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आंकड़ों के हिसाब से महंगाई घटी

नई दिल्ली। खाद्य कीमतों में गिरावट से थोक मूल्यों पर आधारित मुद्रास्फीति सितंबर में घट कर 2.38 फीसद रह गई, जो पांच साल का न्यूनतम स्तर है। मुद्रास्फीति का दबाव कम होने से रिजर्व बैंक के लिए ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश बनी है, ताकि मांग और औद्योगिक वृद्धि बढ़ाई जा सके। थोक मूल्य […]

नई दिल्ली। खाद्य कीमतों में गिरावट से थोक मूल्यों पर आधारित मुद्रास्फीति सितंबर में घट कर 2.38 फीसद रह गई, जो पांच साल का न्यूनतम स्तर है। मुद्रास्फीति का दबाव कम होने से रिजर्व बैंक के लिए ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश बनी है, ताकि मांग और औद्योगिक वृद्धि बढ़ाई जा सके। थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अगस्त में 3.74 फीसद और पिछले साल सितंबर में 7.05 फीसद थी। मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक थोक खाद्य मुद्रास्फीति सितंबर में 33 महीने के न्यूनतम स्तर 3.52 फीसद पर आ गई। खाद्य मुद्रास्फीति में गिरावट का बने रहना आम आदमी और नीति-निर्माताओं के लिए बड़ी राहत की बात है।

थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति में लगातार चौथे महीने गिरावट दर्ज की गई है। इससे पहले जारी खुदरा मूल्य आधारित आंकड़ों पर आधारित मुद्रास्फीति सितंबर में 6.46 फीसद के स्तर पर आ गई, जो एक रिकार्ड है। प्याज का थोक मूल्य सालाना आधार पर 58.12 फीसद घटा है। पिछले महीने यह सालाना आधार पर 44.7 फीसद कम था। सब्जियों की कीमत सितंबर में सालाना आधार पर 14.98 फीसद घटी। जबकि आलू की कीमत 90.23 फीसद ऊंची रही। पिछले महीने आलू एक साल पहले की तुलना में 61.61 फीसद महंगा चल रहा था।

उद्योग मंडल सीआइआइ ने कहा कि आने वाले दिनों में अन्य कारकों के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर जिंसों की कीमत में गिरावट से मुद्रास्फीति पर नियंत्रण में और मदद मिलनी चाहिए। सीआइआइ ने कहा कि इससे आरबीआइ को अपने ब्याज दरों पर सतर्क रवैये की समीक्षा का मौका मिलेगा। जबकि फिक्की ने कहा कि मुद्रास्फीति में गिरावट का आधार विस्तृत हो रहा है और संकेत है कि मुद्रास्फीति दबाव खत्म हो रहा है। उद्योग मंडल ने कहा कि कीमतें हल्की बने रहने की उम्मीद है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आरबीआई के लक्षित ब्याज दर के अनुरूप चल रहा है और इससे राहत की थोड़ी गुंजाइश बननी चाहिए।

रिजर्व बैंक ने जनवरी से ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखा है और मौद्रिक नीति की अगली समीक्षा दो दिसंबर को होनी है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमत घटने के बीच डीजल और पेट्रोल की कीमत घट सकती है, जिससे मुद्रास्फीतिक दबाव और घटने की उम्मीद है। रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति तय करते हुए मुख्य तौर पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआइ) आधारित मुद्रास्फीति को ध्यान में रखता है। केंद्रीय बैंक ने जनवरी 2015 तक आठ फीसद और जनवरी 2016 तक छह फीसद खुदरा मुद्रास्फीति का लक्ष्य रखा है।

आंकड़ों से स्पष्ट है कि दूध, अंडा, मांस और मछली की मुद्रास्फीति में गिरावट सितंबर में भी जारी रही। हालांकि इस अवधि में फलों की कीमतों में बढ़ोतरी में आंशिक वृद्धि हुई। चीनी, खाद्य तेल, पेय और सीमेंट जैसे विनिर्मित उत्पादों में सितंबर में मुद्रास्फीति घट कर 2.84 फीसद रह गई, जो पिछले महीने 3.45 फीसद थी।

एक अन्य उद्योग मंडल पीएचडीसीसीआइ ने कहा कि उसे आने वाले दिनों में आरबीआइ से मुख्य दरों में कमी किए जाने की उम्मीद है। पीएचडीसीसीआइ ने कहा -हमारा मानना है कि औद्योगिक वृद्धि सुधार और मांग बढ़ाने के लिए रेपो दर में कटौती अनिवार्य है। मांग के हालात में सुधार से निवेश रुझान में बेहतरी का रास्ता साफ होगा। र्इंधन और ऊर्जा खंड जिसमें एलपीजी, पेट्रोल और डीजल शामिल हैं, में मुद्रास्फीति घट कर 1.33 फीसद रह गई जो अगस्त में 4.54 फीसद रही।

इस बीच जुलाई के लिए थोक मूल्य मुद्रास्फीति का आंकड़ा संशोधित कर 5.41 फीसद कर दिया गया, जो अस्थाई आकलन के मुताबिक 5.19 फीसद था। चालू वित्त वर्ष में सितंबर की अवधि तक औसत मुद्रास्फीति 2.61 फीसद रही। जो 2013-14 की इसी अवधि में 6.23 फीसद थी।

 

 

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