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ऑटो हब पुणे में इंजीनियर बेचते हैं पान, अधिकांश सीवी लेकर कंपनियों के लगाते हैं चक्कर

पुणे ऑटोमोबाइल हब माना जाता है, जिसमें पुणे, पिंपरी चिंचवाड़, तालेगांव और चाकन के इलाके आते हैं। इस ऑटोमोबाइल हब में कई बड़ी कंपनियों के मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट हैं। इनमें टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्र, बजाज और वॉक्सवैगन शामिल है।

Author नई दिल्ली | Published on: September 13, 2019 12:07 PM
ऑटो सेक्टर में छायी मंदी के चलते बीते दिनों में कई लोगों ने अपनी नौकरियां गवांयी हैं।

ऑटो सेक्टर में छायी मंदी का असर इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों पर सीधे तौर पर पड़ा है। हालात ये हैं कि कुछ समय पहले तक बड़ी-बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों में जॉब कर रहे लोग, मंदी के कारण नौकरी छूटने के बाद अब छोटे-मोटे काम या नौकरी करने को मजबूर हैं। ऐसा ही एक शख्स हैं शाहरुख शेख, जो कि पुणे के भोसारी इलाके में रहता है। बीटेक ग्रेजुएट शाहरुख दो महीने पहले तक पुणे के चाकन इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित ऑटोमोबाइल कंपनी में जॉब करता था।

दो माह पहले कंपनी ने शाहरुख शेख का कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाने से इंकार कर दिया। हालांकि शाहरुख ने फिर भी हौंसला नहीं खोया और उसने करीब 60 कंपनियों में अपना रिज्यूमे भेजा, लेकिन किसी भी कंपनी में शाहरुख को नौकरी नहीं मिल सकी। अब शाहरुख भोसारी बाजार में एक पान की दुकान चलाते हैं, जिसे पहले उनकी मां चलाती थी। शाहरुख ने बताया कि करीब 350 अन्य कॉन्ट्रैक्ट वर्करों को भी कंपनी ने नौकरी से निकाला है।

द प्रिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, तुषार सुर्वदे नामक एक मैकेनिकल इंजीनियर युवक ने हाल ही में अपनी डिग्री पूरी की है और अब वह अपने चार दोस्तों के साथ महाराष्ट्र के सबसे बड़े ऑटो सेक्टर सेंटर पुणे में नौकरी की तलाश कर रहा है। सुर्वदे का कहना है कि कई कंपनियों ने उनका रिज्यूमे लेने से ही इंकार कर दिया है। कंपनियों का कहना है कि वह अपने स्टाफ में कटौती कर रहे हैं।

बता दें कि पुणे ऑटोमोबाइल हब माना जाता है, जिसमें पुणे, पिंपरी चिंचवाड़, तालेगांव और चाकन के इलाके आते हैं। इस ऑटोमोबाइल हब में कई बड़ी कंपनियों के मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट हैं। इनमें टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्र, बजाज और वॉक्सवैगन शामिल है।

उल्लेखनीय है कि भारत में ऑटो सेक्टर लंबे समय से मंदी झेल रहा है। जुलाई माह में वाहनों की बिक्री पिछले 20 सालों के दौरान सबसे कम रही। इसके चलते ऑटोमोबाइल कंपनियों को अपनी मैन्यूफैक्चरिंग में कटौती करनी बड़ी। फैक्ट्रियां बंद हुई और बड़ी संख्या में लोगों की नौकरियां चली गई हैं। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स (SIAM) के आंकड़ों के अनुसार, इंडस्ट्री में 15,000 टेम्पररी लोगों की नौकरी छूट गई है।

इंडस्ट्री बॉडी ऑटोमेटिव कंपोनेंट्स मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA) के अनुसार, प्रोडक्शन में 15-20 प्रतिशत की कमी आयी है। इसके चलते करीब 10 लाख नौकरियों पर संकट आया है। 3 लाख लोगों की नौकरियां इसलिए छूट गई हैं, क्योंकि ऑटो डीलरशिप बंद हो रही हैं।

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