Supreme Court quashes Singur Tata plant land acquisition - Jansatta
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टाटा के सिंगूर प्‍लांट के जमीन अधिग्रहण को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द, कहा- 12 हफ्तों में किसानों को वापस लौटाएं जमीन

विवाद मचने के बाद, टाटा ने 2008 में अपनी नैनो फैक्‍ट्री को कहीं और लगाने की प्रक्रिया शुरू की।‍

टाटा नैनो के लिए अधिग्रहण के बाद बंद पड़ा सिंगुर वह स्थान जहां प्लांट लगाया जाना था। (Source: EXPRESS ARCHIVE)

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के सिंगूर में टाटा को दी गई जमीन का आवंटन रद कर दिया है। टाटा को यह जमीन नैनो कार फैक्‍ट्री लगाने के लिए 2006 में बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्‍व वाली सीपीएम सरकार ने दी थी। अदालत ने फैसला दिया है कि अधिग्रहण ”सार्वजनिक उद्देश्‍य’ के लिए नहीं किया गया था, इसलिए 12 हफ्तों के भीतर किसानों को उनकी जमीन वापस लौटा दी जानी चाहिए। जिन किसानों को सरकार की तरफ से मुआवजा मिल चुका है, वे मुआवजा वापस नहीं लौटाएंगे क्‍योंकि पिछले 10 साल से उनके पास आजीविका का कोई स्रोत नहीं था। शीर्ष अदालत का यह फैसला ममता बनर्जी और टीएमसी के लिए बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने टाटा फैक्‍ट्री के लिए जमीन दिए जाने के खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शनों का नेतृत्‍व किया था।

कलकत्‍ता हाईकोर्ट के अधिग्रहण जारी रखने के निर्णय को पलटते हुए, सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने फैसला दिया कि अधिग्रहण कई आधार पर कानून के मुताबिक नहीं था। अदालत ने यह भी कहा कि किसानों से ली गई जमीन को एक कार प्‍लांट के लिए देना ‘सार्वजनिक उद्देश्‍य’ की परिधि में नहीं आता। कानून को चुनौती देते हुए टाटा मोटर्स ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। जमीन के अधिग्रहण को ट्रायल कोर्ट ने सही ठहराया था और तृणमूल कांग्रेस सरकार द्वारा पास किए गए कानून को अपील के बाद असंवैधानिक करार दे दिया गया था। विवाद मचने के बाद, टाटा ने 2008 में अपनी नैनो फैक्‍ट्री को कहीं और लगाने की प्रक्रिया शुरू की।‍ जिसके बाद गुजरात के तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने राज्‍य में फैक्‍ट्री लगाने का न्‍योता दिया। अब नैनो कार गुजरात के सानंद में बनती हैं।

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