भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों हरे रंग के निशान पर खुले। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 921.30 अंक यानी करीब 1.25 फीसदी की छलांग लगाकर 74,753.85 अंक पर पहुंच गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 50 भी 254.20 अंक की तेजी के साथ 23417.25 अंक पर कारोबार करता दिखा।

विश्लेषकों के मुताबिक, वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और चुनिंदा दिग्गज शेयरों में खरीदारी के चलते बाजार में यह तेजी देखने को मिली। बैंकिंग, आईटी और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों ने बढ़त का नेतृत्व किया जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ।

एशियाई बाजार

वॉल स्ट्रीट में रातभर आई तेजी के बाद शुक्रवार को एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शेयर बाजार बढ़त के साथ खुले। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) शुरुआती कारोबार में 7.01% चढ़ गया जबकि स्मॉल-कैप कोसडैक (Kosdaq) में 3.25% की बढ़त दर्ज की गई। जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) 3.4% मजबूत हुआ वहीं टॉपिक्स (Topix) 1.8% ऊपर कारोबार करता दिखा। हॉन्ग कॉन्ग के हैंग सेंग इंडेक्स (Hang Seng Index) के फ्यूचर्स 24,376 पर रहे जो इसके पिछले बंद स्तर 24,249.29 से अधिक है।

अमेरिकी बाजार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस संकेत के बाद कि अमेरिका और ईरान जल्द ही शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। शुक्रवार को अमेरिकी प्रमुख सूचकांकों के फ्यूचर्स में तेजी देखने को मिली। एसएंडपी 500 (S&P 500) फ्यूचर्स में करीब 0.2% की बढ़त दर्ज की गई, जबकि नैस्डैक 100 (Nasdaq 100) फ्यूचर्स भी 0.2% चढ़े। वहीं, डॉव जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज (Dow Jones Industrial Average) से जुड़े फ्यूचर्स 59 अंक यानी 0.1% मजबूत हुए।

इसके अलावा, वॉल स्ट्रीट की नजर आज होने वाली स्पेसएक्स (SpaceX) की ऐतिहासिक आईपीओ लिस्टिंग पर भी टिकी हुई है।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार सुबह गिरावट देखने को मिली। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स तेज गिरावट के साथ 86.49 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करते दिखे। वहीं अगस्त डिलीवरी वाले ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 89.20 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए जो मनोवैज्ञानिक रूप से अहम 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे है।

हालांकि, कॉमेक्स (COMEX) पर कच्चे तेल की कीमतों में 1.40 फीसदी की तेजी दर्ज की गई और यह 89.20 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। तेल की कीमतों में यह उतार-चढ़ाव वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और मांग-आपूर्ति से जुड़े संकेतों के बीच निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है।