आख़िर क्यों एक तंगहाल कंपनी के लिए जंग लड़ रहे रिलायंस के मुकेश अंबानी और ऐमज़ॉन के जेफ बेजोस

बेजोस के तेवर तब तीखे हुए जब फ्यूचर ग्रुप ने 3.4 अरब डॉलर का एक कारोबारी समझौता रिलायंस के साथ कर लिया। कोरोना की मार की वजह से फ्यूचर ग्रुप कराह रहा था। उसे हर हाल में तुरंत आर्थिक मदद की जरूरत है। लेकिन बेजोस को ये बात रास नहीं आई और उन्होंने अर्बिटेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी।

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जेफ बेजोस औओर मुकेश अंबानी। (फाइल फोटो)

दुनिया के दो सबसे अमीर कारोबारी एक दूसरे के सामने हैं। एक ऐसी कंपनी को लेकर जो तकरीबन बीमार है। लेकिन फ्यूचर ग्रुप पर कब्जे की जद्दोजहद इतनी तीखी है कि दोनों भारत के साथ सिंगापुर में भी एक दूसरे से गुत्थमगुत्था हो चुके हैं। दोनों की लड़ाई इतनी बढ़ चुकी है कि फ्यूचर रिटेल के तीन स्वतंत्र निदेशकों को कंपीटीशन अथॉरिटी को दो चिट्ठी लिखनी पड़ गईं। उनका आरोप है कि ऐमज़ॉन ने रेगुलेटर को 2019 के निवेश को लेकर अंधेरे में रखा। उनकी इच्छा है कि अथॉरिटी सारे मामले की पड़ताल करके निवेश को रद्द करे।

दरअसल, रिलायंस के मुकेश अंबानी और ऐमज़ॉन के जेफ बेजोस के बीच की टक्कर भारत के रिटेल बाजार पर कब्जे को लेकर है। दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों के बीच तकरार की वजह हैं किशोर बियानी और उनका फ़्यूचर ग्रुप। मुकेश अंबानी के लिए ये डील इस वजह से अहम है कि तकरीबन 11 हजार स्टोर्स और एक लाख 30 हजार करोड़ रुपये की सालाना बिक्री वाली रिलायंस रिटेल अब देश की सबसे बड़ी रिटेल कंपनी है। फ़्यूचर ग्रुप के साथ यह सौदा उसे 1700 स्टोर और क़रीब 20 हजार करोड़ की आमदनी और देगा। ऐमज़ॉन के जेफ बेजोस को ये कतई गंवारा नहीं है कि भारत के बाजार पर रिलायंस का एकाधिकार हो जाए।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम के मुताबिक 2030 तक भारत, अमरीका और चीन के बाद दुनिया का सबसे बड़ा रिटेल बाजार हो जाएगा। फिलहाल देश के रिटेल कारोबार का आकार करीब 70 हजार करोड़ डॉलर है। इसके 10 साल में बढ़कर क़रीब 1.3 लाख डॉलर हो जाने का उम्मीद है। दुनिया का सबसे बड़ा ऑनलाइन रिटेलर ऐमज़ॉन इस बाजार का बड़ा हिस्सा अपनी झोली में देखना चाहता है। इसी वजह से फ़्यूचर ग्रुप के साथ एक बेजोस ने सौदा किया। पिछले साल यानी 2019 के अगस्त में ऐमज़ॉन ने फ़्यूचर ग्रुप की कंपनी फ़्यूचर कूपन्स लिमिटेड में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी।

यहां तक सब कुछ ठीक था, लेकिन बेजोस के तेवर तब तीखे हुए जब फ्यूचर ग्रुप ने 3.4 अरब डॉलर का एक कारोबारी समझौता रिलायंस के साथ कर लिया। कोरोना की मार की वजह से फ्यूचर ग्रुप कराह रहा था। उसे हर हाल में तुरंत आर्थिक मदद की जरूरत है। लेकिन बेजोस को ये बात रास नहीं आई और उन्होंने अर्बिटेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी। फ्यूचर की दिक्कत ये है कि उसका लोन मोरेटोरियम सितंबर में खत्म हो गया था। जनवरी से उसे बैंकों की किश्तें देनी होंगी।

फ्यूचर के स्वतंत्र निदेशक रविंद्र धारीवाल ने ब्लूमबर्ग क्विंट को बताया कि हमें ऐमज़ॉन ने अंधेरे में रखा। एक गैरकानूनी प्रस्तावन मानने के लिए हमारी आंखों पर पट्टी बांध की गई। हमें आखिर तक ये नहीं पता था कि फ्यूचर ग्रुप को ऐमज़ॉन चला रहा है। उधर, कंपनी की छमाही रिपोर्ट बताती है कि निदेशकों की नींद यूं ही नहीं टूटी बल्कि कंपनी की हालत ने उन्हें जगाया।

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