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महंगाई की मार के बीच रोजगार क्षेत्र में और बढ़ेगी ‘मार’, SBI रिसर्च रिपोर्ट में दावा- 2020 में कम पैदा होंगी 16 लाख नौकरियां

रिपोर्ट के अनुसार असम, बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में नौकरी मजदूरी के लिए बाहर गए व्यक्तियों की ओर से घर भेजे जाने वाले धन में कमी आयी है।

Author Edited By रवि रंजन नई दिल्ली | Updated: January 14, 2020 11:51 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

महंगाई की मार के बीच रोजगार क्षेत्र में ‘मार’ और बढ़ेगी। वित्त वर्ष 2020 में कम नौकरियां मिल सकती हैं। ये वैसी नौकरियां हैं जो पे-रोल के आंकड़ों पर आधारित होती हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के एक रिसर्च नोट के अनुसार 2019-20 में नए पे-रोल के आधार पर 2018 की तुलना में 20 प्रतिशत नौकरियां कम हो सकती है। ईपीएफओ सितंबर 2017 के बाद से संशोधित पे-रोल डेटा जारी कर रहा है, जिसमें नौकरी छोड़ चुके हैं और फिर से नौकरी ज्वाइन किए लोगों को शामिल किया गया है। एसबीआई के मुख्य आर्थिक सलाहकार एस के घोष ने कहा कि ईपीएफओ डेटा सही तस्वीर नहीं दिखा सकता है।

द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईपीएफओ के आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 20 के लिए वार्षिक नए नामांकन 106.2 लाख करोड़ हो सकते हैं। वहीं एसबीआई रिसर्च टीम की गणना बताती है कि नए पे-रोल के आधार पर यह संख्या 73.9 लाख हो सकती है।पिछले वित्त वर्ष में कुल 89.7 लाख रोजगार के अवसर पैदा हुए थे। यह ईपीएफओ के 2018 में जारी आंकड़े से 21 प्रतिशत या 15.8 लाख कम हो सकती है। सरकार ने पहली बार ईपीएफओ, ईएसआईसी और एनपीएस के रिकॉर्ड का उपयोग करके अप्रैल 2017 से अप्रैल 2017 के लिए मासिक पे-रोल डेटा प्रकाशित करना शुरू किया था।

एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट इकोरैप के अनुसार असम , बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में नौकरी मजदूरी के लिए बाहर गए व्यक्तियों की ओर से घर भेजे जाने वाले धन में कमी आयी है। यह दर्शाता है कि ठेका श्रमिकों की संख्या कम हुई है। इन राज्यों के लिए मजदूरी के लिए पंजाब , गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में जाते हैं और वहां से घर पैसा भेजते रहते हैं।

ईपीएफओ के आंकड़े में मुख्य रूप से कम वेतन वाली नौकरियां शामिल होती हैं जिनमें वेतन की अधिकत सीमा 15,000 रुपये मासिक है। रिपोर्ट में की गई गणना के अनुसार अप्रैल-अक्टूबर के दौरान शुद्ध रूप से ईपीएफओ के साथ 43.1 लाख नए अंशधारक जुड़े। सालाना आधार पर यह आंकड़ा 73.9 लाख बैठेगा।

हालांकि इन ईपीएफओ में केंद्र और राज्य सरकार की नौकरियों और निजी काम-धंधे में लगे लोगों के आंकड़े शामिल नहीं है। 2004 से ये आंकड़े राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) के तहत स्थानांतरित कर दिए गए हैं। रपट के मुताबिक रोजगार के एनपीएस की श्रेणी के आंकड़ों में भी राज्य और केंद्र सरकार में भी मौजूदा रुझानों के अनुसार 2018-19 की तुलना में चालू वित्त वर्ष में 39,000 कम अवसर श्रृजित होने का अनुमान है। (भाषा इनपुट के साथ)

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