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क्‍वॉलिटी टेस्‍ट में फेल हुए पेप्‍सी का म‍िरिंडा, अडानी का फॉर्चून ऑइल, मैरिको का सफोला और पारले एग्रो का फ्रूटी सहित नौ उत्‍पाद

इनमें से अधिकांश कंपनियों ने या तो सरकारी जांच के तौर-तरीके पर उंगली उठाई है या फिर सैम्पल की दोबारा जांच और एनालिसिस कराने की मांग की है।

Author Updated: April 17, 2017 8:35 PM
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

दीपक पटेल

पिछले साल अप्रैल 2016 से लेकर इस साल जनवरी 2017 तक देश के अलग-अलग राज्यों राजस्थान, तमिलनाडु, हरियाणा और असम सरकार के खाद्य विभाग द्वारा कराए गए सैंपल टेस्ट में देश की बड़ी कंपनियों के 9 प्रोडक्ट क्वालिटी टेस्ट में फेल पाए गए हैं। इनमें अडाणी ग्रुप का फॉच्यून रिफाइन ऑइल, नेस्ले का बेबी फुड सेरेलैक, पेप्सिको इंडिया का मिरिंडा, मैरिको इंडिया का सफोला गोल्ड ऑइल, पारले एग्रो का मैंगो फ्रूटी, सब वे चेन का चीज और हर्बालाइफ का इनर्जी ड्रिंक भी शामिल है। इंडियन एक्सप्रेस ने सूचना का अधिकार के तहत ऐसी जानकारी इकट्ठा की है। आरटीआई में मिली जानकारी के मुताबिक मुरुगप्पा ग्रुप का पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर और हल्दीराम का आलू भुजिया भी क्वालिटी टेस्ट में फेल पाया गया है। इनमें से अधिकांश कंपनियों ने या तो सरकारी जांच के तौर-तरीके पर उंगली उठाई है या फिर सैम्पल की दोबारा जांच और एनालिसिस कराने की मांग की है।

मिरिंडा, सॉफ्ट ड्रिंक, पेप्सिको इंडिया होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड: ‘मिरिंडा’ पांच सैम्पल टेस्ट में फेल हो चुका है। पहली जांच रिपोर्ट 12 जनवरी 2017 को आई जिसमें गुड़गांव के फुड सेफ्टी ऑफिसर ने जांच में ‘मिरिंडा’ सॉफ्ट ड्रिंक को तय मानक से नीचे और असुरक्षित पाया। इस पर कार्रवाई के लिए हरियाणा के फुड एंड ड्रग कमिश्नर को लिखा गया है। पिछले साल अप्रैल, मई और अक्टूबर में भी हरियाणा सरकार के फुड एंड ड्रग डिपार्टमेंट ने ‘मिरिंडा’ को ब्रांड के अनुकूल नहीं पाया। पांचवी जांच रिपोर्ट अक्टूबर 2016 में आई, जिसमें लैब ने ‘मिरिंडा’ को असुरक्षित, मानक से निम्न और ब्रांड के प्रतिकूल पाया। आरटीआई में लैब ने यह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई कि इन जांच के बाद क्या कार्रवाई हुई। जब इंडियन एक्सप्रेस ने पेप्सिको इंडिया से बात की तो उसके प्रवक्ता ने बताया कि हमें सिर्फ एक जांच रिपोर्ट मिली है, उसकी दोबारा एनालिसिस के लिए लिखा गया है।

सेरेलैक व्हीट (नवजात आहार), नेस्ले इंडिया लिमिटेड: राजस्थान के राजसमंद जिले के चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर (सीएमएचओ) की 14 अक्टूबर, 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक क्वालिटी टेस्ट में ‘सेरेलैक’ तय मानक से निचले स्तर का पाया गया। एक्सप्रेस के आरटीआई के जवाब में सीएमएचओ ने बताया है कि ‘सेरेलैक’ टोटल प्रोटीन के क्वालिटी पारामीटर में फेल रहा है। हालांकि कार्रवाई के बारे में अधिकारी ने लिखा है कि अनुसंधान जारी है। नेस्ले इंडिया ने भी एक्सप्रेस के सवाल का कोई जवाब नहीं दिया।

फॉर्च्यून, रिफाइन ऑइल, अडाणी विल्मर लिमिटेड: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खास बताए जाने वाले उद्योगपति गौतम अडाणी की कंपनी का फॉर्च्यून रिफाइन ऑइल भी फूड डिपार्टमेंट के मापदंड पर खरा उतरने में फेल रहा है। राजस्थान के बूंदी जिले के सीएमएचओ के मुताबिक 15 जुलाई, 2016 की जांच रिपोर्ट में फॉर्च्यून ऑइल का एसिड वैल्यू मानक (0.5) से ज्यादा (0.67) पाया गया था। हालांकि, कार्रवाई के बारे में अधिकारी ने  आरटीआई के जवाब में लिखा है कि अनुसंधान जारी है।

सफोला गोल्ड (खाद्य तेल), मैरिको लिमिटेड:  राजस्थान के सवाई माधोपुर के फूड सेफ्टी ऑफिसर के मुताबिक इस तेल में भी एसिड वैल्यू मानक (0.50) से ज्यादा (1.12) पाया गया। सफोला भी जांच में घटिया क्वालिटी का पाया गया।

इनके अलावा सब वे सिस्टम इंडियन प्राइवेट लिमिटेड का प्रोसेस्ड चीज, पारले एग्रो का फ्रूटी मैंगो ड्रिंक, पैरी इन्टरप्राइजेज इंडिया का पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर, हल्दीराम का आलू भुजिया, हर्बा लाइफ का फ्रेश इनर्जी ड्रिंक भी तय मानक से निम्न स्तर का पाया गया है और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक पाया गया है।

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