Share Market Crash, US-Israel Iran War:सोमवार (9 मार्च 2026) को हफ्ते की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए भारी गिरावट के साथ हुई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इजरायल-ईरान के बीच युद्ध की आशंकाओं ने दुनियाभर के बाजारों में हलचल मचा दी है। इसका सीधा असर भारत के बाजार पर भी दिखा। दोनों प्रमुख सूचकांक बाजार खुलते ही लुढ़क गए। शुरुआती कारोबार में Nifty 50 करीब 500 से ज्यादा अंक जबकि BSE Sensex 1800 से ज्यादा अंक लुढ़क गया। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। बढ़ती जियो-पॉलिटिकल टेंशन के बीच बाजार में बिकवाली हावी है और निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं।
बाजार खुलने के चंद मिनटों बाद ही यह गिरावट और तेज हो गई और निफ्टी 700 से ज्यादा व सेंसेक्स 2300 से ज्यादा अंक लुढ़ककर कारोबार करता दिखा।
यहां तक कि व्यापक सूचकांक भी 2% से अधिक की गिरावट के साथ खुले। निफ्टी बैंक 1,550 अंक या 2.68% गिरकर 56,234 पर खुला जबकि निफ्टी मिडकैप 100 1,238 अंक या 2.16% गिरकर 56,155 पर खुला।
कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल
114 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंची कच्चे तेल की कीमतों का कई शेयरों पर व्यापक असर पड़ रहा है। खासकर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को इस तेज उछाल का बड़ा झटका लग सकता है।
ईरान युद्ध तेज होने के बीच कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति डॉलर के पार शिकागो, नौ मार्च (एपी) ईरान युद्ध तेज होने के बीच तेल के दाम 2022 के बाद से पहली बार 114 डॉलर प्रति बैरल हो गए। अंतरराष्ट्रीय मानक वाले ब्रेंट कच्चे तेल का दाम 114 डॉलर प्रति बैरल हो गया है जो शुक्रवार की तुलना में 23 प्रतिशत अधिक है। शुक्रवार को तेल का दाम 92.69 डॉलर प्रति बैरल था। ईरान युद्ध के दूसरे हफ्ते भी जारी रहने से कई देश और स्थान उसकी अपनी चपेट में आ गये हैं, जिसके कारण तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। फारस की खाड़ी में ये वे देश एवं स्थान हैं जो तेल व गैस के उत्पादन तथा परिवहन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
ताजा Nomura रिपोर्ट के अनुसार, “कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और डीजल क्रैक स्प्रेड बढ़ने के कारण ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के फ्यूल मार्केटिंग मार्जिन पर भारी असर पड़ा है और यह जुलाई 2022 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं।”
रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा समय में औसत (ब्लेंडेड) मार्केटिंग मार्जिन लगभग 19.8 रुपये प्रति लीटर के नुकसान पर है। रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL) के लिए इंटीग्रेटेड मार्जिन नेगेटिव हो सकते हैं क्योंकि कंपनी की फ्यूल मार्केटिंग वॉल्यूम में हिस्सेदारी ज्यादा है और इस सेगमेंट में मार्जिन फिलहाल काफी कमजोर हैं। हालांकि इसके बावजूद Nomura ने HPCL के शेयर पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है।
विश्लेषकों ने कहा कि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी निवेशक धारणा पर असर डाला है। बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 2,345.89 अंक यानी 2.97 प्रतिशत गिरकर 76,573.01 अंक पर आ गया। वहीं, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 708.75 अंक यानी 2.89 प्रतिशत टूटकर 23,741.70 पर कारोबार कर रहा था।
सेंसेक्स में शामिल सभी 30 कंपनियों के शेयर गिरावट में कारोबार कर रहे थे। इंटरग्लोब एविएशन के शेयर करीब आठ प्रतिशत तक लुढ़क गए। टाटा स्टील, मारुति, भारतीय स्टेट बैंक, एटरनल, एशियन पेंट्स और आईसीआईसीआई बैंक में भी खासी गिरावट देखी गई। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में बड़ा उछाल दर्ज किया गया। वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड 23.63 प्रतिशत बढ़कर 114.59 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा, “ब्रेंट क्रूड के 115 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच जाने से वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं और बाजारों को बड़ा झटका लगा है। यदि पश्चिम एशिया का संघर्ष लंबा खिंचता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर इसका नकारात्मक असर पड़ेगा।”
एशिया के अन्य बाजारों में भी भारी गिरावट रही। दक्षिण कोरिया का सूचकांक कॉस्पी सात प्रतिशत से अधिक टूट गया, जबकि जापान का निक्की करीब 6.5 प्रतिशत गिरा। चीन का शंघाई कंपोजिट और हॉन्ग कॉन्ग का हैंगसेंग भी नुकसान में रहे। अमेरिकी शेयर बाजार शुक्रवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को 6,030.38 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे थे जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 6,971.51 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। इससे पहले शुक्रवार को सेंसेक्स 1,097 अंक गिरकर 78,918.90 अंक और निफ्टी 315.45 अंक गिरकर 24,450.45 पर रहा था।
