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यहां सब्जी-किराने का भी होता है ऑनलाइन पेमेंट, ये हैं दुनिया के 10 सबसे बड़े कैशलेस देश

सही-गलत फैसले से इसे इतर देखें, तो भारत में कैशलेस और ऑनलाइन लेन-देन ने हमारी जिंदगी बदल दी है। ठीक वैसे ही दुनिया के कुछ और देशों में भी कैशलेस का नारा बुलंद किया गया।

Author Updated: November 10, 2017 4:05 PM
स्वीडन और नॉरवे सरीखे देशों में (फोटोः pixabay.com)

भारत में नोटबंदी को एक साल पूरा हुआ है। सरकार इसे जायज फैसला बता रही है। वहीं, विपक्षी पार्टियां इसे बहुत बड़ी गलती मान रही हैं। अर्थव्यवस्था को कैशलेस करने के उद्देश्य से सरकार ने यह फैसला लिया था। सही-गलत से इतर देखें, तो कैशलेस और ऑनलाइन लेन-देन ने हमारी जिंदगी बदल दी। ठीक वैसे ही दुनिया के कुछ और देशों में भी कैशलेस का नारा बुलंद किया गया। रेहड़ी-पटरी पर सब्जी खरीदनी हो या स्कूल की फीस चुकानी हो। सारी चीजें डिजिटल माध्यम से लोग करते हैं। ऐसे में इन देशों की अर्थव्यवस्था बिना कैश के दौड़ रही है। लोग नोटों और सिक्कों को लेकर चलने के झंझट से बचे रहते हैं। ऊपर से सरकार की नीतियां भी उन्हें ऑनलाइन निवेश और खरीद-फरोख्त करने के लिए बढ़ावा देती है। देख लीजिए, ये हैं दुनिया के वही 10 बड़े कैशलेस देश-

स्वीडनः इस देश की अर्थव्यवस्था लगभग कैशलेस है। चाहे बस का सफर हो या गिरजाघर में दान, सब कुछ कार्ड या ऑनलाइन बैंकिंग से होता है। सिर्फ तीन फीसद कैश में यहां लेन-देन होता है।

नॉर्वेः ई-बैंकिंग में दुनिया के देशों में नॉर्वे का नाम सबसे आगे है। स्ट्रीट फूड और अखबार तक यहां मोबाइल बैंकिंग से लोग खरीदते हैं। देश के सबसे बड़े बैंक ‘डीएबी’ ने पिछले साल लोगों को नकद का इस्तेमाल करने से मना किया था। कुछ बैंक यहां खाताधारकों को कैश नहीं देते।

डेनमार्कः पैसों से जुड़े लेन-देन को देश की एक तिहाई आबादी मोबाइल एप्लीकेशन ‘मोबाइल-पे’ चलाती है। कारोबारी, रेस्त्रां और पेट्रोल पंप ग्राहकों से कैश लेने से मना कर देते हैं, जो यहां वैध है। हालांकि, अस्पतालों और डाक घरों में ऐसा नहीं होता। 2030 तक यहां की सरकार पेपर मनी से छुटकारा पाना चाहती है।

बेल्जियमः देश में तकरीबन 93 फीसद लोग जहां कैशलेस लेन-देन करते हैं। वहीं, 86 फीसद के पास डेबिट कार्ड हैं। सरकार ने कैश लेन-देन की सीमा तीन हजार यूरो कर रखी है, लिहाजा लोग डिजिटल माध्यम से ही लेन-देन करते हैं।

फ्रांसः लेन-देन के लिए लोग फ्रांस में कॉन्टैक्टलेस कार्ड और मोबाइल पीओएस (प्वॉइंट ऑफ सेल) यूज करते हैं। बेल्जियम के बाद यहां की औसत 92 फीसद आबादी कैशलेस लेन-देन करती है।

ब्रिटेनः कैश ब्रिटेन के कुछ ही हिस्सों में आज लेन-देन का एकमात्र जरिया है। अन्यथा देश की औसत 89 फीसद आबादी लेन-देन और परिवहन संबंधी सेवाओं के लिए डिजिटल बैंकिंग का उपयोग करती है।

सोमालीलैंडः अफ्रीका के सबसे गरीब देशों में सोमालीलैंड गिना जाता है। फिर भी यहां के लोग विकसित देशों के मुकाबले लेन-देन में ई-बैंकिंग का ज्यादा चुनाव करते हैं। 2012 के सर्वे के मुताबिक, औसत उपभोक्ता महीने में 34 बार ट्रांजैक्शन करते हैं, जो कि दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा है।

केन्याः इस देश में अधिकांश लोग मोबाइल पर मनी ट्रांस्फर करने वाली ऐप चलाते हैं। ग्रामीण इलाकों में पैसे भेजने हों या स्कूल-कॉलेज की फीस भरनी हो, सारा काम ‘एम-पैसा’ से हो जाता है। लोगों को तनख्वाह भी यहां ऐप पर ही मिल जाती है।

कनाडाः देश की 90 फीसद आबादी कैशलेस लेन-देन करती है। जबकि 70 फीसद लोग कार्ड से पेमेंट करते हैं। ‘पेपाल कनाडा’ के सर्वे में पता लगा था कि 56 फीसद लोग यहां कैश रखने के बजाय ऑनलाइन वॉलेट को प्राथमिकता देते हैं।

दक्षिण कोरियाः द.कोरिया एशियाई देशों में कैशलेस की ओर कदम बढ़ाने वालों में से है। सरकार भी कार्ड और ऑनलाइन पेमेंट करने वालों पर नकद भुगतान करने वालों के मुकाबले कम वैट लगाती है।

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