SBI Research Prelude to RBI MPC Meeting : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक बुधवार 4 फरवरी को शुरू हो चुकी है और 6 फरवरी 2026 तक चलेगी। यह वित्त वर्ष 2025-26 में आरबीआई MPC की अंतिम बैठक होगी, जिसमें लिए गए फैसलों की जानकारी 6 फरवरी को दी जाएगी। फिलहाल आम निवेशकों के मन में इस बैठक से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रिजर्व बैंक इस बार फिर से ब्याज दरों में कटौती का फैसला करेगा? या फिर कोई और फैसला लिया जाएगा। बहरहाल, आरबीआई के फैसले की जानकारी तो रिजर्व बैंक के गवर्नर की 6 फरवरी को होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही दी जाएगी, लेकिन उससे पहले एसबीआई रिसर्च (SBI Research) ने इस बैठक में लिए जाने वाले फैसलों के बारे में अपना ताजा अनुमान जारी किया है।
SBI रिसर्च की इस रिपोर्ट के मुताबिक रिजर्व बैंक के इस बार अपनी समीक्षा बैठक में “स्टेटस-क्वो” (status-quo) यानी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का रास्ता अपना सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक RBI के इस संभावित फैसले की वजह अंतरराष्ट्रीय हालात, रुपये की चाल और महंगाई के मौजूदा और नए संभावित आंकड़े हो सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय हालात और ट्रेड डील का असर
एसबीआई रिसर्च का कहना है कि हाल में अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील (US India Trade Deal) के बाद भारत पर लगने वाला टैरिफ 50 फीसदी से घटकर 18 फीसदी रह गया है। इससे पहले यूरोप के साथ भी अहम व्यापार समझौता किया जा चुका है, जिससे भारतीय एक्सपोर्ट को फायदा होगा। हालांकि अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को लेकर असमंजस अब भी बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक जियो-इकोनॉमिक स्ट्रेस इंडेक्स यह दिखाता है कि ज्यादा अनिश्चितता होने का असर 3 से 4 महीने बाद आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे माहौल में आरबीआई बहुत एग्रेसिव ढंग से फैसला करने से बच सकता है।
महंगाई के आंकड़े क्या दिखा रहे हैं
रिपोर्ट में बताया गया है कि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) यानी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के नए वेटेज के साथ महंगाई के आंकड़े थोड़े ऊपर जा सकते हैं। अनुमान है कि मार्च 2026 तक महंगाई 2.4 से 2.5 फीसदी के दायरे में रह सकती है, जबकि पूरे वित्त वर्ष का औसत करीब 1.8 फीसदी रहने की संभावना है। दिलचस्प बात यह है कि पिछले कई महीनों से फूड इंफ्लेशन यानी खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर निगेटिव दायरे में रही है। लेकिन नए वेटेज के हिसाब से खुदरा महंगाई दर (CPI) में 20 से 30 बेसिस प्वाइंट की हल्की बढ़त दिख सकती है।
रुपये की चाल और अंतरराष्ट्रीय संकेत
पिछले दो महीनों में रुपया डॉलर के मुकाबले 89 से 92 के बीच झूलता रहा है। अप्रैल 2025 में अमेरिका के बढ़े हुए टैरिफ की घोषणा के बाद रुपया करीब 5.8 फीसदी तक कमजोर हुआ था, हालांकि ट्रेड डील के बाद इसमें एक रुपये से ज्यादा की मजबूती आई है। फॉरवर्ड प्रीमियम के आंकड़े बताते हैं कि आने वाले महीनों में रुपये पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में आरबीआई के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह दरों में बदलाव करते समय करेंसी मार्केट पर पड़ने वाले असर को भी ध्यान में रखे।
OMO और बॉन्ड यील्ड का हाल
रिपोर्ट के मुताबिक आरबीआई अब तक ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) के जरिए करीब 6.16 लाख करोड़ रुपये की सरकारी बॉन्ड खरीद कर चुका है। इसके बावजूद सरकारी बॉन्ड यील्ड में नरमी नहीं आई है। एसबीआई रिसर्च का मानना है कि आगे चलकर आरबीआई को OMO के जरिये और 50,000 करोड़ रुपये तक लगाने पड़ सकते हैं ताकि सिस्टम में लिक्विडिटी का सही स्तर बना रहे।
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RBI की बैठक में क्या होगा फैसला
एसबीआई रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में इन सभी संकेतों को जोड़कर यह आकलन निकाला है कि 4-6 फरवरी 2026 की MPC की बैठक में RBI ब्याज दरों में कटौती करने की जगह फिलहाल इंतजार का रास्ता अपनाएगा। अंतरराष्ट्रीय माहौल, रुपये की स्थिति और महंगाई के नए आंकड़ों को देखते हुए रिजर्व बैंक धीरे-धीरे कदम बढ़ाना चाहेगा। यानी फिलहाल राहत की उम्मीद कम और स्टेबिलिटी पर जोर ज्यादा दिख रहा है।
