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SBI ने ठंडे बस्ते में डाला 76000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज! RTI में हुआ खुलासा

आमतौर पर बैंक की तरफ से जो लोन वसूल नहीं किया जा सकता है उसे राइट ऑफ कर दिया जाता है। इसका उद्देश्य बैलेंसशीट को दुरुस्त करना होता है। राइट ऑफ करने से लोन वसूली की प्रक्रिया रुकती नहीं है।

SBI, Bad Loan, loan written off, defaulters, 76600 crore, PNB, RBI, SBI data, RTI, CNN-News 18, business news, business news in hindi, india news, Hindi news, news in Hindi, latest news, today news in Hindiस्टेट बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से अपने खातों को दुरुस्त करने के लिये यह कदम उठाया गया है। (फाइल फोटो)

देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 76600 करोड़ रुपये के बैड लोन को राइट ऑफ कर दिया है। ये लोन 220 लोगों ने लिए थे जो अब इसे नहीं चुका रहे हैं। इनमें से प्रत्येक के ऊपर 100 करोड़ से अधिक का लोन है। सीएनएन-न्यूज 18 की खबर के अनुसार यह जानकारी आरटीआई से मिली है।

31 मार्च 2019 को एसबीआई 33 उधारकर्ताओं से 37,700 करोड़ रुपये रिकवर नहीं कर सकी। इनमें से प्रत्येक उधारकर्ता के ऊपर 500 करोड़ या इससे अधिक का लोन था। खबर के अनुसार बैंक ने अपने बैड लोन को 100 करोड़ से अधिक और 500 करोड़ से अधिक कैटेगरी के दो ग्रुप में बांटा।

बैंक की तरफ से 100 करोड़ से अधिक लोन लेने वालों का कुल 2.75 लाख करोड़ रुपये के लोन को रिटन ऑफ किया गया। हालिया आंकड़ों से यह खुलासा हुआ कि 500 करोड़ से अधिक का लोन लेने वालों के 67,600 करोड़ रुपये का लोन को बैड डेट घोषित किया गया।

31 मार्च 2019 तक एसबीआई ने 500 करोड़ या इससे अधिक लोन लेने वाले 33 उधारकर्ताओं के 37700 करोड़ रुपये के लोन को वसूली नहीं होने योग्य बकाया रकम घोषित की थी। इसके साथ ही बैंक ने 980 उधारकर्ताओं जिन्होंने 100 करोड़ से अधिक का लोन लिया था, को राइट ऑफ कर दिया है।

बैड लोन को राइट ऑफ करने वाला एसबीआई एकमात्र बैंक नहीं है। 31 मार्च को पंजाब नेशनल बैंक ने भी 94 उधारकर्ताओं के 27,024 करोड़ रुपये का लोन राइट ऑफ किया। पीएनबी ने 500 करोड़ रुपये से अधिक का लोन लेने वाले 12 बड़े डिफाल्टर्स का 9037 करोड़ रुपये का लोन भी राइट ऑफ किया। आमतौर पर बैंक की तरफ से जो लोन वसूल नहीं किया जा सकता है उसे राइट ऑफ कर दिया जाता है। इसका उद्देश्य बैलेंसशीट को दुरुस्त करना होता है।

राइट ऑफ करने से लोन वसूली की प्रक्रिया रुकती नहीं है। इसमें पैसा लौटने की उम्मीद बनी रहती है। इसके अतिरिक्त बैंक भविष्य में कानूनी तरीके से राइट ऑफ किए गए कर्ज की वसूली के लिए स्वतंत्र रहता है।

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