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टैक्स कलेक्शन के मोर्चे पर भी सुस्ती, प्रत्यक्ष कर संग्रह अनुमान से 12% कम, GST संग्रह भी सिर्फ 12 फीसदी

सिर्फ सितंबर 2019 में जीएसटी संग्रह घटकर 19 महीने के निचले स्तर 91,916 करोड़ रुपये पर रह गया। जीएसटी संग्रह में लगातार दूसरे महीने सुस्ती रही है, जबकि सरकार ने कर दरों में इस दौरान कोई बदलाव नहीं किया है।

Author नई दिल्ली | Published on: October 14, 2019 3:29 PM
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Freepik)

देश में आर्थिक मंदी के बीच कर संग्रह में भी सुस्ती का दौर जारी है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक प्रत्यक्ष कर और अप्रत्यक्ष कर, दोनों ही मोर्चों पर सरकार को राजस्व संग्रह में वर्ष 2019-20 के कर संग्रह अनुमान से कम सफलता मिल रही है। ‘द प्रिंट’ के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष में प्रत्यक्ष कर संग्रह बजट अनुमान से 12 फीसदी कम हुआ है। यानी बजट अनुमान 17 फीसदी की जगह प्रत्यक्ष कर संग्रह धीमी गति से मात्र पांच फीसदी की दर को ही पा सका है। उधर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कलेक्शन भी मात्र 12 फीसदी की दर से बढ़ रहा है जबकि बजट अनुमान 15 फीसदी का है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि जीएसटी कलेक्शन में पहली बार बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स के डेटा से पता चलता है कि अप्रैल से अगस्त के बीच प्रत्यक्ष कर संग्रह वर्ष के लिए कुल बजटीय कर संग्रह का केवल 21 प्रतिशत था,जो 2.76 लाख करोड़ रुपये है। 15 सितंबर को आए अग्रिम कर संग्रह ने भी इसमें कोई मदद नहीं की है। इस तारीख (15 सितंबर) तक प्रत्यक्ष कर संग्रह 4.4 लाख करोड़ रुपये हुआ जो बजटीय लक्ष्यों का केवल 33 प्रतिशत ही है। वर्ष के पहले छह महीनों में जीएसटी संग्रह भी लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये रहा है। यह 5.26 लाख करोड़ रुपये के लक्षित बजट के 50 फीसदी से भी कम है।

सिर्फ सितंबर 2019 में जीएसटी संग्रह घटकर 19 महीने के निचले स्तर 91,916 करोड़ रुपये पर रह गया। जीएसटी संग्रह में लगातार दूसरे महीने सुस्ती रही है, जबकि सरकार ने कर दरों में इस दौरान कोई बदलाव नहीं किया है। जीएसटी कलेक्शन में गिरावट को देखते हुए सरकार ने राजस्व प्राप्ति बढ़ाने सहित इसकी व्यापक रूप से समीक्षा कर जरूरी सुझाव देने को लेकर एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति की पहली बैठक मंगलवार (15 अक्टूबर) को होगी।

जीएसटी परिषद के विशेष सचिव राजीव रंजन ने कहा, ‘‘समिति की पहली बैठक मंगलवार यानी 15 अक्टूबर को होगी।’’ उन्होंने कहा कि समिति को रिपोर्ट सौंपने के लिये 15 दिन का समय दिया गया है। सरकार ने पिछले सप्ताह इस समिति का गठन किया है। समिति को जीएसटी के तहत राजस्व संग्रह बढ़ाने तथा कर चोरी रोकने के उपायों पर सुझाव देने का काम दिया गया है। एक जुलाई 2017 को शुरुआत होने के बाद जीएसटी की यह पहली व्यापक समीक्षा होगी।

सरकार ने जीएसटी संग्रह तथा इसके प्रशासन को दुरुस्त करने के उपायों पर सुझाव देने के लिये अधिकारियों की 12 सदस्यीय एक समिति गठित की है। समिति को राजस्व प्राप्ति में आ रही गिरावट को रोकने और राजस्व संग्रह बढ़ाने के बारे में आवश्यक उपायों के बारे में सुझाव देने को कहा गया है। समिति के गठन की शर्तों में जीएसटी का दुरुपयोग रोकने के उपायों तथा स्वैच्छिक अनुपालन में सुधार के कदमों समेत जीएसटी में संरचनात्मक बदलावों के बारे में सुझाव देना है। समिति को कर आधार बढ़ाने के उपायों के बारे में भी सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गयी है।

आदेश में कहा गया कि कानून में नीतिगत उपायों तथा संबंधित बदलावों की जरूरत है। आंकड़ों के बेहतर विश्लेषण तथा बेहतर प्रशासनिक समन्वय के जरिये अनुपालन की बेहतर निगरानी तथा अपवंचना रोधी उपायों का सुझाव देना भी गठन की शर्तों में शामिल है। समिति के सदस्यों में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पंजाब के जीएसटी आयुक्त, इसके अलावा केन्द्र सरकार से जीएसटी प्रधान आयुक्त और संयुक्त सचिव (राजस्व) सहित कुछ अन्य अधिकारी शामिल हैं। राज्यों से कहा गया है कि वह समिति में शामिल होने के साथ साथ लिखित में सुझाव भी दे सकते हैं। (भाषा इनपुट्स के साथ)

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