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी में जल्द उत्पादन शुरू होने की संभावना नहीं हैं। यही नहीं माल की कमी और लेबर के पलायन के चलते 75 फीसदी दाल मिलों में भी काम पूरी तरह से ठप पड़ा है।

यही नहीं डाबर इंडिया और नेस्ले जैसी कंपनियों को भी शटडाउन और लेबर की कमी का सामना करना पड़ रहा है। डाबर इंडिया के एग्जिक्युटिव डायरेक्टर (ऑपरेशंस) शाहरुख खान ने कहा, ‘मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स तक पहुंचने के लिए हमने अपने वर्कर्स और स्टाफ को विशेष बसों की सुविधा दी है। हालांकि इसके बाद भी कच्चे माल और पैकेजिंग के लिए आइटम की कमी है।’

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